टेरररिस्ट कनेक्शन का डर दिखाकर शातिरों ने सब इंस्पेक्टर को किया डिजीटल अरेस्ट, ऐंठे लाखों
पंचकूला में ITBP सब-इंस्पेक्टर को 14 दिन डिजिटल अरेस्ट रखकर ठगों ने उग्रवादी कनेक्शन का डर दिखाया और फर्जी दस्तावेजों से ₹7.50 लाख हड़प लिए।
➤ फर्जी पुलिस, ATS और NIA अफसर बनकर 14 दिन तक डिजिटल अरेस्ट का जाल
➤ हर दो घंटे में वीडियो कॉल पर ऑनलाइन हाजिरी, इंटरनेट बंद होते ही आता था फोन
➤ सुप्रीम कोर्ट और RBI के फर्जी दस्तावेज दिखाकर निवेश तुड़वाकर ₹7.50 लाख ट्रांसफर कराए
पंचकूला जिले के रामगढ़ स्थित ITBP फैमिली कॉम्प्लेक्स में तैनात ITBP के सब-इंस्पेक्टर (टेलीकम्युनिकेशन) मदन सिंह (58) को साइबर ठगों ने 14 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के जाल में फंसाकर ₹7.50 लाख की ठगी कर ली। शिकायत के अनुसार, ठगों ने खुद को शिमला पुलिस, ATS पुणे और NIA के अधिकारी बताकर पहले उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड के अपराध में इस्तेमाल होने की बात कही और बाद में उनके खिलाफ उग्रवादी कनेक्शन का डर पैदा किया। इसके बाद फर्जी सरकारी दस्तावेज और सुप्रीम कोर्ट के नाम से तैयार गिरफ्तारी वारंट दिखाकर उन्हें लगातार ऑनलाइन निगरानी में रखा गया। ठगों ने हर दो घंटे में वीडियो या इंटरनेट चालू रखकर अपनी लोकेशन रिपोर्ट करने को कहा। जब पीड़ित का बैंक खाता लगभग खाली हो गया और ठगों की ओर से पैसे वापस नहीं किए गए, तब उन्हें डिजिटल ठगी का अहसास हुआ और उन्होंने पंचकूला साइबर थाना पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
14 दिनों तक चलता रहा डिजिटल अरेस्ट का जाल
शिकायत के अनुसार, पीड़ित के मोबाइल पर एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को शिमला पुलिस से बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल एक अपराध में हुआ है। ITBP में तैनाती की जानकारी देने पर कॉल करने वाले ने मामला ATS मुख्यालय पुणे भेजने का नाटक किया।
इसके बाद खुद को ATS पुणे का सीनियर इंस्पेक्टर बताने वाले व्यक्ति ने पुलिस की वर्दी में WhatsApp वीडियो कॉल की। उसने पीड़ित को बताया कि उनके आधार कार्ड से जुड़ा सिम जम्मू-कश्मीर में एक उग्रवादी के पास मिला है और उन पर उग्रवादी से पैसों के लेनदेन का आरोप है। ठगों ने उन्हें पुणे आकर गिरफ्तारी देने के लिए कहा।
पीड़ित ने जब अपनी ड्यूटी का हवाला दिया तो ठगों ने एक और फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया। उन्होंने NIA का फर्जी लेटर भेजकर कहा कि उनकी ऑनलाइन जांच को मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही शर्त रखी गई कि हर दो घंटे में वीडियो या इंटरनेट ऑन रखकर अपनी लोकेशन की रिपोर्ट करनी होगी। शिकायत के अनुसार, जैसे ही इंटरनेट बंद होता था, ठग तुरंत फोन करके इंटरनेट चालू करवाते थे।
सुप्रीम कोर्ट के नाम से भेजा फर्जी गिरफ्तारी वारंट
7 अक्टूबर को ठगों ने भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के नाम का फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजा। इसके बाद उन्होंने RBI के नाम से तैयार फर्जी पत्र दिखाकर पीड़ित को अपने सभी निवेश तुड़वाकर रकम बैंक खाते में जमा कराने के लिए कहा।
ठगों ने पीड़ित को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि यह रकम किसी जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और सत्यापन पूरा होने के बाद वापस कर दी जाएगी। इस तरह डर और कानूनी कार्रवाई का दबाव बनाकर उनसे लगातार पैसे ट्रांसफर करवाए गए।
दो दिनों में ₹7.50 लाख कराए ट्रांसफर
शिकायत के अनुसार, 1 अक्टूबर को पीड़ित से यस बैंक खाते में दो-दो लाख रुपये के दो चेक के माध्यम से कुल ₹4 लाख ट्रांसफर कराए गए। इसके बाद 12 अक्टूबर को बैंक ऑफ इंडिया खाते में ₹3 लाख और UPI के जरिए ₹50 हजार ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह कुल ₹7.50 लाख की रकम ठगों के बताए खातों में पहुंच गई।
ठगों ने पीड़ित से कहा था कि 12 घंटे में वेरिफिकेशन पूरा कर NOC जारी कर दी जाएगी और रकम वापस कर दी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जब पीड़ित के SBI खाते में केवल ₹45,000 बचे और ठगों की ओर से कोई रकम वापस नहीं आई, तब उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं।
इसके बाद उन्होंने मामले की जानकारी पंचकूला साइबर थाना पुलिस को दी और शिकायत दर्ज कराई।
खातों को फ्रीज करवाने की प्रक्रिया चल रही- SHO
पंचकूला सेक्टर-20 साइबर थाना इंचार्ज युद्धवीर के अनुसार, पीड़ित की शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है। ठगी की रकम जिन बैंक खातों में गई है, उन्हें फ्रीज करवाने की प्रक्रिया चल रही है। मामले में शिकायत के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि साइबर ठग किस तरह पुलिस, ATS, NIA, सुप्रीम कोर्ट और RBI जैसे संस्थानों के नाम का इस्तेमाल करके लोगों में डर पैदा करते हैं। इस मामले में भी ठगों ने पहले अपराध में सिम के इस्तेमाल की बात कही, फिर उग्रवादी कनेक्शन का डर दिखाया और बाद में फर्जी दस्तावेजों के जरिए लगातार ऑनलाइन निगरानी तथा पैसों के ट्रांसफर का दबाव बनाया।
Akhil Mahajan