बिजली निजीकरण के खिलाफ एकजुट हुए किसान, कर्मचारी और उपभोक्ता, 1-3 दिसंबर की हड़ताल का ऐलान

हरियाणा में बिजली निजीकरण के खिलाफ किसान, कर्मचारी और उपभोक्ता एकजुट हुए। नूंह, गुरुग्राम और करनाल में प्रदर्शन के बाद दिसंबर में हड़ताल की चेतावनी दी गई।

बिजली निजीकरण के खिलाफ एकजुट हुए किसान, कर्मचारी और उपभोक्ता, 1-3 दिसंबर की हड़ताल का ऐलान

➤ निजीकरण के खिलाफ किसान, कर्मचारी और उपभोक्ता संगठनों ने मिलकर संघर्ष का फैसला लिया
➤ 23 अक्टूबर नूंह, 3 नवंबर गुरुग्राम और 17 नवंबर करनाल में विरोध प्रदर्शन
➤ मांगें नहीं मानी गईं तो 1, 2 और 3 दिसंबर को बिजली कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल


रोहतक। हरियाणा में बिजली क्षेत्र के निजीकरण को लेकर कर्मचारी, किसान, उपभोक्ता और जनसंगठन एक बार फिर आमने-सामने की लड़ाई के लिए लामबंद हो गए हैं। रोहतक के कर्मचारी भवन में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं उपभोक्ता मंच के बैनर तले आयोजित संयुक्त बैठक में बिजली कर्मचारियों, इंजीनियरों, किसानों, उपभोक्ताओं और जनसंगठनों के प्रतिनिधियों ने सरकार की निजीकरण नीतियों का विरोध करते हुए आंदोलन को प्रदेश स्तर पर तेज करने का फैसला लिया। बैठक में कहा गया कि यदि सरकार ने बिजली क्षेत्र में प्रस्तावित निजीकरण की नीतियों को वापस नहीं लिया तो चरणबद्ध आंदोलन के बाद 1, 2 और 3 दिसंबर को बिजली कर्मचारियों एवं इंजीनियरों की तीन दिवसीय हड़ताल की जाएगी, जिसमें किसान संगठन भी सहयोग करेंगे।

बैठक की संयुक्त अध्यक्षता देवेंद्र हुड्डा, इंजीनियर रविंद्र घणघस, विजेंद्र बराड़, सुरेश राठी और यशपाल देशवाल ने की, जबकि मंच का संचालन वरिष्ठ उपाध्यक्ष बलजीत बेनीवाल ने किया। बैठक में पूरे प्रदेश से किसान, मजदूर, उपभोक्ता और कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के अनुसार हरियाणा सरकार कृषि डिस्कॉम अलग बनाने, गुरुग्राम और नूंह में पैरलल लाइसेंस जारी करने, टीबीसीबी योजना लागू करने और स्मार्ट मीटरिंग जैसी योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। संगठनों का कहना है कि इन नीतियों से बिजली व्यवस्था पर निजी कंपनियों का प्रभाव बढ़ेगा और इसका असर आम उपभोक्ताओं तथा किसानों पर पड़ सकता है।

दो महीने बाद भी समाधान नहीं होने से नाराजगी

बैठक में बताया गया कि बिजली विभाग की निजीकरण नीतियों के खिलाफ 11, 12 और 13 अगस्त को प्रस्तावित हड़ताल को बिजली मंत्री और प्रबंधन की ओर से दिए गए आश्वासन के बाद स्थगित किया गया था। मंच का आरोप है कि इसके बाद करीब दो महीने बीत जाने के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान नहीं किया गया। इससे कर्मचारियों में नाराजगी और रोष बढ़ रहा है।

संयुक्त संघर्ष मोर्चा के वरिष्ठ नेता और चेयरमैन देवेंद्र सिंह हुड्डा ने बिजली निजीकरण और प्राइवेट लाइसेंसिंग से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और किसानों के विरोध के बावजूद हरियाणा सरकार एचईआरसी के माध्यम से गुरुग्राम और नूंह में पैरलल लाइसेंसी जारी करने का प्रयास कर रही है।

