हरियाणा में पहली बार निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का लाइसेंस, DHBVNL का एकाधिकार खत्म

हरियाणा में पहली बार निजी कंपनी को गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण लाइसेंस मिला। सरकार फैसले के खिलाफ APTEL जाएगी, उपभोक्ताओं को विकल्प मिलेगा।

हरियाणा में पहली बार निजी कंपनी को बिजली सप्लाई का लाइसेंस, DHBVNL का एकाधिकार खत्म

➤ HERC ने इलेवन पावर को गुरुग्राम और नूंह के लिए समानांतर वितरण लाइसेंस दिया

➤ उपभोक्ताओं को DHBVNL या निजी कंपनी में बिजली सप्लायर चुनने का विकल्प मिलेगा

➤ ऊर्जा मंत्री अनिल विज बोले- सरकार फैसले के खिलाफ APTEL में करेगी अपील


हरियाणा की बिजली व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह जिलों में बिजली वितरण के लिए समानांतर लाइसेंस दे दिया है। हरियाणा में इस तरह की व्यवस्था पहली बार लागू होगी। इसके साथ ही इन दोनों जिलों में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम यानी DHBVNL का वितरण क्षेत्र में मौजूदा एकाधिकार खत्म होगा और पात्र उपभोक्ताओं के पास सरकारी वितरण कंपनी के साथ निजी कंपनी से बिजली लेने का विकल्प भी होगा। हालांकि, ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने आयोग के इस फैसले के खिलाफ विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण यानी APTEL में अपील करने की बात कही है।

HERC के फैसले के मुताबिक इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह के लिए दूसरा पैरेलल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस दिया गया है। इसका मतलब यह है कि दोनों जिलों में एक ही क्षेत्र में सरकारी और निजी वितरण कंपनी बिजली आपूर्ति कर सकेंगी। उपभोक्ता अपनी जरूरत और उपलब्ध विकल्प के आधार पर बिजली वितरण कंपनी का चयन कर सकेंगे।

यह व्यवस्था मौजूदा मोबाइल नेटवर्क जैसी पूरी तरह समान व्यवस्था नहीं है, लेकिन इसे आसान भाषा में समझें तो संबंधित उपभोक्ताओं के लिए बिजली वितरण सेवा चुनने का विकल्प बढ़ेगा। निजी कंपनी को केवल बड़े औद्योगिक या व्यावसायिक उपभोक्ताओं तक सीमित रहने की अनुमति नहीं होगी, बल्कि लाइसेंस की शर्तों के अनुसार उसे निर्धारित क्षेत्र में मांग करने वाले उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।

HERC और विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद लाइसेंस

आयोग ने कंपनी की पात्रता और वित्तीय क्षमता की समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर विचार किया। पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक निगम की अध्यक्षता वाली विशेषज्ञ समिति ने कंपनी से जुड़े विभिन्न मानकों की समीक्षा की। आयोग में कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार भी शामिल हैं।

समीक्षा में कंपनी की कैपिटल एडिक्वेसी, क्रेडिट वर्थनेस और कोड ऑफ कंडक्ट से जुड़े वैधानिक मानकों को देखा गया। आयोग के अनुसार कंपनी ने निर्धारित आवश्यकताओं को पूरा किया है। इसके बाद समानांतर वितरण लाइसेंस देने का फैसला किया गया।

हर ग्राहक को बिजली देने की जिम्मेदारी होगी

लाइसेंस की महत्वपूर्ण शर्तों में नो-चेरी पिकिंग और यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन शामिल हैं। यानी निजी कंपनी केवल अधिक राजस्व देने वाले बड़े औद्योगिक और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को चुनकर बिजली नहीं दे सकेगी।

कंपनी को कानून की धारा 43 के तहत अपने लाइसेंस क्षेत्र में मांग करने वाले घरेलू, ग्रामीण, किसान और अन्य उपभोक्ताओं को भी बिजली आपूर्ति की जिम्मेदारी निभानी होगी। इसके लिए कंपनी को पांच साल की नेटवर्क डेवलपमेंट योजना के तहत वितरण नेटवर्क विकसित करना होगा।

कंपनी किसी खास उपभोक्ता वर्ग या क्षेत्र के साथ भेदभाव नहीं कर सकेगी। इसके अलावा उसे अपने वितरण क्षेत्र में आवश्यक ढांचा और नेटवर्क तैयार करने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी।

सरकारी कंपनी से निजी कंपनी में जाने के लिए बकाया चुकाना होगा

यदि कोई उपभोक्ता DHBVNL से निजी कंपनी की सेवा में स्विच करना चाहता है, तो उसे पहले सरकारी बिजली कंपनी से जुड़े पेंडिंग बिल, FSA और अन्य बकाया का निपटारा करना होगा। किसी उपभोक्ता को जबरन निजी कंपनी की सेवा लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा।

