कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले अंकुश को साथी कहते थे 'बौना' ,संघर्ष से सफलता की कहानी

हिसार के अंकुश पंघाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में गोल्ड जीतने के बाद अपने संघर्ष, बचपन की चुनौतियों और पिता-कोच के समर्थन की कहानी साझा की। अब उनका लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलिंपिक है।

कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले अंकुश को साथी कहते थे 'बौना'  ,संघर्ष से सफलता की कहानी

कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतने वाले अंकुश को साथी कहते थे 'बौना'

■ पहली स्टेट चैंपियनशिप हारने पर पिता और कोच ने बढ़ाया हौसला

■ गांव लौटने पर हुआ भव्य स्वागत, पूरे गांव को दी गई दावत


हिसार के भेरिया गांव के युवा बॉक्सर अंकुश पंघाल ने ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में गोल्ड मेडल जीतकर देश और हरियाणा का नाम रोशन किया है। गोल्ड जीतने के बाद जब अंकुश अपने पैतृक गांव पहुंचे तो उनका जोरदार स्वागत किया गया। बहन नीलम ने खुली जीप चलाकर उन्हें गांव तक पहुंचाया, जबकि पूरे रास्ते ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और फूल-मालाओं से उनका अभिनंदन किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अंकुश हिसार पहुंचे। - Dainik Bhaskar

दैनिक भास्कर से बातचीत में 20 वर्षीय अंकुश पंघाल ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि जब उन्होंने 11 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी, तब उनकी हाइट कम होने के कारण साथी खिलाड़ी उन्हें 'बौना' कहकर चिढ़ाते थे। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और लगातार मेहनत करते रहे। जैसे-जैसे मेडल जीतने लगे, लोगों का नजरिया भी बदल गया।

अंकुश ने बताया कि उन्होंने 2017 में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। शुरुआती दिनों में उन्हें बॉक्सिंग ग्लव्स पहनना भी नहीं आता था। सीनियर खिलाड़ियों ने उनकी मदद की और कोच ने उनका हौसला बढ़ाया। पहली बार रिंग में उतरते समय घबराहट जरूर थी, लेकिन उसी दिन उन्होंने तय कर लिया था कि बॉक्सिंग में ही अपना भविष्य बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि 2018 में पहली स्टेट बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फाइनल में हारने के बाद वह इतने निराश हो गए थे कि खेल छोड़ने का मन बना लिया था। उस कठिन समय में पिता सुरेश पंघाल और कोच प्रदीप सावंत ने उन्हें संभाला और दोबारा मेहनत करने के लिए प्रेरित किया। यही भरोसा आज उन्हें कॉमनवेल्थ का गोल्ड दिलाने तक ले आया।

हिसार पहुंचने पर परिजनों ने अंकुश पंघाल और उनके कोच प्रदीप का पगड़ी पहनाकर स्वागत किया।

कॉमनवेल्थ गेम्स के 80 किलोग्राम वर्ग के फाइनल में अंकुश ने इंग्लैंड के डिमेजी शिट्टू को 4-1 से हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया। पहले राउंड में पिछड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और दूसरे व तीसरे राउंड में दमदार पंच लगाकर मुकाबला जीत लिया। इससे पहले सेमीफाइनल में उन्होंने कनाडा के जोशुआ ओफोरी को 5-0 से हराया था।

अंकुश ने अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय अपने पिता को दिया। उन्होंने कहा कि बचपन में उनके पिता रोज उन्हें गांव से करीब 15 किलोमीटर दूर प्रैक्टिस के लिए लेकर जाते थे। कई लोग कहते थे कि बच्चा छोटा है, लेकिन पिता ने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया और लगातार उनका साथ दिया।

उन्होंने बताया कि अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और उसके बाद वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप है। वर्ल्ड चैंपियनशिप में अच्छा प्रदर्शन कर वह ओलिंपिक का टिकट हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए जल्द ही फिर से ट्रेनिंग शुरू करेंगे।

अंकुश के कोच प्रदीप सावंत ने बताया कि पहले दिन से ही उन्हें अंकुश की प्रतिभा पर भरोसा था। कॉमनवेल्थ फाइनल से पहले दोनों ने इंग्लैंड और कनाडा के खिलाड़ियों की रणनीति पर खास तैयारी की, जिसका फायदा फाइनल मुकाबले में मिला।

अंकुश के गोल्ड मेडल जीतने के खुशी में पिता सुरेश ने पूरे गांव को दावत दी।

गोल्ड मेडल जीतने की खुशी में अंकुश के पिता सुरेश पंघाल ने पूरे गांव के लिए भव्य दावत का आयोजन किया। इस मौके पर देसी घी के लड्डू, स्पेशल बर्फी, रसगुल्ले, जलेबी समेत पांच विशेष व्यंजन परोसे गए। पूरे गांव ने अपने चैंपियन की उपलब्धि का जश्न मनाया।