IPL में चयन का सपना दिखाकर महिला कॉन्स्टेबल से ₹40 लाख की ठगी! लग्जरी गाड़ियों और क्रिकेटर की पहचान से ऐसे बिछाया जाल

नारनौल की महिला कॉन्स्टेबल ने विक्रांत तोमर पर आईपीएल चयन के नाम पर 40 लाख रुपये ठगने का आरोप लगाया। दिल्ली पुलिस करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों से संपर्क की जांच कर रही है।

IPL में चयन का सपना दिखाकर महिला कॉन्स्टेबल से ₹40 लाख की ठगी! लग्जरी गाड़ियों और क्रिकेटर की पहचान से ऐसे बिछाया जाल

➤ हरियाणा पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल का आरोप, IPL में चयन के नाम पर विक्रांत तोमर ने ठगे ₹40 लाख

➤ सहवाग क्रिकेट एकेडमी में हुई थी मुलाकात, आरोपी ने खुद को रणजी खिलाड़ी बताकर जीता भरोसा

➤ दिल्ली पुलिस की करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों से संपर्क होने का शक, आरोपी के खिलाफ कई मामले दर्ज


क्रिकेट में आगे बढ़ने और आईपीएल में चयन का सपना एक महिला पुलिसकर्मी को इतना महंगा पड़ा कि उसे कथित तौर पर 40 लाख रुपये गंवाने पड़े। हरियाणा पुलिस में तैनात नारनौल की एक महिला कॉन्स्टेबल ने विक्रांत उर्फ विक्की तोमर पर आरोप लगाया है कि उसने खुद को रणजी क्रिकेट खिलाड़ी बताकर उससे संपर्क बढ़ाया और आईपीएल में चयन कराने के नाम पर बड़ी रकम उधार ली, लेकिन बाद में पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। पीड़िता के अनुसार, दोनों की मुलाकात झज्जर स्थित पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग की क्रिकेट एकेडमी में हुई थी। आरोपी ने आईपीएल में चयन के लिए 60 लाख रुपये की जरूरत बताई और एक सप्ताह में रकम लौटाने का भरोसा दिया। महिला कॉन्स्टेबल का दावा है कि उसने विक्रांत, उसके भाई तन्मय, बिलाल खान और अन्य लोगों के खातों में अलग-अलग किस्तों में कुल 40 लाख रुपये ट्रांसफर किए। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पीड़िता ने ईस्ट दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। मामले ने इसलिए भी गंभीरता हासिल कर ली है, क्योंकि पुलिस को आशंका है कि आरोपी दिल्ली पुलिस की एक ही बैच की करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों के संपर्क में था। हालांकि, इन सभी के साथ ठगी होने की पुष्टि नहीं हुई है।

सहवाग एकेडमी में हुई मुलाकात, रणजी खिलाड़ी बताकर बढ़ाया संपर्क।

पीड़िता के मुताबिक, वह अपनी बहन के साथ झज्जर स्थित सहवाग क्रिकेट एकेडमी में अभ्यास करने जाती थी। वह खुद भी क्रिकेट खेल चुकी है। इसी दौरान उसकी मुलाकात विक्रांत तोमर से हुई। महिला कॉन्स्टेबल का आरोप है कि विक्रांत ने खुद को दिल्ली रणजी टीम का खिलाड़ी बताया और बड़े क्रिकेटरों के साथ अपनी तस्वीरें दिखाईं। उसकी कथित लग्जरी लाइफस्टाइल और महंगी गाड़ियों में आने-जाने के कारण पीड़िता को उस पर भरोसा हो गया।

पीड़िता के अनुसार, मई 2021 में दोनों के बीच इंस्टाग्राम पर बातचीत बढ़ी। आरोपी की सोशल मीडिया आईडी ‘विक्ट्री’ नाम से थी। बातचीत के दौरान उसने आईपीएल में चयन के लिए 60 लाख रुपये की जरूरत बताई और कुछ समय के लिए पैसे उधार मांगे।

एक सप्ताह में रकम लौटाने का भरोसा, कई खातों में ट्रांसफर हुए पैसे।

महिला कॉन्स्टेबल के अनुसार, शुरुआत में उसने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई थी। आरोप है कि इसके बाद विक्रांत ने अपने मामा संजीव का हवाला दिया और एक सप्ताह के भीतर पैसे वापस करने का भरोसा दिलाया। इस भरोसे के बाद पीड़िता ने अलग-अलग किस्तों में कुल 40 लाख रुपये विक्रांत, उसके भाई तन्मय, बिलाल खान और अन्य लोगों के बैंक खातों में ट्रांसफर किए।