मोर्चे का दावा है कि निजी लाइसेंसी आने के बाद आम उपभोक्ताओं पर बिजली की दरों का बोझ बढ़ सकता है। बैठक में यह भी आरोप लगाया गया कि सरकार गुरुग्राम और नूंह के अलावा फरीदाबाद, पलवल, पानीपत, करनाल और सोनीपत जैसे क्षेत्रों में भी बिजली क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

कृषि वितरण निगम बनाने का भी विरोध

किसान सभा नेता इंद्रजीत ने नए कृषि वितरण निगम के गठन का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अलग कृषि वितरण निगम बनने से किसानों को राहत मिलने के बजाय उनकी समस्याएं बढ़ सकती हैं। उनका दावा है कि नए निगम को शुरुआत से ही 5,427 करोड़ रुपये के घाटे का सामना करना पड़ेगा और यदि पर्याप्त सब्सिडी नहीं मिली तो इसका असर कृषि उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 से कृषि के लिए अलग फीडर बनाए जा चुके हैं और वर्तमान में कृषि उपभोक्ताओं को अलग बिजली शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति की जा रही है। उनका कहना है कि सरकार किसानों को घरेलू कनेक्शनों की तर्ज पर ट्यूबवेल कनेक्शन भी दे सकती है, इसलिए अलग कृषि वितरण निगम बनाने की आवश्यकता नहीं है।

किसान संगठनों का आरोप है कि कृषि वितरण निगम का गठन किसानों की जरूरत के बजाय निजी कंपनियों और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। हालांकि ये दावे और आपत्तियां बैठक में शामिल संगठनों की ओर से रखी गई हैं।

27 अक्टूबर से 14 नवंबर तक होंगे कन्वेंशन

बैठक में निर्णय लिया गया कि किसान, मजदूर, उपभोक्ता और जनप्रतिनिधियों को साथ लेकर 27 अक्टूबर से 14 नवंबर तक पूरे हरियाणा में कन्वेंशन आयोजित किए जाएंगे। संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने कहा कि इन कार्यक्रमों के जरिए बिजली निजीकरण की प्रस्तावित नीतियों के खिलाफ लोगों को एकजुट किया जाएगा।

मोर्चे ने हरियाणा सरकार से मांग की कि बिजली निगमों में निजीकरण की नीतियों को लागू न किया जाए।

नूंह, गुरुग्राम और करनाल में विरोध प्रदर्शन

आंदोलन के अगले चरण के तहत 23 अक्टूबर को नूंह और 3 नवंबर को गुरुग्राम में बड़ा विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। इसके बाद 17 नवंबर को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के करनाल स्थित कैंप कार्यालय पर प्रदेश स्तरीय प्रदर्शन किया जाएगा।

मोर्चा नेताओं ने कहा कि इसके बावजूद यदि हरियाणा सरकार ने अपनी नीतियां वापस नहीं लीं तो 1, 2 और 3 दिसंबर को बिजली कर्मचारी और इंजीनियर तीन दिवसीय हड़ताल करेंगे। किसान संगठनों ने इस आंदोलन में सहयोग करने की बात कही है।

चार प्रमुख मांगें रखीं

संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने बैठक में बिजली क्षेत्र से जुड़ी चार प्रमुख मांगें रखीं।

  • नए कृषि वितरण निगम का गठन नहीं किया जाए।
  • किसी को भी पैरलल लाइसेंस नहीं दिया जाए।
  • टीबीसीबी योजना बंद की जाए।
  • स्मार्ट मीटर योजना बंद की जाए।

बैठक में महासचिव राजेंद्र राणा, राजेश सिरोही, सुरेंद्र यादव, राजकुमार महला, विजय पाल हुड्डा, विकास नेहरा, राहुल महला, किसान नेता रत्नमान, जेएमएस नेता सविता, इंटक प्रधान धर्मबीर लोहान, महासचिव कृष्ण नैन, खाप प्रवक्ता धर्मपाल मलिक, सुरेश नेहरा, राजकुमार, ईश्वर राठी, सरदार सुखदेव और संत गोपालदास सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।