लॉरेंस गैंग से जुड़े रंगदारी केस में धोलिया को जमानत,गुरुग्राम कोर्ट का आदेश, ₹1 लाख का मुचलका
लॉरेंस गैंग से जुड़े रंगदारी मामले में अंकित उर्फ धोलिया को गुरुग्राम कोर्ट से जमानत मिली। आरोपी पर हत्या समेत 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
लॉरेंस गैंग से जुड़े रंगदारी मामले में अंकित उर्फ धोलिया को गुरुग्राम कोर्ट से जमानत
➤ बाढ़ड़ा के गांव डांडमा निवासी धोलिया पर हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट समेत 20 से अधिक केस दर्ज होने की जानकारी
➤ 31 मार्च 2025 से जेल में बंद था आरोपी, सह-आरोपियों को मिली जमानत और लंबी सुनवाई के आधार पर कोर्ट ने दिया राहत का आदेश
चरखी दादरी/गुरुग्राम। लॉरेंस गैंग के सदस्यों द्वारा विदेश और भारतीय जेलों से वॉट्सऐप व सोशल मीडिया के जरिए कारोबारियों से रंगदारी वसूलने और अवैध हथियार रखने से जुड़े चर्चित मामले में चरखी दादरी के बदमाश अंकित उर्फ धोलिया (30 वर्ष) को जमानत मिल गई है। गुरुग्राम के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (ASJ) सुदीप गोयल की अदालत ने आरोपी को ₹1,00,000 के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है। आरोपी 31 मार्च 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद था।
सरकारी वकील के अनुसार, अंकित उर्फ धोलिया के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट समेत 20 से अधिक अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं। जमीन विवाद में अपने चाचा की हत्या करने का मामला भी उसके आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़ा बताया गया है। हालांकि, मौजूदा रंगदारी मामले में अदालत ने उसकी हिरासत की अवधि, सह-आरोपियों को पहले मिल चुकी जमानत और मुकदमे की मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए राहत दी है।
अदालत ने आरोपी को जमानत देते समय समानता के सिद्धांत का हवाला दिया। इस मामले में 25 से अधिक सह-आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और स्थानीय अदालतों से पहले ही जमानत मिल चुकी है। अदालत के आदेश के अनुसार, यदि आरोपी किसी अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में नहीं है और जमानत की जरूरी औपचारिकताएं पूरी हो जाती हैं, तो उसे जेल से रिहा किया जा सकता है।
बाढ़ड़ा के गांव डांडमा का रहने वाला है अंकित उर्फ धोलिया
जानकारी के अनुसार, 30 वर्षीय अंकित उर्फ धोलिया चरखी दादरी जिले के बाढ़ड़ा क्षेत्र के गांव डांडमा का निवासी है। बताया गया है कि अंकित उर्फ धोलिया और उसके साथी विदेश में बैठे गैंगस्टर लॉरेंस के भतीजे अक्षय के सीधे संपर्क में थे।
इस मामले में एएसआई संजय कुमार की शिकायत पर 10 मई 2024 को थाना फर्रुखनगर, गुरुग्राम में एफआईआर नंबर 114 दर्ज की गई थी। इसी मामले में अंकित उर्फ धोलिया को गिरफ्तार किया गया था। केस में आरोपियों पर मृत्यु का भय दिखाकर रंगदारी मांगने, जबरन वसूली, धमकी देने, आपराधिक षड्यंत्र रचने और अवैध हथियार रखने जैसे आरोप हैं।
अंकित उर्फ धोलिया के खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन विवाद में वह अपने चाचा की हत्या के मामले में भी आरोपी है।
लॉरेंस गैंग के सदस्यों से कार्बाइन मिलने का भी मामला
पुलिस की जानकारी के अनुसार, रोहित गोदारा, नवीन बॉक्सर, लिपन नेहरा और पवन नेहरा जैसे लॉरेंस गिरोह से जुड़े लोग जेलों और विदेश में बैठकर वॉट्सऐप तथा इंस्टाग्राम के माध्यम से अपना नेटवर्क चला रहे थे। आरोप है कि इस नेटवर्क के जरिए गुरुग्राम के कारोबारियों और पैसे वाले लोगों को जान से मारने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की रंगदारी वसूली जा रही थी।
