करनाल जिला परिषद में सियासी भूचाल, चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

करनाल जिला परिषद की चेयरपर्सन के खिलाफ 16 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव दिया है। ग्रांट में भेदभाव, जातिगत पक्षपात और 16-17 करोड़ रुपये के गबन के आरोप लगाए गए हैं। DC ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है।

करनाल जिला परिषद में सियासी भूचाल, चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

करनाल जिला परिषद चेयरपर्सन के खिलाफ 16 पार्षदों का अविश्वास प्रस्ताव
ग्रांट में भेदभाव, जातिगत पक्षपात और 16-17 करोड़ गबन के आरोप
BJP पार्षद भी मोर्चे पर, DC ने प्रस्ताव स्वीकार किया


करनाल में जिला परिषद की राजनीति अचानक गरमा गई है। 16 पार्षदों ने जिला परिषद की चेयरपर्सन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव दायर कर दिया है। आरोप बेहद गंभीर हैं। ग्रांट वितरण में भेदभाव, जातिगत आधार पर अनदेखी, चहेते लोगों का गुट बनाकर काम करने और 16-17 करोड़ रुपये के कथित गबन तक के आरोप लगाए गए हैं। खास बात यह है कि इस प्रस्ताव में भाजपा के पार्षद भी शामिल हैं।

नाराज पार्षद जिला सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त को अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। DC ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। अब नियमानुसार आगे की प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे आने वाले दिनों में जिला परिषद की सियासत और तेज होने के संकेत हैं।

जिला परिषद की वाइस चेयरपर्सन एवं वार्ड 16 की पार्षद रीना देवी ने कहा कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया। उन्होंने बताया कि करीब सवा तीन साल तक सभी सदस्य परिवार की तरह काम करते रहे, लेकिन चेयरपर्सन प्रतिनिधि सोहन सिंह राणा द्वारा ग्रांट का निष्पक्ष वितरण नहीं किया गया। आरोप है कि 11 एससी और बीसी पार्षदों को उचित ग्रांट नहीं दी गई।

रीना देवी ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने सभी पार्षदों को समान ग्रांट और बिना भेदभाव विकास कार्यों का आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा नहीं हुआ। जहां ग्रांट दी गई, वहां भी कार्य नहीं कराए गए।

भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष और वार्ड 13 के पार्षद मोहन सैनी सहित वार्ड 19 के पार्षद विनोद, रेणु देवी और सोनिया देवी ने भी चेयरपर्सन की नीतियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि एससी और बीसी वर्ग के साथ अन्याय हुआ है और चेयरपर्सन प्रतिनिधि द्वारा तंत्र का दुरुपयोग किया गया। कई बार शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई।

पार्षदों ने यह भी आरोप लगाया कि अधिकांश विकास कार्य चेयरपर्सन प्रतिनिधि के वार्ड में ही कराए गए और वहां भी वित्तीय अनियमितताएं हुईं। करीब 16-17 करोड़ रुपये के गबन का आरोप सामने आया है। उनका कहना है कि जनता को जवाब देना मुश्किल हो रहा है क्योंकि उनके वार्डों में विकास कार्य ठप पड़े हैं।

अब सभी की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि अविश्वास प्रस्ताव नियमानुसार पारित होता है तो जिला परिषद की कमान में बदलाव संभव है।