हरियाणा में तहसीलदार परीक्षा के चौंकाने वाले नतीजे, कानून में फेल

हरियाणा में तहसीलदारों की परीक्षा के नतीजों ने सभी को चौंका दिया है। जिन कानूनों पर काम करते हैं, उन्हीं में फेल हो गए अधिकारी।

हरियाणा में तहसीलदार परीक्षा के चौंकाने वाले नतीजे, कानून में फेल

हरियाणा में तहसीलदारों की विभागीय परीक्षा के चौंकाने वाले नतीजे
राजस्व और दीवानी कानून में अधिकांश अधिकारी फेल
उर्दू और पटवार से जुड़े विषयों में बेहतर प्रदर्शन



हरियाणा में तहसीलदारों की विभागीय परीक्षा के परिणामों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में घोषित हुए इन नतीजों में सामने आया है कि अधिकांश तहसीलदार राजस्व और दीवानी कानूनों के ज्ञान में फेल हो गए हैं, जबकि यही विषय उनके दैनिक कार्यों का आधार माने जाते हैं।

यह परीक्षा पिछले वर्ष 15 से 19 दिसंबर के बीच आयोजित की गई थी और अब इसके परिणाम घोषित किए गए हैं। नियमों के अनुसार, प्रत्येक तहसीलदार के लिए दो साल के भीतर इन विभागीय परीक्षाओं को पास करना अनिवार्य होता है। इसके बाद विशेष अनुमति लेकर ही दोबारा परीक्षा में बैठने का मौका मिलता है।

परिणामों के अनुसार, राजस्व कानून की परीक्षा में कुल 21 में से 14 तहसीलदार फेल हो गए, जो करीब 67 प्रतिशत है। इस परीक्षा में पास होने के लिए 240 में से 120 अंक जरूरी थे, लेकिन केवल एक उम्मीदवार ही उच्च स्तर के साथ पास हो पाया।

वहीं, दीवानी कानून की परीक्षा में हालात और भी खराब रहे। इसमें 35 में से 25 उम्मीदवार फेल हो गए, जो 71 प्रतिशत से अधिक है। इस विषय में पास होने के लिए 120 में से 60 अंक आवश्यक थे, लेकिन यहां भी सिर्फ एक ही उम्मीदवार सफल हो पाया।

आपराधिक कानून की परीक्षा में भी स्थिति चिंताजनक रही, जहां 25 में से 15 तहसीलदार फेल हो गए, जो करीब 60 प्रतिशत है। हालांकि सिविल सेवा और वित्तीय नियमों के पेपर में प्रदर्शन थोड़ा बेहतर रहा, जहां 26 में से 11 उम्मीदवार फेल हुए, जबकि 10 उम्मीदवारों ने 75 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल कर क्रेडिट के साथ परीक्षा पास की।

दूसरी ओर, उर्दू और पटवार से जुड़े विषयों में तहसीलदारों का प्रदर्शन बेहतर रहा। उर्दू की परीक्षा में 22 में से 19 उम्मीदवार पास हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पारंपरिक विषयों में उनकी पकड़ मजबूत है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि कई तहसीलदार ऐसे हैं, जो पहले पटवारी या कानूनगो के पद पर कार्यरत रहे हैं और बाद में पदोन्नत होकर इस पद तक पहुंचे हैं। ऐसे में उन्हें रेवेन्यू और सिविल कानूनों की गहराई से जानकारी नहीं होती, जिससे उनके फेल होने की संभावना बढ़ जाती है।

मार्च 2025 में आयोजित परीक्षा के आंकड़े भी इसी स्थिति को दर्शाते हैं। उस समय भी रेवेन्यू लॉ में 12 में से 8, सिविल लॉ में 15 में से 8 और क्रिमिनल लॉ में 10 में से 5 तहसीलदार फेल हो गए थे।

यह परिणाम प्रशासनिक दक्षता और प्रशिक्षण व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तहसीलदार जैसे महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए कानूनों की मजबूत समझ बेहद जरूरी है, ताकि आम जनता को न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।