श्री राम कथा के सप्तम दिन माता शबरी की भक्ति का प्रसंग, साध्वी ने बताया जीव हत्या से बचने का संदेश
समालखा में श्री राम कथा के सप्तम दिवस माता शबरी के जीवन प्रसंग का वर्णन हुआ। साध्वी प्रवीणा भारती ने भक्ति और जीवों पर करुणा का संदेश दिया।
➤ समालखा में श्री राम कथा के सातवें दिन माता शबरी के जीवन प्रसंग का वर्णन
➤ बाल अवस्था में ही माता शबरी के जीवन में भक्ति का शुभ आरंभ बताया
➤ साध्वी प्रवीणा भारती ने स्वाद के लिए जीव हत्या न करने का संदेश दिया
समालखा (पानीपत)। श्री आदर्श ड्रामाटिक क्लब समालखा में आयोजित श्री राम कथा के सप्तम दिवस पर दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से माता शबरी के जीवन और उनकी अटूट भक्ति का भावपूर्ण प्रसंग प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की साध्वी शिष्या प्रवीणा भारती ने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित श्री रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से माता शबरी के जीवन, उनकी भक्ति और भगवान श्रीराम के प्रति उनके समर्पण को श्रद्धालुओं के सामने रखा। कथा के दौरान माता शबरी के जीवन से जुड़े प्रसंग के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि मनुष्य को अपनी जीभ के स्वाद के लिए किसी जीव की हत्या नहीं करनी चाहिए।
साध्वी प्रवीणा भारती ने बताया कि माता शबरी के जीवन में भक्ति का शुभ आरंभ बाल अवस्था में ही हुआ था। कथा के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि उस समय समाज में बाल विवाह की परंपरा प्रचलित थी। माता शबरी के जीवन में भक्ति का आरंभ उनके निजी जीवन से जुड़े एक भावुक प्रसंग के माध्यम से हुआ।
कथा में बताया गया कि उस समय माता शबरी का नाम बिल्लनी था और जिस दिन उनका विवाह होने वाला था, उस दिन उनके घर के आंगन में बड़ी संख्या में जानवरों को लाकर बांधा गया था। बाल अवस्था में बिल्लनी ने अपने घर की छत पर खड़े होकर घर में आने वाले मेहमानों और आंगन में बंधे जानवरों को देखा। उन्होंने अपनी मां से पूछा कि इतने सारे जानवरों को यहां क्यों लाया गया है।
कथा के अनुसार, उनकी मां ने बताया कि बेटी का विवाह होने वाला है और ससुराल पक्ष के लोग विवाह में आएंगे। उनके स्वागत और भोजन की व्यवस्था के लिए इन जानवरों को काटकर भोजन के रूप में परोसा जाएगा, ताकि ससुराल पक्ष को यह शिकायत न रहे कि विवाह में उनकी उचित खातिरदारी नहीं हुई।
इस प्रसंग ने बालिका बिल्लनी के मन को गहराई से प्रभावित किया। साध्वी ने इसी प्रसंग के माध्यम से माता शबरी की संवेदनशीलता और उनके भीतर जागी भक्ति भावना को समझाया। कथा के दौरान श्रद्धालुओं को बताया गया कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि किसी भी जीव के प्रति करुणा और संवेदना रखना भी आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
साध्वी प्रवीणा भारती ने कहा कि मनुष्य कई बार केवल अपनी जीभ के स्वाद के लिए जीव हत्या करता है। उन्होंने कथा प्रसंग के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवों के प्रति दया और करुणा रखने का संदेश दिया। उन्होंने समझाया कि भक्ति का वास्तविक भाव मनुष्य के आचरण में दिखाई देना चाहिए और इसके लिए संवेदनशीलता तथा जीव मात्र के प्रति सम्मान जरूरी है।
श्री राम कथा के इस प्रसंग के माध्यम से माता शबरी के जीवन को भक्ति, संवेदना और समर्पण के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने माता शबरी के जीवन प्रसंग को श्रद्धापूर्वक सुना। आयोजन के दौरान धार्मिक वातावरण बना रहा और कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपने जीवन में भक्ति एवं सदाचार को अपनाने का संदेश दिया गया।
Akhil Mahajan