IIT दिल्ली में PM मोदी का Gen-Z को मंत्र, सिर्फ सवाल नहीं समाधान खोजें

PM मोदी ने IIT दिल्ली के दीक्षांत समारोह में Gen-Z को समाधान खोजने, तकनीकी बदलाव अपनाने और अगले 30-35 साल देश के लिए योगदान देने की सलाह दी

IIT दिल्ली में PM मोदी का Gen-Z को मंत्र, सिर्फ सवाल नहीं समाधान खोजें

पीएम मोदी ने Gen-Z को सिर्फ सवाल पूछने नहीं, समाधान खोजने की सलाह दी

■ बोले, मुश्किलें अपने साथ नए अवसर भी लेकर आती हैं

■ अगले 30-35 साल युवाओं के फैसले तय करेंगे विकसित भारत की दिशा

IIT दिल्ली में पीएम मोदी ने युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में देश की युवा शक्ति को विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया तेजी से बदल रही है और इस बदलाव के केंद्र में तकनीक सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभर रही है। ऐसे समय में युवाओं की भूमिका केवल नौकरी पाने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें नई समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान खोजने में आगे रहना होगा।

पीएम मोदी ने Gen-Z से कहा कि सिर्फ सवाल पूछना पर्याप्त नहीं है। जरूरी यह है कि उन सवालों को पहचाना जाए, जिन्हें दुनिया ने सवाल मानना ही छोड़ दिया है। जो युवा नई चुनौतियों के नए समाधान खोजने का साहस रखेगा, उसके लिए मुश्किलें भी अवसर में बदल सकती हैं।

डिग्री सिर्फ नौकरी का टिकट नहीं

प्रधानमंत्री ने छात्रों को उनकी IIT दिल्ली की डिग्री का महत्व समझाते हुए कहा कि यह केवल परीक्षा पास करने, अच्छा CGPA हासिल करने या बेहतर प्लेसमेंट पाने का प्रमाण नहीं है। यह इस बात की पहचान है कि छात्र कठिन परिस्थितियों और समस्याओं का समाधान करने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने कहा कि IIT तक पहुंचना और यहां की पढ़ाई पूरी करना आसान नहीं था। छात्रों ने कई विषयों, प्रोजेक्ट, मिड-सेमेस्टर और एंड-सेमेस्टर परीक्षाओं के अलग-अलग पड़ाव पार किए हैं। यही अनुभव आगे की जिंदगी में उन्हें कठिन फैसले लेने में मदद करेगा।

जो सवाल पहचान लेगा, वही आगे निकलेगा

पीएम मोदी ने कहा कि जिंदगी में कोई तय सिलेबस नहीं होता। परीक्षा में सवाल पहले से निर्धारित होते हैं, लेकिन वास्तविक जीवन में कई बार यह भी पता नहीं होता कि असली समस्या क्या है।

उन्होंने छात्रों से कहा कि सफलता केवल सही जवाब देने से नहीं मिलती। कई बार सफलता उस समस्या को पहचानने से मिलती है, जिसे बाकी लोग समस्या मानना ही बंद कर चुके हैं। युवाओं को ऐसी चुनौतियों को पहचानने और उनके समाधान तलाशने का साहस रखना चाहिए।

मुश्किलों से घबराने के बजाय उन्हें छोटे हिस्सों में बांटें

प्रधानमंत्री ने छात्रों को मुश्किल परिस्थितियों से निपटने का व्यावहारिक तरीका भी बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई चुनौती बहुत बड़ी दिखाई दे तो उससे घबराने के बजाय उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

उन्होंने छात्रों के लैब और प्रोजेक्ट के अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार किसी समस्या का समाधान घंटों या दिनों तक नहीं मिलता। इसके बावजूद कोशिश जारी रखने पर रास्ता निकल आता है। जिंदगी की चुनौतियों के साथ भी यही तरीका अपनाया जा सकता है।

