हरियाणा का गौरव: जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें CJI बने, जश्‍न का माहौल

जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें CJI के रूप में शपथ ली। हरियाणा के पहले CJI बनने पर परिवार और गांव में खुशी की लहर। हिसार और पेटवाड़ से उनका गहरा जुड़ाव रहा है।

हरियाणा का गौरव: जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें CJI बने,  जश्‍न का माहौल
  • जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें CJI बने
  • हरियाणा से पहले व्यक्ति जो पहुंचे इस पद पर
  • हिसार-गांव पेटवाड़ से गहरा जुड़ाव और भावुक पल


देश को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के रूप में शपथ ली। यह क्षण हरियाणा के लिए बेहद गर्व का विषय रहा क्योंकि वे राज्य से इस पद पर पहुंचने वाले पहले व्यक्ति हैं। राष्ट्रपति भवन में हुए शपथ ग्रहण समारोह में सूर्यकांत के पूरे परिवार और गांव के लोग विशेष रूप से शामिल हुए। उनके बड़े भाई डॉ. शिवकांत के अनुसार, तीनों भाई, पत्नियां, सभी बच्चे, बेटी-दामाद, बहन का परिवार और पिता के मित्रों सहित पूरा कुनबा इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बना।

हिसार बार एसोसिएशन ने जस्टिस सूर्यकांत के शपथ ग्रहण से पहले हवन कराया।

शपथ ग्रहण से एक दिन पहले रविवार को ही उनका परिवार दिल्ली पहुंच गया था। वहीं हिसार में डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन ने इस अवसर को बेहद खास बनाने के लिए सुबह हवन कराया और वकीलों ने ढोल की थाप पर नाचकर खुशी का इजहार किया। जस्टिस सूर्यकांत के करियर की शुरुआत भी यहीं से हुई थी, इसलिए हिसार के वकीलों और आम लोगों में उत्साह साफ नजर आया।

हिसार के गांव पेटवाड़ में दिवाली पर अपने घर आए थे जस्टिस सूर्यकांत।

जस्टिस सूर्यकांत का हिसार और गांव पेटवाड़ से गहरा जुड़ाव रहा है। CJI बनने से पहले दिवाली पर वे अचानक अपने पैतृक गांव पेटवाड़ पहुंचे थे और पुश्तैनी घर में रुके थे। उनका पूरा परिवार आज भी गांव में रहता है। यहां उनके बचपन के दोस्त, ताऊ-चाचा और परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं। गांव में उनकी इस सादगीपूर्ण उपस्थिति ने लोगों को भावुक कर दिया था।

करियर की बात करें तो सूर्यकांत ने वर्ष 1984-85 में हिसार जिला न्यायालय में वकील के रूप में अपनी शुरुआत की। लगभग छह महीने तक वे यहां वरिष्ठ वकील स्वर्गीय आत्माराम बंसल के साथ जूनियर के रूप में जुड़े रहे। हिसार बार एसोसिएशन को शपथ ग्रहण समारोह में विशेष निमंत्रण भी मिला, जो बार के लिए गर्व का विषय रहा।

हिसार बार एसोसिएशन के सदस्यों को शपथ ग्रहण का विशेष निमंत्रण दिया गया।

परिवार के बारे में बात करते हुए उनके भाई ऋषिकांत ने बताया कि परिवार में सभी लोग शिक्षक थे, लेकिन सूर्यकांत ने अलग राह चुनते हुए कानून की पढ़ाई की। उन्होंने गांव के सरकारी स्कूल से 10वीं और हिसार सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन की। वह शुरू से ही तेज और हाजिरजवाब थे। ग्रेजुएशन के दौरान उनकी लिखी कविता “मेढ़ पर मिट्टी चढ़ा दो” युवाओं में काफी चर्चित हुई थी।

उनकी पसंद सादा भोजन है। बड़े भाई शिवकांत के अनुसार, वे मिसी रोटी, बाजरे की रोटी, लहसुन की चटनी, लस्सी और मूंग की दाल पसंद करते हैं। उनकी पत्नी सविता सूर्यकांत इंग्लिश की प्रोफेसर रहीं और कॉलेज प्रिंसिपल के पद से रिटायर हुई हैं। उनकी दो बेटियां—मुग्धा और कनुप्रिया—पढ़ाई कर रही हैं।

जस्टिस सूर्यकांत अपने गांव के बच्चों से भी गहरा जुड़ाव रखते हैं। परिवार का ‘पंडित राम प्रसाद आत्माराम धर्मार्थ न्यास’ नाम से NGO है, जिसमें बिना किसी चंदे के 10वीं और 12वीं के टॉपर छात्रों को सम्मानित किया जाता है। उनके पिता मदन गोपाल संस्कृत के शिक्षक और साहित्यकार थे। उन्होंने हरियाणवी में रामायण लिखी थी, जिसके लिए उन्हें हिंदी साहित्य अकादमी से सूरदास पुरस्कार मिला। साथ ही 14 पुस्तकें और पंडित लख्मीचंद पुरस्कार भी प्राप्त किया।

यह शपथ ग्रहण सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक गांव, एक जिले और पूरे हरियाणा के लिए गौरव का क्षण है, जिसने इतिहास में अपनी जगह दर्ज कर ली है।