अस्पताल में हिमाचल के CM सुक्खू की शुगर की ही कर दी गलत जांच, मशीन में निकली गड़बड़ी और फिर कुछ ऐसा हुआ ...
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की शुगर जांच में मशीन ने 177 की रीडिंग दिखाई। जांच में खराबी मिलने पर उपकरण बदला गया, मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक लैब की तैयारी।
➤ मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ब्लड शुगर जांच के दौरान मशीन ने 177 की रीडिंग दिखाई
➤ रीडिंग पर संदेह होने के बाद डॉक्टरों ने उपकरण की जांच की, खराबी सामने आने पर मशीन बदली गई
➤ 10 से 15 साल पुराने चिकित्सा उपकरण बदलने पर जोर, पांच मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक ऑटोमेशन लैब की तैयारी
हिमाचल प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले जांच उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी विश्वसनीयता को लेकर एक मामला सामने आया है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ब्लड शुगर जांच के दौरान मशीन ने 177 की रीडिंग दिखाई। इस रीडिंग को लेकर संदेह जताए जाने के बाद संबंधित मशीन की कार्यप्रणाली की जांच करवाई गई। जांच में उपकरण की रीडिंग में गड़बड़ी सामने आई, जिसके बाद खराब मशीन को हटाकर उसकी जगह दूसरा उपकरण लगा दिया गया। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली जांच मशीनों की सटीकता, नियमित रखरखाव और गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सवाल खड़े किए हैं। मुख्यमंत्री ने भी स्वास्थ्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से सही और भरोसेमंद परिणाम मिलने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही प्रदेश में पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने और मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक जांच सुविधाएं विकसित करने की दिशा में भी कदम उठाने की तैयारी है।
शुगर जांच में मशीन ने दिखाई 177 की रीडिंग
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ब्लड शुगर जांच के दौरान संबंधित मशीन पर 177 का आंकड़ा दर्ज हुआ। इस रीडिंग को लेकर मुख्यमंत्री ने संदेह जताया और मशीन की कार्यप्रणाली की जांच करने की बात कही।
मुख्यमंत्री का मानना था कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले जांच उपकरणों से मिलने वाले परिणाम सटीक और भरोसेमंद होने चाहिए। मरीजों के इलाज में जांच रिपोर्ट की अहम भूमिका होती है। ऐसे में उपकरणों की विश्वसनीयता सुनिश्चित करना जरूरी है।
जांच में सामने आई मशीन की खराबी, बदला उपकरण
मामले के बाद डॉक्टरों ने संबंधित जांच मशीन की कार्यप्रणाली की पड़ताल की। जांच के दौरान मशीन की रीडिंग में गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद खराब उपकरण को हटाकर उसकी जगह दूसरी मशीन लगा दी गई।
इस घटना ने सरकारी अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की नियमित जांच और रखरखाव की आवश्यकता को फिर सामने ला दिया है। स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की गुणवत्ता पर लगातार निगरानी रखने की जरूरत बताई गई है।
10 से 15 साल पुराने चिकित्सा उपकरण बदलने पर जोर
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य संस्थानों में लंबे समय से इस्तेमाल हो रही मशीनों की स्थिति की समीक्षा करने पर भी जोर दिया है। खासतौर पर एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी महत्वपूर्ण जांच सुविधाओं से जुड़े पुराने उपकरणों को बदलने की आवश्यकता बताई गई है।
जानकारी के अनुसार, करीब 10 से 15 साल पुराने चिकित्सा उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से बदलने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य संस्थानों में जांच सुविधाओं को अधिक भरोसेमंद और प्रभावी बनाना है।
पांच मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक ऑटोमेशन लैब की तैयारी
हिमाचल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक ऑटोमेशन लैब स्थापित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इसके शुरुआती चरण में पांच मेडिकल कॉलेजों को शामिल करने की जानकारी दी गई है।
इनमें आईजीएमसी शिमला, टांडा, चंबा, हमीरपुर और नेरचौक मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। आधुनिक ऑटोमेशन लैब स्थापित होने से जांच प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपकरणों की गुणवत्ता पर फोकस
मुख्यमंत्री की जांच के दौरान मशीन की रीडिंग में सामने आई गड़बड़ी ने स्वास्थ्य संस्थानों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की नियमित निगरानी की जरूरत को उजागर किया है। इसके साथ ही पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने और आधुनिक तकनीक से लैस जांच सुविधाएं विकसित करने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
अब मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक प्रयोगशालाओं की स्थापना और पुराने उपकरणों को बदलने की दिशा में होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी।
Akhil Mahajan