नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 99.50 लाख लेने का आरोप, झज्जर कोर्ट ने की आरोपी की डिस्चार्ज याचिका खारिज
झज्जर कोर्ट ने नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 99.50 लाख रुपये लेने के आरोपों से जुड़े मामले में कपिल रैना की डिस्चार्ज याचिका खारिज की।
नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 2 करोड़ रुपये मांगने का आरोप
➤ 99.50 लाख रुपये लेने के मामले में कपिल रैना की डिस्चार्ज याचिका खारिज
➤ खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर होने का तथ्य रिकॉर्ड पर, लेन-देन की जांच ट्रायल में होगी
झज्जर के बहादुरगढ़ में नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने के नाम पर 2 करोड़ रुपये मांगने और 99.50 लाख रुपये लेने के आरोपों से जुड़े मामले में आरोपी कपिल रैना को अदालत से राहत नहीं मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित गर्ग की अदालत ने उसकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा गया, जिसमें कपिल रैना की डिस्चार्ज अर्जी नामंजूर कर दी गई थी।
मामले में शिकायतकर्ता राकेश सिंह के बैंक खाते से कपिल रैना के खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर होने का तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद है। आरोपी ने इस रकम को पुराने कर्ज की वापसी बताया था और अपने बचाव में वॉट्सऐप चैट का हवाला दिया था। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि रकम के लेन-देन की वास्तविक परिस्थितियों और चैट की प्रामाणिकता की जांच मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगी। फिलहाल अदालत ने आरोपी को इस स्तर पर आरोपों से मुक्त करने से इनकार कर दिया है।
चेयरमैन बनवाने के नाम पर 2 करोड़ रुपये मांगने का आरोप
यह मामला बहादुरगढ़ के गांव सराय औरंगाबाद निवासी राकेश सिंह की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए राकेश सिंह को नीति आयोग का चेयरमैन बनवाने का भरोसा दिया था। इसके बदले उससे 2 करोड़ रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि इस रकम में से 1 करोड़ रुपये एडवांस देने की बात कही गई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि पार्टी फंड के नाम पर 30 लाख रुपये नकद लिए गए, जबकि 69.50 लाख रुपये बैंक खातों में ट्रांसफर कराए गए। इस तरह कुल 99.50 लाख रुपये लेने का आरोप है। इसी मामले में कपिल रैना की भूमिका और उसके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने का मामला जांच के दायरे में आया।
शिकायतकर्ता के खाते से कपिल रैना के खाते में गए 5 लाख रुपये
मामले में कपिल रैना के खिलाफ कार्रवाई का अहम आधार शिकायतकर्ता के खाते से उसके बैंक खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर होने का तथ्य बना। शिकायतकर्ता के अनुसार, मुख्य आरोपी प्रवीण चंदर के कहने पर यह रकम कपिल रैना के खाते में भेजी गई थी।
पुलिस ने मामले की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ अदालत में चालान पेश किया। जांच और बैंक खाते में रकम के हस्तांतरण से जुड़े तथ्यों के आधार पर मामला न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा। कपिल रैना ने हालांकि आरोपों से अपना संबंध होने से इनकार किया और रकम को पुराने उधार की वापसी बताया।
27 अगस्त 2021 को बहादुरगढ़ के थाना सेक्टर-6 में दर्ज हुई थी FIR
इस मामले में 27 अगस्त 2021 को थाना सेक्टर-6, बहादुरगढ़ में एफआईआर नंबर 287 दर्ज की गई थी। आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 406, 420 और 506 के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले में पुलिस की जांच के बाद चालान अदालत में पेश किया गया। इसके बाद आरोपी कपिल रैना ने निचली अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल की थी। उसका प्रयास था कि उसे मामले में आरोपों का सामना करने से मुक्त कर दिया जाए, लेकिन निचली अदालत ने उसकी मांग स्वीकार नहीं की। इसके बाद उसने इस आदेश को चुनौती देते हुए आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की।
कपिल रैना का दावा- प्रवीण चंदर को शादी के लिए दिए थे 5 लाख रुपये
कपिल रैना ने अपनी डिस्चार्ज अर्जी में दावा किया था कि कथित ठगी से उसका कोई लेना-देना नहीं है। बचाव पक्ष के मुताबिक, उसने वर्ष 2020 में प्रवीण चंदर को उसके चचेरे भाई की शादी के लिए 5 लाख रुपये उधार दिए थे।
आरोपी का कहना था कि शिकायतकर्ता के खाते से उसके बैंक खाते में आई रकम उसी पुराने कर्ज की वापसी थी। उसने अपने दावे के समर्थन में वॉट्सऐप चैट का भी हवाला दिया। बचाव पक्ष ने इसी आधार पर तर्क दिया कि केवल बैंक खाते में रकम आने से कपिल रैना को कथित ठगी के मामले में आरोपी बनाए रखना उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर आरोपी की ओर से पेश किए गए दस्तावेजों और वॉट्सऐप चैट के आधार पर उसे आरोपों से मुक्त करने की मांग स्वीकार नहीं की। अदालत के अनुसार, इन दस्तावेजों की वास्तविकता और रकम के लेन-देन की परिस्थितियों का परीक्षण मुकदमे के दौरान किया जाएगा।
बचाव पक्ष ने दी दलील, राज्य और शिकायतकर्ता ने किया विरोध
कपिल रैना की ओर से अधिवक्ता हिमांशु ने अदालत में दलील दी कि केवल उसके बैंक खाते में रकम ट्रांसफर होने के आधार पर उसे मामले में आरोपी बनाए रखना उचित नहीं है। बचाव पक्ष ने रकम को पुराने कर्ज की वापसी बताते हुए अपनी दलील रखी।
वहीं, राज्य की ओर से लोक अभियोजक फूल कुमार और शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता एस.के. वर्मा ने पुनरीक्षण याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोप तय करने के चरण में लागू कानूनी सिद्धांतों और सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया।
कोर्ट ने कहा- वॉट्सऐप चैट की प्रामाणिकता का फैसला ट्रायल में होगा
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरोप तय करने के चरण में आरोपी की ओर से पेश दस्तावेजों और वॉट्सऐप चैट की प्रामाणिकता पर विस्तृत सुनवाई नहीं की जा सकती। इन दस्तावेजों की वास्तविकता, उनके संदर्भ और बैंक खातों के जरिए हुए लेन-देन की परिस्थितियों की जांच मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
इसका मतलब है कि आरोपी की ओर से पेश की गई चैट और पुराने कर्ज की वापसी से जुड़ा दावा मुकदमे के दौरान परखा जाएगा। अदालत ने फिलहाल इस दलील को आरोपी को आरोपों से मुक्त करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं माना।
निचली अदालत का आदेश बरकरार, CRR-87-2025 याचिका खारिज
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुमित गर्ग ने माना कि शिकायतकर्ता के बैंक खाते से कपिल रैना के खाते में 5 लाख रुपये ट्रांसफर होने का तथ्य रिकॉर्ड पर मौजूद है। ऐसे में बहादुरगढ़ की न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी आशिमा गर्ग द्वारा 25 अगस्त 2025 को डिस्चार्ज अर्जी खारिज करने के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता।
अदालत ने कपिल रैना की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका CRR-87-2025 खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अदालत का यह फैसला कपिल रैना को दोषी ठहराने का नहीं है। अदालत ने केवल इस स्तर पर उसे आरोपों से मुक्त करने की मांग खारिज की है। मामले में लेन-देन, बचाव पक्ष के दावों और संबंधित साक्ष्यों की जांच मुकदमे के दौरान होगी।
Akhil Mahajan