पीड़िता का कहना है कि रकम की व्यवस्था करने के लिए उसने अपनी बहन से भी कुछ पैसे उधार लिए थे। आरोप है कि तय समय पर रकम वापस नहीं मिली। जब उसने पैसे मांगे तो आरोपी कथित तौर पर टालमटोल करने लगा और बाद में रकम लौटाने से इनकार कर दिया। महिला कॉन्स्टेबल ने यह भी आरोप लगाया कि उसे नौकरी से हटवाने की धमकी दी गई।

महंगी गाड़ियों और सोशल मीडिया से बनाता था प्रभाव।

पुलिस जांच के अनुसार, 26 वर्षीय विक्रांत तोमर उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के वजीदपुर का रहने वाला है। आरोप है कि वह कुछ घंटों के लिए महंगी गाड़ियां किराये पर लेता था और उन्हीं गाड़ियों में घूमकर सोशल मीडिया पर तस्वीरें तथा वीडियो साझा करता था। इस तरह वह अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत और लग्जरी लाइफस्टाइल वाला दिखाने की कोशिश करता था।

जांच में सामने आए आरोपों के मुताबिक, वह महिलाओं से इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क बढ़ाता था। कहीं वह खुद को क्रिकेटर बताता, तो कहीं कारोबारी होने का दावा करता था। बातचीत आगे बढ़ने पर वह शादी का भरोसा देने या निवेश पर अच्छा मुनाफा मिलने जैसी बातें कहकर पैसे मांगता था। रकम मिलने के बाद कथित तौर पर वह टालमटोल करने लगता और पैसे वापस मांगने पर संपर्क कम कर देता था।

इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। मामले में पुलिस जांच के निष्कर्ष और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

दिल्ली पुलिस की महिला कॉन्स्टेबल से जुड़े मामले में हुई गिरफ्तारी।

रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के करोल बाग थाने में तैनात महिला कॉन्स्टेबल शिवानी से 24 लाख रुपये की कथित ठगी के मामले में विक्रांत को 24 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस के मध्य जिला साइबर थाने की कार्रवाई के दौरान हुई।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी के खिलाफ दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर ठगी से संबंधित मामले दर्ज हैं। खबर में मायापुरी, हरि नगर और इंद्रपुरी थानों सहित अलग-अलग क्षेत्रों के मामलों का उल्लेख है। आरोपी इसी साल जून में जेल से जमानत पर बाहर आया था।

दिल्ली पुलिस की करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों से संपर्क का शक।

जांच के दौरान पुलिस को आशंका हुई कि विक्रांत दिल्ली पुलिस की एक ही बैच की करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों के संपर्क में था। रिपोर्ट के अनुसार, उसकी लिव-इन पार्टनर भी दिल्ली पुलिस में महिला कॉन्स्टेबल है। पुलिस को संदेह है कि आरोपी ने उसके मोबाइल फोन और दस्तावेजों के जरिए अन्य महिला पुलिसकर्मियों की जानकारी हासिल की हो सकती है।

हालांकि, करीब 20 महिला कॉन्स्टेबलों से संपर्क होने का संदेह सामने आया है, लेकिन सभी के साथ ठगी होने की पुष्टि नहीं हुई है। कुछ महिलाओं की ओर से औपचारिक शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने नहीं आई है। इसलिए इस मामले में संपर्क और कथित ठगी के बीच अंतर समझना जरूरी है।

पहले गुरुग्राम में शिकायत देने का भी दावा।

पीड़िता का आरोप है कि उसने पहले गुरुग्राम में विक्रांत के खिलाफ शिकायत दी थी, लेकिन उस समय कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसने ईस्ट दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराई। अब मामले में पैसों के लेन-देन, संबंधित बैंक खातों और आरोपी के संपर्कों की जांच महत्वपूर्ण होगी।

यह मामला सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली संपन्न जीवनशैली, बड़े दावों और जल्द पैसा लौटाने के वादों के आधार पर किसी पर भरोसा करने के जोखिम को भी सामने लाता है। किसी व्यक्ति के क्रिकेटर, कारोबारी या प्रभावशाली लोगों से जुड़ा होने के दावे की पुष्टि किए बिना बड़ी रकम देना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।