NCR से बाहर हो सकते हैं हरियाणा के 5 जिले, आज तस्वीर होगी साफ
NCR की सीमा पुनर्निर्धारण के प्रस्ताव से हरियाणा के 5 जिले बाहर हो सकते हैं। आज मनोहर लाल खट्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।
- • NCR की सीमा बदली तो हरियाणा के 5 जिले क्षेत्र से बाहर हो सकते हैं
- • दिल्ली से 100 किलोमीटर रेडियस तक NCR सीमित करने का प्रस्ताव
- • आज NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे अध्यक्षता
हरियाणा के लिए NCR की सीमा को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। दिल्ली में आज होने वाली NCR प्लानिंग बोर्ड की बैठक में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सीमा के पुनर्निर्धारण पर चर्चा होगी। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर करेंगे। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो हरियाणा के कई जिलों की विकास योजनाओं और निवेश संभावनाओं पर सीधा असर पड़ सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार दिल्ली के राजघाट से 100 किलोमीटर की रेडियस तक ही NCR क्षेत्र को सीमित करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में हरियाणा के 14 जिले NCR में शामिल हैं और इनका कुल क्षेत्रफल 25,327 वर्ग किलोमीटर है। नए प्रस्ताव के लागू होने पर यह क्षेत्र घटकर करीब 10,546 वर्ग किलोमीटर रह सकता है।
इस बदलाव का सबसे अधिक असर महेंद्रगढ़, जींद, करनाल, पानीपत और भिवानी पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ये जिले 100 किलोमीटर की सीमा के आसपास स्थित हैं, जिसके चलते इनके NCR से बाहर होने की आशंका बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार महेंद्रगढ़ जिले पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि इसका अधिकांश हिस्सा प्रस्तावित सीमा से बाहर आता है। वहीं जींद भी सीमा रेखा के करीब होने के कारण प्रभावित हो सकता है। करनाल और पानीपत के कुछ हिस्सों को राष्ट्रीय राजमार्ग कॉरिडोर का लाभ मिल सकता है, लेकिन पूरे जिले का NCR में बने रहना मुश्किल माना जा रहा है।
हरियाणा सरकार ने NCR में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए 11 राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर चौड़ा कॉरिडोर बनाए रखने का प्रस्ताव भी दिया है। इससे NH-44 पर स्थित करनाल और पानीपत को राहत मिल सकती है। भिवानी और चरखी दादरी के कुछ हिस्सों को भी इससे आंशिक लाभ मिलने की संभावना है।
आज होने वाली बैठक में यदि राज्यों के बीच सहमति बनती है तो हरियाणा के कई जिलों की शहरी योजना, औद्योगिक विकास, निवेश आकर्षण और इंफ्रास्ट्रक्चर रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
सीनियर एडवोकेट अमित राठी का कहना है कि यदि कुछ जिले NCR से बाहर होते हैं तो राज्य सरकार को उनके लिए अलग औद्योगिक और बुनियादी ढांचा विकास मॉडल तैयार करना होगा, ताकि निवेश और रोजगार पर किसी भी संभावित नकारात्मक असर को कम किया जा सके।
दिलचस्प बात यह है कि मनोहर लाल खट्टर NCR को लेकर दो बार अपना रुख बदल चुके हैं। वर्ष 2015 में मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने करनाल और जींद को NCR में शामिल करवाने को बड़ी उपलब्धि बताया था। हालांकि दिसंबर 2021 में उन्होंने कहा था कि दिल्ली से 100 किलोमीटर से अधिक दूर के जिलों को NCR में रखने का अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है और ऐसे क्षेत्रों को NCR से बाहर किया जाना चाहिए।
Akhil Mahajan