यानी वितरण कंपनी बदलने का फैसला उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर रहेगा। इसके लिए निर्धारित नियमों और स्विचओवर प्रक्रिया का पालन करना होगा।

निजी कंपनी को अपना वितरण ढांचा तैयार करना होगा

HERC ने लाइसेंस के साथ ट्रांसमिशन और ग्रिड एक्सेस से जुड़ी शर्तें भी तय की हैं। इलेवन पावर को स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटी HVPNL, SLDC के ग्रिड सुरक्षा नियमों और CERC के General Network Access (GNA) प्रावधानों का पालन करना होगा।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निजी कंपनी सरकारी HVPNL की जमीन या मौजूदा बुनियादी ढांचे पर अपने वितरण नेटवर्क का एकाधिकार दावा नहीं कर सकती। कंपनी को अपने सब-स्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर को निर्धारित नियमों के अनुसार विकसित करना होगा।

गुरुग्राम के सेक्टरों के लिए विशेष नियम

गुरुग्राम के अधिसूचित क्षेत्रों, जिसमें सेक्टर 58 से 115 जैसे क्षेत्र शामिल हैं, वहां कंपनी को HERC के 220/33/0.4 kV पायलट प्रोजेक्ट बेल्ट (PPB) आर्किटेक्चर और 33 kV बेल्ट से संबंधित नियमों का पालन करना होगा।

आयोग ने निजी वितरण कंपनी पर तकनीकी, वित्तीय और संचालन से जुड़े नियम लागू किए हैं। विशेषज्ञ समिति और प्रशासनिक बैठकों से जुड़े खर्चों के लिए कंपनी को आयोग में 30 लाख रुपये का अग्रिम भी जमा कराना होगा।

इसके अलावा होल्डिंग कंपनी SAS Fininvest LLP और प्रमोटर्स की ओर से वित्तीय सहायता तथा कोड ऑफ कंडक्ट से संबंधित हलफनामा भी लाइसेंस की शर्तों का हिस्सा रहेगा।

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने फैसले को बताया काला दिन

HERC के फैसले के बाद बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की ओर से इसका विरोध शुरू हो गया है। हरियाणा पावर एम्प्लॉइज एवं इंजीनियर्स संयुक्त मोर्चा ने इस फैसले को हरियाणा के इतिहास का काला दिन बताया है।

विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि गुरुग्राम और नूंह जैसे अधिक राजस्व वाले औद्योगिक एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को निजी कंपनी के लिए खोलना सरकारी बिजली निगमों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। उनका आरोप है कि आने वाले समय में प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी निजी कंपनियों को बिजली वितरण की जिम्मेदारी दिए जाने की दिशा में यह पहला कदम हो सकता है।

हरियाणा पावर इंजीनियर एसोसिएशन (HPEA) के महासचिव रविंदर घनघस ने बताया कि संयुक्त मोर्चे की आपात बैठक चल रही है। संगठन ने सरकार के फैसले का विरोध करने की बात कही है।

अनिल विज बोले- APTEL में अपील करेगी सरकार

HERC के फैसले पर ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने भी सरकार का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग की ओर से इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस देने के आदेश के खिलाफ सरकार APTEL में अपील करेगी।

विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण बिजली क्षेत्र से जुड़े मामलों में अपील सुनने वाला विशेष न्यायिक मंच है। यदि किसी पक्ष को APTEL के फैसले से भी असहमति रहती है, तो निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत उसके आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है।

पूर्व मंत्री संपत सिंह ने बताया सुनियोजित साजिश

इनेलो नेता और पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने भी फैसले का विरोध किया है। उन्होंने इसे बिजली व्यवस्था में एक खतरनाक प्रयोग बताते हुए कहा कि बिजली सामान्य बाजारू वस्तु नहीं, बल्कि नागरिकों से जुड़ी बुनियादी सेवा है।

संपत सिंह ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अधिक कमाई वाले बिजली क्षेत्रों को निजी कंपनी के लिए खोलने की दिशा में लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे और मौजूदा फैसला उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आरोप है और इस संबंध में अंतिम स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया से ही स्पष्ट होगी।

अब इस पूरे मामले में HERC के फैसले के खिलाफ सरकार की प्रस्तावित APTEL अपील अहम होगी। दूसरी ओर, निजी कंपनी को मिले लाइसेंस की शर्तों के तहत गुरुग्राम और नूंह में वितरण नेटवर्क तैयार करने और उपभोक्ताओं को सेवा देने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। ऐसे में आने वाले समय में यह फैसला हरियाणा की बिजली वितरण व्यवस्था और उपभोक्ताओं के विकल्पों पर बड़ा असर डाल सकता है।