करनाल में कृषि मंत्री के सामने किसानों का हंगामा, धान खरीद में देरी और नमी कटौती पर फूटा गुस्सा

करनाल की घरौंडा मंडी में धान खरीद में देरी और नमी के नाम पर कटौती से नाराज किसानों ने कृषि मंत्री के सामने नारेबाजी की, भाजपा कार्यकर्ताओं से बहस हुई।

करनाल में कृषि मंत्री के सामने किसानों का हंगामा, धान खरीद में देरी और नमी कटौती पर फूटा गुस्सा

➤ तीन दिन से मंडी में इंतजार, धान की खरीद नहीं होने का आरोप

➤ नमी के नाम पर 250 से 400 रुपये प्रति क्विंटल तक कटौती का दावा

➤ मंत्री के सामने नारेबाजी के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और किसानों में तीखी बहस


करनाल। हरियाणा में धान खरीद को लेकर किसानों की परेशानी एक बार फिर सामने आई है। करनाल जिले की घरौंडा अनाज मंडी में रविवार को धान की खरीद में देरी और नमी के नाम पर कथित कटौती से नाराज किसानों ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा के सामने विरोध जताया। मंत्री के मार्केट कमेटी कार्यालय से निकलकर गाड़ी में बैठते ही किसानों ने नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद भाजपा कार्यकर्ताओं और किसानों के बीच बहस हो गई। किसानों का आरोप है कि वे पिछले तीन दिनों से अपनी धान बेचने के लिए मंडी में बैठे हैं, लेकिन खरीद प्रक्रिया में तेजी नहीं आ रही। वहीं, नमी का हवाला देकर प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपये तक काटे जाने की शिकायत भी किसानों ने उठाई। इस घटनाक्रम के दौरान मंडी में खरीद व्यवस्था को लेकर नाराजगी और तनाव का माहौल बन गया।

भाजपा कार्यकर्ताओं और किसानों के बीच मार्केट कमेटी कार्यालय के सामने बहस हुई।

तीन दिन से मंडी में इंतजार, फिर भी खरीद नहीं होने की शिकायत

किसान गगनदीप, सोनू और अन्य किसानों ने बताया कि वे तीन दिन से घरौंडा अनाज मंडी में धान बेचने के लिए इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि खरीद एजेंसियों के कर्मचारी समय पर धान की ढेरियों तक नहीं पहुंच रहे, जबकि मंडी में राइस मिलर्स की संख्या भी कम बताई जा रही है। इससे खरीद और उठान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

किसानों ने दावा किया कि 17 प्रतिशत नमी होने के बावजूद धान की खरीद नहीं की जा रही। उनका कहना है कि खरीद में देरी के कारण मंडी में इंतजार बढ़ रहा है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। किसानों ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा नेता और कार्यकर्ता मंडी में आकर तस्वीरें खिंचवाते हैं और समस्याओं के समाधान का भरोसा देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उन्हें राहत नहीं मिल रही।

बारिश की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ी

किसानों के मुताबिक, धान की खरीद पहले ही धीमी चल रही है। ऐसे में बारिश होने से फसल में नमी बढ़ने की आशंका है, जिससे खरीद में और अड़चन आ सकती है। किसानों का कहना है कि उन्हें पहले ही कम भाव मिलने और नमी के नाम पर कटौती का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों ने बताया कि मंडी में धान करीब 2,000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदे जाने की बात सामने आ रही है। गगसीना के एक किसान ने आरोप लगाया कि उसकी धान 2,200 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदी गई, जिससे उसे नुकसान उठाना पड़ा। किसानों ने मांग की कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल कार्यालयों में बैठकर जानकारी लेने के बजाय मंडियों में पहुंचें और खरीद व्यवस्था की वास्तविक स्थिति देखें।

नमी के नाम पर कटौती के लिए स्पष्ट नियम बनाने की मांग

किसान नेता जगदीप औलख ने धान खरीद में आ रही दिक्कतों और नमी के नाम पर की जा रही कटौती पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मंत्रियों और अधिकारियों को किसानों की समस्याओं की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद मंडियों में हालात सुधरने की जरूरत है। उनके अनुसार, घरौंडा मंडी में राइस मिलर्स की कमी भी खरीद प्रक्रिया को प्रभावित कर रही है।

औलख ने दावा किया कि 20 प्रतिशत तक नमी वाली धान में नियमानुसार कटौती करीब 75 रुपये प्रति क्विंटल बनती है, जबकि किसानों से कथित तौर पर 250 से 300 रुपये तक काटे जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि धान में नमी निर्धारित सीमा से दो प्रतिशत अधिक हो जाती है, तो कटौती के लिए स्पष्ट और पारदर्शी फार्मूला क्यों नहीं बनाया जाता।

किसानों की मांग है कि नमी के आधार पर कटौती की प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए, ताकि किसानों को मनमानी कटौती की शिकायत न करनी पड़े। उनका कहना है कि खरीद के मानक और कटौती का हिसाब किसानों को साफ तौर पर बताया जाना चाहिए।

भाजपा कार्यकर्ताओं ने सरकार का पक्ष रखा

किसानों की नारेबाजी के दौरान भाजपा कार्यकर्ता निशांत राणा, पवन ढाकला और संजय खैंची ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि सरकार निर्धारित मानकों के अनुसार किसानों की धान खरीद रही है। कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यापारी या अन्य व्यक्ति कम भाव पर फसल खरीद रहा है, तो किसान लिखित शिकायत दें, ताकि मामले की जांच कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जा सके।

हालांकि, किसानों की शिकायतों और भाजपा कार्यकर्ताओं के जवाब के बीच बहस होती रही। किसानों का कहना था कि उन्हें आश्वासन के बजाय खरीद में तेजी और कटौती की समस्या का ठोस समाधान चाहिए।

कृषि मंत्री ने बारिश और राइस मिलर्स की हड़ताल को बताया वजह

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कुछ मंडियों में धान की लिफ्टिंग यानी खरीदी गई फसल के उठान की रफ्तार धीमी हुई है। इसके पीछे बारिश और राइस मिलर्स की हड़ताल भी कारण हैं। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से बातचीत कर धान के उठान में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मंत्री के अनुसार, सरकार का प्रयास है कि किसानों को उनकी फसल का पूरा भुगतान मिले और कोई भी किसान अपनी उपज बेचने से वंचित न रहे। उन्होंने खरीद व्यवस्था के बारे में बताते हुए कहा कि धान की खरीद के बाद मिलिंग की जाती है और चावल भारतीय खाद्य निगम (FCI) को दिया जाता है। ऐसे में खरीद, मिलिंग और उठान की प्रक्रिया आपस में जुड़ी हुई है।

अब किसानों की निगाहें इस बात पर हैं कि घरौंडा मंडी सहित अन्य मंडियों में खरीद और उठान की गति कितनी तेज होती है और नमी के नाम पर कटौती को लेकर उठाई गई शिकायतों पर क्या कार्रवाई होती है।