जींद रियासत की रानी और पुत्रवधू पर जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप, FIR में नगर परिषद सचिव और पटवारी भी नामजद

जींद रियासत की जमीन के रिकॉर्ड में कथित बदलाव को लेकर रानी इंद्रजीत कौर समेत पांच लोगों पर FIR दर्ज हुई। रानी ने आरोप नकारते हुए प्रॉपर्टी आईडी की गलती बताई।

जींद रियासत की रानी और पुत्रवधू पर जमीन के दस्तावेजों में हेराफेरी का आरोप, FIR में नगर परिषद सचिव और पटवारी भी नामजद

➤ जींद में करीब 10 एकड़ जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप, रानी इंद्रजीत कौर और पुत्रवधू समेत कई लोग FIR में नामजद

➤ वकील ने खसरा नंबर और जमीन का रकबा बदलने का आरोप लगाया, दो बार रजिस्ट्री कराने की कोशिश का भी दावा

➤ रानी इंद्रजीत कौर ने आरोपों को नकारा, कहा- तकनीकी गलती से बदली लोकेशन, रियासत को बदनाम करने की कोशिश


जींद। हरियाणा की ऐतिहासिक जींद रियासत की रानी इंद्रजीत कौर और उनकी पुत्रवधू हरसिमरन कौर जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में कानूनी विवाद में घिर गई हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के वकील अभिमन्यु चौधरी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में दोनों के अलावा नगर परिषद सचिव सुमित दहिया, पटवारी नरेश चहल और रामराय निवासी सुभाष ठेकेदार को भी नामजद किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जींद के ओपोलो रोड स्थित करीब 10 एकड़ जमीन के भू-अभिलेखों और डिजिटल रिकॉर्ड में कथित तौर पर छेड़छाड़ की गई तथा जमीन पर कब्जा करने का प्रयास हुआ। शिकायत के अनुसार, जमीन की रजिस्ट्री कराने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते हुए दो बार प्रयास किया गया, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। दूसरी ओर, रानी इंद्रजीत कौर ने इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताते हुए इसे तकनीकी गलती का मामला बताया है। उनका कहना है कि जमीन उनकी है और दस्तावेजों में जानबूझकर हेराफेरी करने के आरोप निराधार हैं।

60 साल पुरानी पारिवारिक संपत्ति को लेकर विवाद

वकील अभिमन्यु चौधरी के मुताबिक, उनके परिवार का जमीन से जुड़ा विवाद करीब छह दशक पुरानी संपत्ति के रिकॉर्ड से संबंधित है। उन्होंने शिकायत में बताया कि उनके दादा बलदेव सिंह ने वर्ष 1965 में 50 कनाल 2 मरला जमीन वाला एक बड़ा फार्म हाउस खरीदा था। अब यह संपत्ति परिवार की तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इस संपत्ति में उनके अलावा उनकी मां सुधा चौधरी, जो सेवानिवृत्त लेबर कमिश्नर हैं, और उनके बड़े भाई अभिजीत सिंह भी हिस्सेदार हैं।

अभिमन्यु ने आरोप लगाया कि जमीन से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और डिजिटल भू-अभिलेखों में बदलाव किए गए हैं। उनका दावा है कि सरकारी डिजिटल रिकॉर्ड की जांच के दौरान जमीन के खसरा नंबर, कुल क्षेत्रफल और लोकेशन में अंतर सामने आया। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है।

खसरा नंबर 65/58 की जगह 65/13 दर्ज करने का आरोप

शिकायत के मुताबिक, वकील ने हरियाणा सरकार के आधिकारिक डिजिटल रिकॉर्ड में अपनी जमीन की 9 प्रॉपर्टी आईडी और नक्शे की जांच की थी। इस दौरान कथित तौर पर पता चला कि उनकी जमीन का वास्तविक खसरा नंबर 65/58 होने के बावजूद डिजिटल नक्शे में उसकी जगह 65/13 दर्ज कर दिया गया।

अभिमन्यु का आरोप है कि रिकॉर्ड में बदलाव के साथ जमीन के कुल क्षेत्रफल में भी बड़ा अंतर किया गया। उनके मुताबिक, मूल रूप से 50 कनाल 2 मरला जमीन का रकबा घटाकर दस्तावेजों में केवल 18 कनाल 15 मरला दर्ज कर दिया गया। उन्होंने जमीन की लोकेशन बदलने का आरोप भी लगाया है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि जमीन के रिकॉर्ड में इस तरह का अंतर सामान्य बदलाव का मामला नहीं माना जा सकता और इसकी जांच की जानी चाहिए। हालांकि, ये सभी आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। इनकी सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगा।

