30 के बाद बदलें डाइट,सुबह से रात तक जानें पूरा हेल्दी डाइट प्लान
30 की उम्र के बाद संतुलित डाइट में प्रोटीन, फाइबर, फल, सब्जियां और सीमित मेवे शामिल करें। जानें सुबह से रात तक आसान और हेल्दी डाइट प्लान।
30 के बाद खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर दें खास ध्यान
➤ नाश्ते से रात के खाने तक रखें प्रोटीन और फाइबर का संतुलन
➤ फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज और सीमित मात्रा में मेवे करें शामिल
डाइट चार्ट: 30 की उम्र के बाद शरीर की ऊर्जा जरूरतों और मांसपेशियों में बदलाव हो सकते हैं। ऐसे में संतुलित भोजन के साथ नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या का हिस्सा बनाना जरूरी है। खान-पान, नींद, तनाव और जीवनशैली भी वजन और शरीर की ऊर्जा जरूरतों को प्रभावित करते हैं।
कई लोगों को 30 की उम्र के बाद लगता है कि उनका मेटाबॉलिज्म पहले की तुलना में धीमा हो गया है और इसी वजह से वजन तेजी से बढ़ने लगा है। हालांकि, उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कुछ बदलाव हो सकते हैं, लेकिन केवल उम्र को वजन बढ़ने का एकमात्र कारण मानना सही नहीं है। भोजन की गुणवत्ता और मात्रा, रोजाना की शारीरिक गतिविधि, नींद, तनाव और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में 30 की उम्र के बाद पूरे दिन के भोजन को संतुलित तरीके से रखना जरूरी हो जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति की भोजन संबंधी जरूरत एक जैसी नहीं होती। उम्र, लिंग, वजन, शारीरिक गतिविधि और किसी स्वास्थ्य समस्या के अनुसार भोजन की जरूरत अलग हो सकती है।
सुबह की शुरुआत पर्याप्त पानी और कम चीनी वाली चाय-कॉफी से करें
दिन की शुरुआत पर्याप्त पानी पीकर की जा सकती है। अगर सुबह चाय या कॉफी पीने की आदत है तो उसमें बहुत ज्यादा चीनी डालने से बचना बेहतर है।
खाली पेट किसी खास पेय को वजन घटाने या मेटाबॉलिज्म तेज करने का चमत्कारी उपाय नहीं मानना चाहिए। दिन की शुरुआत साधारण और संतुलित तरीके से करना बेहतर है।
नाश्ते में प्रोटीन और फाइबर का संतुलन रखें
नाश्ता दिन के भोजन का अहम हिस्सा है। इसमें प्रोटीन और फाइबर का संतुलन रखने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए कई सामान्य विकल्प अपनाए जा सकते हैं।
- सब्जियों वाला पोहा।
- दलिया या ओट्स।
- अंडे के साथ साबुत अनाज की रोटी।
- मूंग दाल का चीला।
- दही के साथ फल और थोड़े मेवे।
नाश्ते में केवल मीठे या अत्यधिक तले हुए खाद्य पदार्थ लेने से बचना बेहतर है। इससे दिन की शुरुआत अधिक संतुलित भोजन के साथ की जा सकती है।
मध्य-सुबह भूख लगे तो फल और थोड़े मेवे हो सकते हैं विकल्प
नाश्ते और दोपहर के भोजन के बीच भूख लगने पर मौसमी फल लिया जा सकता है। इसके साथ थोड़ी मात्रा में बिना नमक वाले मेवे भी लिए जा सकते हैं।
यह विकल्प भोजन के बीच अनावश्यक तला-भुना खाने की आदत को कम करने में मदद कर सकता है।
दोपहर की थाली में दाल, सब्जी, रोटी और सलाद रखें
दोपहर के भोजन में थाली को संतुलित रखने की कोशिश करनी चाहिए। इसमें दाल या कोई अन्य प्रोटीन स्रोत, हरी या मौसमी सब्जियां, दो रोटी या जरूरत के अनुसार चावल, दही या छाछ और सलाद शामिल किए जा सकते हैं।
हालांकि, भोजन की मात्रा हर व्यक्ति के लिए समान नहीं हो सकती। इसे रोजाना की ऊर्जा जरूरत और शारीरिक गतिविधि के अनुसार तय करना चाहिए।
शाम की भूख में तले-भुने स्नैक्स की जगह चुनें हल्के विकल्प
शाम के समय भूख लगने पर अक्सर बिस्कुट, नमकीन या तली हुई चीजें खाने की आदत हो जाती है। इनके बजाय भुना चना, फल, मखाने या बिना ज्यादा चीनी वाली चाय के साथ हल्का नाश्ता लिया जा सकता है।
इस तरह शाम के नाश्ते में भी भोजन की गुणवत्ता और मात्रा पर ध्यान रखा जा सकता है।
रात का खाना हल्का, संतुलित और जरूरत के अनुसार रखें
रात के खाने को बहुत भारी रखने के बजाय संतुलित और जरूरत के अनुसार रखना चाहिए। सब्जी, दाल, रोटी या थोड़ी मात्रा में चावल और सलाद जैसे विकल्प लिए जा सकते हैं।
रात के भोजन और सोने के बीच पर्याप्त अंतर रखना बेहतर है। साथ ही नियमित शारीरिक गतिविधि और मांसपेशियों को मजबूत रखने वाली गतिविधियों को भी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी है।
यह पूरा डाइट चार्ट एक सामान्य उदाहरण है। किसी व्यक्ति की उम्र, लिंग, वजन, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य संबंधी स्थिति के अनुसार भोजन की जरूरत अलग हो सकती है। इसलिए 30 की उम्र के बाद डाइट में बदलाव करते समय अपनी व्यक्तिगत जरूरतों को ध्यान में रखना जरूरी है।
Akhil Mahajan