पुलिस ने जांच के दौरान मुख्य आरोपी दिनेश उर्फ दीनू, लोकेश कुमार और अजीत यादव सहित कई आरोपियों को हथियारों और कार्बाइन के साथ गिरफ्तार किया था। अंकित उर्फ धोलिया को इस मामले में 31 मार्च 2025 को गिरफ्तार किया गया था।
बचाव पक्ष ने कहा- आरोपी से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ
अंकित उर्फ धोलिया की ओर से पेश वकील ने अदालत में जमानत के पक्ष में कई तर्क रखे। बचाव पक्ष के अनुसार, आरोपी 31 मार्च 2025 से न्यायिक हिरासत में बंद है और उससे इस मामले में कोई हथियार या अवैध वस्तु बरामद नहीं हुई। वकील ने यह भी दलील दी कि आरोपी का नाम केवल सह-आरोपी के डिस्क्लोजर बयान में आया है।
बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि मामले के लगभग सभी 25 सह-आरोपियों को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट और सत्र अदालत से नियमित जमानत मिल चुकी है। इनमें अजीत यादव, संजीव उर्फ फौजी, जय प्रकाश, विद्याधर, लोकेश, सागर और प्रदीप सहित अन्य आरोपी शामिल बताए गए हैं।
वकील ने यह तर्क भी दिया कि मामले में अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं और मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। ऐसे में आरोपी को लंबे समय तक न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं होगा।
सरकारी वकील ने जमानत का किया विरोध
लोक अभियोजक यानी सरकारी वकील अनीता चौधरी ने आरोपी को जमानत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने अदालत में कहा कि अंकित उर्फ धोलिया पर गंभीर आरोप हैं और उसके खिलाफ 20 से अधिक अन्य आपराधिक मुकदमे लंबित हैं।
सरकारी पक्ष ने आशंका जताई कि जमानत पर रिहा होने के बाद आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उसे राहत नहीं दी जानी चाहिए। अदालत के समक्ष बचाव पक्ष और अभियोजन पक्ष, दोनों की दलीलें रखी गईं।
अदालत ने सह-आरोपियों को मिली जमानत के आधार पर दिया आदेश
गुरुग्राम के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुदीप गोयल ने मामले की पत्रावली, हाईकोर्ट के आदेशों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार किया। अदालत ने सह-आरोपी जय प्रकाश को 10 दिसंबर 2025 को और दिनेश उर्फ दीनू को दी गई जमानत के सिद्धांतों का भी हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि वर्तमान आरोपी अंकित की भूमिका जमानत पा चुके अन्य सह-आरोपियों के समान है। इसी आधार पर उसे भी समानता का लाभ देने पर विचार किया गया। अदालत ने आरोपी की हिरासत की अवधि और मामले की मौजूदा स्थिति को भी ध्यान में रखा।
अभी तक आरोप तय नहीं, गवाहों को धमकाने पर रोक
अदालत ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि अंकित उर्फ धोलिया 31 मार्च 2025 से न्यायिक हिरासत में है। पुलिस चालान पेश कर चुकी है, लेकिन अभी तक आरोप तय नहीं हुए हैं। मुकदमे की सुनवाई पूरी होने में काफी समय लगने की संभावना को भी अदालत ने ध्यान में रखा।
इन परिस्थितियों और सह-आरोपियों को पहले मिल चुकी जमानत के आधार पर अदालत ने अंकित उर्फ धोलिया को नियमित जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। इसके साथ ही जमानत के लिए शर्तें भी तय की गई हैं। आरोपी को निर्देश दिया गया है कि वह गवाहों को डराए-धमकाए नहीं और प्रत्येक पेशी पर अदालत में उपस्थित हो।
जमानत मिलने का अर्थ मामले में आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी और आरोपी को अदालत की निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा।
Akhil Mahajan