दूसरे खसरे का रकबा बढ़ाने का भी आरोप

वकील अभिमन्यु ने अपनी शिकायत में एक अन्य खसरा नंबर के क्षेत्रफल में बदलाव का आरोप भी लगाया है। उनके अनुसार, एक ओर उनके परिवार की जमीन का रकबा कम दर्ज किया गया, वहीं दूसरी ओर खसरा नंबर 64/26/3/2 का क्षेत्रफल बढ़ा हुआ दिखाया गया।

शिकायत के मुताबिक, इस खसरे का क्षेत्रफल पहले 79 कनाल 19 मरला दर्ज था, जिसे कथित तौर पर बढ़ाकर 115 कनाल 13 मरला कर दिया गया। अभिमन्यु का आरोप है कि डिजिटल रिकॉर्ड और जमीन के नक्शे में हुए इन बदलावों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

इस मामले में जमीन की पुरानी खरीद, राजस्व रिकॉर्ड, डिजिटल नक्शे और प्रॉपर्टी आईडी से जुड़े दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड में कथित बदलावों के आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

रानी इंद्रजीत कौर ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, 65 वर्षीय रानी इंद्रजीत कौर ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीनों की लोकेशन एक-दूसरे के साथ लगती है और विवाद की वजह डिजिटल रिकॉर्ड में हुई तकनीकी गलती है।

रानी के अनुसार, खसरा नंबर 65 शिकायतकर्ता का है, जबकि खसरा नंबर 64 उनकी संपत्ति से संबंधित है। उन्होंने बताया कि खसरा नंबर 64 की प्रॉपर्टी आईडी बनवाने के लिए नगर परिषद में आवेदन किया गया था। उनके मुताबिक, सैटेलाइट से तस्वीर लेते समय सिस्टम ने गलती से खसरा नंबर 65 की लोकेशन उठा ली, जिसके कारण शिकायतकर्ता की संपत्ति की आईडी उनके नाम दर्ज हो गई।

रानी ने दावा किया कि बाद में डीसी ने उस आईडी को दोबारा एनए कर दिया था। उन्होंने यह भी कहा कि जमीन की दोबारा पैमाइश होने तक उसकी मौजूदा स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे। उनके अनुसार, शिकायतकर्ता के दादा ने ही रामबीर कॉलोनी बसाई थी।

रियासत को बदनाम करने की कोशिश का लगाया आरोप

रानी इंद्रजीत कौर ने कहा कि जमीन हड़पने के लिए दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने के आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को रियासत की छवि खराब करने की कोशिश बताया और कहा कि वह इस तरह की एफआईआर से डरने वाली नहीं हैं।

उनका पक्ष है कि विवाद की जड़ जमीन की लोकेशन और प्रॉपर्टी आईडी से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी है, जबकि शिकायतकर्ता इसे रिकॉर्ड में कथित हेराफेरी का मामला बता रहे हैं। दोनों पक्षों के दावों में स्पष्ट अंतर है। ऐसे में जमीन के मूल दस्तावेजों, राजस्व रिकॉर्ड, डिजिटल नक्शों और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच से ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

1763 में हुई थी जींद रियासत की स्थापना

जींद रियासत का इतिहास भी इस मामले को चर्चा में ला रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी स्थापना वर्ष 1763 में महाराजा गजपत सिंह सिद्धू ने की थी। वह सिख इतिहास की फूलकियां मिसल से संबंधित थे। जींद रियासत को हरियाणा और पंजाब के ऐतिहासिक क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख रियासतों में गिना जाता था। इसकी राजधानी मुख्य रूप से संगरूर रही, जो वर्तमान में पंजाब में स्थित है।

फिलहाल, जमीन के दस्तावेजों में कथित हेराफेरी को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद मामला चर्चा में है। शिकायतकर्ता ने रिकॉर्ड में बदलाव की जांच की मांग की है, जबकि रानी इंद्रजीत कौर ने आरोपों को नकारते हुए तकनीकी गलती का पक्ष रखा है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही होगी।