हिसार में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने मनाई काली दिवाली, वेतन और एडवांस नहीं मिलने पर किया प्रदर्शन

हिसार में वेतन और दिवाली एडवांस नहीं मिलने पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने काली दिवाली मनाई। यूनियन ने लंबित भुगतान को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी।

हिसार में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने मनाई काली दिवाली, वेतन और एडवांस नहीं मिलने पर किया प्रदर्शन

अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बावजूद कर्मचारियों को नहीं मिला वेतन और दिवाली एडवांस

➤ 27 अक्टूबर की बैठक में सात मांगों पर बनी थी सहमति, फिर भी भुगतान नहीं होने से नाराजगी

➤ बैंक ऋण की किस्तें, दूध के कूपन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ भी बने परेशानी

हिसार। अधिकारियों के लिखित आश्वासन के बावजूद वेतन और दिवाली एडवांस की राशि नहीं मिलने से नाराज चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों ने शुक्रवार को हिसार में काली दिवाली मनाकर विरोध प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का कहना है कि अधिकारियों के साथ बैठक में उनकी सात मांगों पर सहमति बन चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं किया गया। त्योहार के दौरान आर्थिक तंगी से जूझ रहे कर्मचारियों ने इस मामले में नाराजगी जताते हुए लंबित राशि जल्द जारी करने की मांग उठाई।

हरियाणा राज्य चतुर्थ श्रेणी सरकारी कर्मचारी यूनियन की जिला कमेटी के नेताओं ने आरोप लगाया कि 27 अक्टूबर को अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कर्मचारियों की सात मांगों पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद राजकीय पशुधन फार्म के अधीन उपनिदेशक पशुपालन परियोजना क्षेत्र-3 और उपनिदेशक भेड़ प्रजनन फार्म कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों का वेतन और दिवाली एडवांस जारी नहीं किया गया।

यूनियन के जिला प्रधान छबील दास मौलिया ने कहा कि सरकार की घोषणा के अनुसार कर्मचारियों को 30 अक्टूबर तक वेतन और दिवाली एडवांस मिल जाना चाहिए था। इसके बावजूद निर्धारित समय तक कर्मचारियों के खातों में राशि नहीं पहुंची। इससे कर्मचारियों को त्योहार के दौरान आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि जब अधिकारियों के साथ बातचीत में मांगों पर सहमति बन गई थी, तो फिर भुगतान में देरी का कोई औचित्य नहीं है।

वेतन नहीं मिलने से बैंक ऋण की किस्तें चुकाना भी मुश्किल

कर्मचारियों ने बताया कि समय पर वेतन नहीं मिलने का असर उनकी रोजमर्रा की आर्थिक जिम्मेदारियों पर भी पड़ रहा है। कई कर्मचारी बैंक से लिए गए ऋण की किस्तें समय पर जमा नहीं कर पा रहे हैं। किस्तों के भुगतान में देरी होने पर उन्हें अतिरिक्त पेनल्टी भरनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, इसका असर उनके सिबिल स्कोर पर भी पड़ने की आशंका है। कर्मचारियों का कहना है कि वेतन में देरी के कारण उन्हें ऐसी आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं, जिनसे बचा जा सकता था।

दूध के कूपन नहीं बनने से बाजार भाव पर खरीदना पड़ रहा दूध

यूनियन नेताओं ने कर्मचारियों से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी उठाईं। उन्होंने बताया कि दूध के कूपन नहीं बनाए जा रहे हैं। इसके चलते कर्मचारियों को बाजार भाव पर दूध खरीदना पड़ रहा है। इससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

इसके अलावा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के वित्तीय लाभ से जुड़े मामले भी लंबे समय से लंबित हैं। कर्मचारियों के जीपीएफ से शादी एडवांस लेने से संबंधित मामले भी अटके हुए हैं। यूनियन नेताओं का आरोप है कि भेड़ प्रजनन फार्म कार्यालय में वित्तीय शक्तियां होने के बावजूद दिवाली एडवांस के आवेदनों पर विचार तक नहीं किया गया।

मुख्य अधीक्षक से जल्द भुगतान करवाने की मांग

यूनियन ने मुख्य अधीक्षक, राजकीय पशुधन फार्म से मांग की है कि दोनों कार्यालयों के कर्मचारियों का लंबित वेतन और दिवाली एडवांस जल्द जारी करवाया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि त्योहार के मौके पर आर्थिक राहत मिलने के बजाय उन्हें अपने ही वेतन और एडवांस के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

जिला प्रधान छबील दास मौलिया ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो यूनियन की जिला कमेटी की बैठक बुलाई जाएगी। इस बैठक में कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा कर आगामी बड़े आंदोलन की रणनीति घोषित की जाएगी। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि लंबित मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।