डॉ. विनीता हत्याकांड, हाईकोर्ट से नौकरानी बरी:लुटेरों की फांसी रद्द

कुरुक्षेत्र के डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व नौकरानी पूनम को बरी किया। चार दोषियों की फांसी की सजा 30 साल कैद में बदली।

डॉ. विनीता हत्याकांड, हाईकोर्ट से नौकरानी बरी:लुटेरों की फांसी रद्द

➤ करीब 45 महीने जेल में रहने के बाद डॉ. विनीता अरोड़ा की पूर्व नौकरानी पूनम को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने किया बरी

➤ बाकी चार दोषियों की फांसी की सजा बदली, अब सभी को 30-30 साल की कैद भुगतनी होगी

➤ पुलिस की मोबाइल कॉल और साजिश वाली थ्योरी कोर्ट में साबित नहीं हुई, पूनम के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले


हरियाणा के कुरुक्षेत्र के चर्चित डॉ. विनीता अरोड़ा हत्याकांड में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब 45 महीने जेल में रहने के बाद डॉक्टर की पूर्व नौकरानी पूनम को अदालत ने बरी कर दिया है। वहीं, इस मामले में दोषी ठहराए गए बाकी चार आरोपियों की फांसी की सजा को बदलकर 30-30 साल की कैद में तब्दील कर दिया गया है। हाईकोर्ट ने डकैती से संबंधित धारा हटाकर लूट की धाराओं के तहत सजा निर्धारित की है। पूनम के खिलाफ अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि उसने लुटेरों को डॉक्टर के घर में रखे नकदी और गहनों की जानकारी दी थी या वारदात की साजिश में कोई भूमिका निभाई थी। पुलिस ने जिस मोबाइल नंबर के आधार पर पूनम को दूसरे आरोपियों से जोड़ने की कोशिश की थी, वह नंबर उसके जीजा जसबीर सिंह के नाम पर निकला। अदालत में यह भी साबित नहीं हो सका कि उस नंबर का इस्तेमाल पूनम करती थी। इससे पुलिस की वह थ्योरी भी कमजोर पड़ गई, जिसमें नौकरानी पर आरोपियों को फोन करने और घर की जानकारी देने का आरोप लगाया गया था।

पहले ट्रायल कोर्ट ने पांच आरोपियों को सुनाई थी फांसी

इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को पूर्व नौकरानी पूनम समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया था। इसके बाद 20 दिसंबर 2025 को सभी पांचों को फांसी की सजा सुनाई गई थी। फैसले को चुनौती देते हुए मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंचा।

हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा करने के बाद पूनम के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं पाया। अदालत ने उसकी सजा रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया। वहीं, बाकी चार दोषियों की फांसी की सजा को 30-30 साल की कैद में बदल दिया।

ऐसे हुई थी डॉ. विनीता अरोड़ा की हत्या

केक लेने के बहाने घर में घुसे थे बदमाश।

यह घटना 9 जनवरी 2023 की रात करीब 9:20 बजे की है। डॉ. अतुल अरोड़ा अपने घर पर मौजूद थे और उस समय माता-पिता के कमरे में गए हुए थे। इसी दौरान उन्हें पत्नी डॉ. विनीता की चीख सुनाई दी। बाहर आने पर उन्होंने देखा कि दो युवकों ने उनकी पत्नी पर पिस्तौल तान रखी थी और घर में रखे कैश व गहनों के बारे में पूछ रहे थे। आरोपी केक लेने के बहाने घर में दाखिल हुए थे।

मारपीट में सिर पर चोट लगने से हुई थी मौत।

वारदात के दौरान बदमाशों ने डॉ. अतुल अरोड़ा को भी पिस्तौल के बल पर काबू कर लिया। इसके बाद डॉ. विनीता के साथ मारपीट की गई। सिर में चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। आरोपी घर से नकदी और गहने लेकर फरार हो गए। डॉ. अतुल की शिकायत पर 10 जनवरी 2023 को थाना शहर थानेसर में हत्या और डकैती की धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी।

पुलिस ने सात आरोपियों को किया था गिरफ्तार।

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने पूर्व नौकरानी पूनम समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने पूछताछ और बरामदगी के आधार पर कार्रवाई करते हुए आरोपियों से करीब 19.50 लाख रुपये के जेवरात और लूटी गई लगभग डेढ़ लाख रुपये की नकदी बरामद करने का दावा किया था।

हाईकोर्ट में कैसे कमजोर पड़ गई पूनम के खिलाफ पुलिस की थ्योरी?

घर में गहने रखने की जानकारी होने का था आरोप।

पूनम डॉ. अतुल अरोड़ा के घर में नौकरानी के तौर पर काम करती थी। डॉ. अतुल ने पुलिस को दी शिकायत में संदेह जताया था कि पूनम को घर में नकदी और गहने रखने की जगह की जानकारी थी। उन्होंने यह भी बताया था कि विक्रम उर्फ विक्की पहले पूनम को लेने अस्पताल आया करता था।

पुलिस ने पूनम और विक्की के बीच जान-पहचान को कथित साजिश से जोड़कर देखा था। जांच एजेंसी का दावा था कि पूनम ने विक्की को घर के बारे में जानकारी दी थी। इसके अलावा एक मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल के आधार पर भी उसे दूसरे आरोपियों से जोड़ने का प्रयास किया गया था।

जिस नंबर को पूनम का बताया, वह जीजा के नाम पर निकला।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान मोबाइल नंबर को लेकर अहम तथ्य सामने आया। पुलिस जिस नंबर को पूनम का बता रही थी, वह उसके जीजा जसबीर सिंह के नाम पर था। जसबीर सिंह ने अदालत में बताया कि उसने यह सिम पूनम को नहीं दिया था।

पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि संबंधित मोबाइल नंबर का इस्तेमाल पूनम करती थी। कॉल डिटेल के आधार पर भी वारदात के आसपास पूनम और दूसरे आरोपियों के बीच संपर्क स्थापित नहीं हो पाया। इस तरह मोबाइल फोन के जरिए साजिश में शामिल होने का आरोप अदालत में प्रमाणित नहीं हो सका।

जान-पहचान और घर की जानकारी को साजिश का पर्याप्त सबूत नहीं माना।

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी आरोपी से जान-पहचान होना या घर में नकदी और गहने रखे होने की जानकारी होना अपने आप में आपराधिक साजिश साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

अदालत ने यह भी पाया कि पूनम के खुलासे के आधार पर पुलिस को ऐसी कोई बरामदगी नहीं मिली, जो उसे सीधे वारदात से जोड़ती हो। अभियोजन पक्ष उसके खिलाफ पर्याप्त और ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका। इसी आधार पर ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए पूनम को बरी कर दिया गया।

चार दोषियों को अब भुगतनी होगी 30-30 साल की कैद

हाईकोर्ट ने पूनम को बरी करने के साथ ही मामले के बाकी चार दोषियों की सजा में भी बदलाव किया है। उनकी फांसी की सजा को 30-30 साल की कैद में तब्दील कर दिया गया है। इसके साथ ही डकैती की धारा हटाकर लूट की धाराओं के तहत सजा निर्धारित की गई है।

इस फैसले के बाद करीब तीन साल पुराने चर्चित हत्याकांड में कानूनी स्थिति बदल गई है। एक तरफ पूर्व नौकरानी पूनम को सबूतों के अभाव में राहत मिली है, वहीं बाकी चार दोषियों की मृत्युदंड की सजा भी समाप्त कर दी गई है।