भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास, जानें देश पर क्यो होगा असर
अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ वाला बिल पारित किया है। कानून बनने पर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
➤ अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ वाला बिल भारी बहुमत से किया पारित
➤ भारत के सस्ते रूसी तेल, अमेरिकी निर्यात और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर
➤ बिल अभी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही बनेगा कानून
अमेरिकी सीनेट ने रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर सख्त आर्थिक कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 100% टैरिफ लगाने से जुड़े द्विदलीय विधेयक को 86-11 के भारी बहुमत से पारित कर दिया है। इस विधेयक का मकसद रूस की ऊर्जा आय से मिलने वाली आर्थिक ताकत को कमजोर करना है, लेकिन इसका सबसे बड़ा असर भारत जैसे उन देशों पर पड़ सकता है, जो बड़ी मात्रा में रूसी कच्चे तेल का आयात कर रहे हैं।
इस प्रस्तावित कानून के दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान जैसे देश शामिल हैं। हालांकि यह अभी अंतिम कानून नहीं बना है। इसे लागू होने से पहले अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से मंजूरी और उसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर की जरूरत होगी।
सीनेट ने क्यों उठाया यह कदम?
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका लगातार रूस की आर्थिक ताकत कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में सीनेट ने यह विधेयक पारित किया है।
संशोधित बिल के अनुसार—
- अमेरिकी राष्ट्रपति को अगले 5 वर्षों तक रूस से आने वाले सामान पर 500% तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।
- ईरान प्रतिबंध कानून 1996 का विस्तार वर्ष 2031 तक किया जाएगा।
- रूस के ऊर्जा, रक्षा और वित्तीय संस्थानों के साथ-साथ राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से जुड़ी संस्थाओं पर भी कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
- कुछ यूरोपीय देशों को सीमित छूट दी गई है, जो धीरे-धीरे रूसी गैस पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने वैश्विक बाजार में सस्ते दामों पर उपलब्ध रूसी कच्चे तेल का बड़ा लाभ उठाया है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार—
- जून 2026 में भारत ने रूस से 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया।
- यह भारत के कुल तेल आयात का 52.4 प्रतिशत रहा।
- मई की तुलना में जून में रूसी तेल आयात में करीब 39 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि उसकी प्राथमिकता देश के नागरिकों को सस्ती और स्थिर ऊर्जा आपूर्ति उपलब्ध कराना है ताकि महंगाई नियंत्रित रह सके।
भारत पर पड़ सकते हैं तीन बड़े असर
1. निर्यात और उद्योग पर दबाव
यदि भारतीय उत्पादों पर 100% टैरिफ लागू होता है तो अमेरिका में भारतीय वस्त्र, फार्मा, इंजीनियरिंग उत्पाद और अन्य सामान महंगे हो जाएंगे। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है और व्यापार पर दबाव बढ़ सकता है।
2. ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई
यदि भारत रूसी तेल का आयात कम करता है तो उसे दूसरे स्रोतों से अपेक्षाकृत महंगा कच्चा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत बढ़ सकती है, जिसका असर परिवहन, उद्योग और खाद्य महंगाई पर भी पड़ सकता है।
3. भारत-अमेरिका संबंधों की परीक्षा
हाल के वर्षों में Quad, iCET, रक्षा सहयोग और प्रौद्योगिकी साझेदारी के कारण भारत और अमेरिका के संबंध मजबूत हुए हैं। ऐसे में यदि यह कानून लागू होता है तो दोनों देशों के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संतुलन बनाए रखना नई चुनौती बन सकता है। भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप निर्णय लेने की नीति पर कायम रहने की कोशिश करेगा।
अभी कानून बनने में बाकी हैं दो बड़े चरण
हालांकि सीनेट से बिल पारित हो चुका है, लेकिन इसे लागू होने से पहले अभी दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में चर्चा और मतदान।
- दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति ट्रम्प के हस्ताक्षर।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान संशोधन या कुछ देशों को राहत देने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो सकती है। भारत भी कूटनीतिक स्तर पर अपने हितों की रक्षा के लिए बातचीत का रास्ता अपना सकता है।
Akhil Mahajan