तकनीक की रफ्तार बदल रही दुनिया

पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। टेक्नोलॉजी की रफ्तार के कारण इंडस्ट्री और प्रोफेशन का स्वरूप भी लगातार बदल रहा है। आने वाले वर्षों में कई नई चुनौतियां सामने आएंगी और कई नए अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने छात्रों से बदलाव से डरने के बजाय उसके लिए तैयार रहने को कहा। उनके मुताबिक, जो युवा नए चैलेंज के नए समाधान खोजने की क्षमता रखेगा, वही बदलती दुनिया में आगे बढ़ पाएगा।

‘जो लिखेगा, वो जीतेगा’

दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने छात्रों को एक याद रखने वाली बात भी कही। उन्होंने कहा, ‘जो लिखेगा, वो जीतेगा।’ इसका मतलब केवल लिखने से नहीं, बल्कि नई सोच, नए समाधान और नई दिशा तैयार करने से है।

उन्होंने कहा कि IIT दिल्ली ने छात्रों को समस्या देखकर रुकना नहीं, बल्कि उसके समाधान तक पहुंचने की आदत सिखाई है। यही सोच आगे उनके पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन में भी काम आएगी।

जिंदगी की परीक्षा में बहुत कुछ आउट ऑफ सिलेबस

प्रधानमंत्री ने कहा कि कैंपस की परीक्षा और जिंदगी की परीक्षा में बड़ा अंतर है। कॉलेज में छात्रों को पता होता है कि क्या पढ़ना है और कौन सा असाइनमेंट पूरा करना है, लेकिन वास्तविक जीवन में हर सवाल पहले से तय नहीं होता।

उन्होंने युवाओं से परिस्थितियों के मुताबिक सीखने और फैसले लेने की क्षमता विकसित करने की अपील की। उनके मुताबिक, लर्निंग इंस्टिंक्ट को जिंदगीभर जिंदा रखना जरूरी है।

सवाल उठाएं, लेकिन समाधान भी खोजें

पीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि जो बातें लोग बिना सोचे-समझे स्वीकार कर लेते हैं, उन्हें भी परखने की आदत होनी चाहिए। सवाल करना जरूरी है, लेकिन केवल सवाल उठाकर रुक जाना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने युवाओं से सवालों के जवाब और उनके व्यावहारिक समाधान खोजने का साहस रखने को कहा। यही सोच उन्हें भीड़ से अलग पहचान दिला सकती है।

अगले 30-35 साल देश के लिए अहम

प्रधानमंत्री ने छात्रों को उनके राष्ट्रीय दायित्व की याद भी दिलाई। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अलग चुनौतियां होती हैं और उसका अपना दायित्व भी होता है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज दीक्षांत समारोह से निकल रहे छात्रों के जीवन के अगले 30-35 साल विकसित भारत की यात्रा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण होंगे। इसलिए उनके हर फैसले में यह विचार होना चाहिए कि इससे देश को क्या लाभ मिलेगा और देश की कौन सी जरूरत पूरी होगी।

आत्मनिर्भर भारत में युवाओं की बड़ी भूमिका

पीएम मोदी ने कहा कि भारत आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह विकसित भारत की मजबूत नींव का संकेत है।

उन्होंने IIT दिल्ली से निकलने वाले युवाओं से अपनी प्रतिभा और ज्ञान का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत सफलता के लिए नहीं, बल्कि देश के विकास में योगदान देने के लिए भी करने की अपील की।

कैंपस छोड़ें, रिश्ते नहीं

दीक्षांत समारोह के भावुक माहौल में प्रधानमंत्री ने छात्रों को IIT दिल्ली से जुड़े रिश्तों को बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने दोस्तों, प्रोफेसरों, मेंटर्स और सपोर्ट स्टाफ को याद रखने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि लंबे समय तक साथ रहने वाले लोग धीरे-धीरे परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। कैंपस छोड़ने के बाद भी इन रिश्तों को बनाए रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब जीवन में पीछे मुड़कर देखने का मौका मिलेगा, तो कैंपस की यादें नई ऊर्जा देंगी।