हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का हल्‍ला बोल : कुरुक्षेत्र में जीटी रोड पर बैठे शिक्षक, छाती पीट-पीट नारे लगाए , यातायात प्रभावित

हरियाणा के 10,757 गेस्ट टीचर्स नियमितीकरण की मांग को लेकर कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ पैदल मार्च पर निकले। शिक्षकों ने 2014 की नीति लागू करने की मांग की।

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का हल्‍ला बोल :   कुरुक्षेत्र में जीटी रोड पर बैठे शिक्षक,  छाती पीट-पीट नारे लगाए , यातायात प्रभावित

➤ 10,757 गेस्ट टीचर नियमितीकरण की मांग को लेकर कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ के लिए पैदल रवाना
➤ पिपली के पास जीटी रोड पर बैठकर प्रदर्शन, छाती पीटकर सरकार के खिलाफ की नारेबाजी
➤ 2014 की नियमितीकरण नीति लागू करने और 28 मई 2014 से सेवा नियमित मानकर लाभ देने की मांग


कुरुक्षेत्र। हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत 10,757 गेस्ट टीचर्स ने नौकरी नियमित कराने की मांग को लेकर रविवार को कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ तक पैदल मार्च शुरू किया। दोपहर करीब ढाई बजे शिक्षक पिपली स्थित ताज पार्क से चंडीगढ़ के लिए रवाना हुए, लेकिन पिपली मिनी जू के पास पहुंचने के बाद उन्होंने जीटी रोड पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इस दौरान महिला गेस्ट टीचर्स ने छाती पीटकर मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के कारण जीटी रोड पर वाहनों की कतारें लग गईं और यातायात प्रभावित हुआ। बाद में शिक्षक खानपुर कोलियां गांव की ओर आगे बढ़े, जबकि उनके साथ वाटर कैनन और आंसू गैस वाहन भी चलते रहे। प्रदर्शनकारियों का पहला पड़ाव शाहाबाद में होगा और चंडीगढ़ पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की योजना है।

गेस्ट टीचर्स लंबे समय से नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार वर्ष 2014 में बनाई गई तीन साल की नियमितीकरण नीति को लागू करे और जो शिक्षक उसकी शर्तें पूरी करते हैं, उनकी सेवाएं नियमित की जाएं। शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा को 28 मई 2014 से नियमित माना जाए और उस तारीख से मिलने वाले बकाया लाभ भी दिए जाएं।

2014 की नीति लागू करने की मांग

गेस्ट टीचर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के स्टेट प्रधान दिनेश यादव के अनुसार, सरकार को 2014 में बनाई गई तीन साल की नियमितीकरण नीति लागू करनी चाहिए। उनका कहना है कि जो शिक्षक नीति की निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं, उन्हें नियमित किया जाना चाहिए।

शिक्षकों का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और शिक्षा व्यवस्था में लगातार अपनी जिम्मेदारी निभाते रहे हैं। ऐसे में सरकार को नियमितीकरण के मामले में जल्द निर्णय लेना चाहिए। शिक्षक जून 2014 से मिलने वाले लाभ देने की भी मांग कर रहे हैं।

28 मई 2014 से सेवा नियमित मानने की मांग

गेस्ट टीचर्स के प्रवक्ता डॉ. अजय लोहान ने कहा कि शिक्षकों की मांग अदालत के फैसलों के अनुसार उनकी सेवाओं को 28 मई 2014 से नियमित मानने की है। उनका कहना है कि नियमितीकरण की तारीख से बकाया राशि पर 6 प्रतिशत ब्याज, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभ दिए जाने चाहिए।

शिक्षकों ने नए नियमों में ईपीएफ, वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल लीव और नियमितीकरण का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने पर भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि सरकार को नियमितीकरण से जुड़े अदालती आदेशों को लागू करना चाहिए।

26 अक्टूबर को विधायक और मंत्रियों को ज्ञापन

गेस्ट टीचर्स ने आंदोलन को आगे बढ़ाने का कार्यक्रम भी तय किया है। 26 अक्टूबर को विधायकों और मंत्रियों को मांगों का ज्ञापन सौंपने की योजना है। इसके बाद 1 नवंबर को गुरुग्राम, कैथल, अंबाला, करनाल, हिसार और रोहतक में रैलियां करने की तैयारी है।

शिक्षकों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

23 जून से लघु सचिवालय में धरना

नियमितीकरण की मांग को लेकर गेस्ट टीचर्स का 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना भी जारी है। राज्य कार्यकारिणी सदस्य मेवा सिंह पिलानिया, बलजीत सिंह ढिल्लों और कुलदीप कुमार के मुताबिक, शिक्षक सरकार से नियमितीकरण से जुड़े अदालती आदेशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

गेस्ट टीचर्स का कहना है कि उनका आंदोलन केवल वर्तमान सेवा शर्तों को लेकर नहीं है, बल्कि लंबे समय से सरकारी स्कूलों में दी जा रही सेवाओं को नियमित सेवा के रूप में मान्यता देने से जुड़ा है।

10 अक्टूबर को मुख्यमंत्री आवास के पास भी प्रदर्शन

इससे पहले 10 अक्टूबर को गेस्ट टीचर्स ने मुख्यमंत्री आवास के पास प्रदर्शन किया था। उस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया था। इसके बाद अब शिक्षकों ने कुरुक्षेत्र से चंडीगढ़ तक पैदल मार्च का कार्यक्रम बनाया।

रविवार को पिपली के पास जीटी रोड पर प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में वाहन फंस गए और सड़क पर यातायात प्रभावित हुआ। शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े।

2005-06 में रिक्त पदों पर हुई थी नियुक्ति

गेस्ट टीचर्स के विवाद की शुरुआत वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों के रिक्त पदों पर हुई नियुक्तियों से जुड़ी है। याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह के मुताबिक, उस समय सरकारी स्कूलों के रिक्त पदों के लिए वैकेंसी निकाली गई थी। इसके लिए विज्ञापन जारी किया गया, चयन समिति गठित की गई और आवेदकों की जांच के बाद मेरिट सूची तैयार की गई।

इसी प्रक्रिया के तहत गेस्ट फैकल्टी के रूप में नियुक्तियां हुईं। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इस प्रक्रिया में करीब 12,700 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। नियुक्ति के बाद से ही शिक्षक नियमितीकरण की मांग करते रहे और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा।

सरकार ने नियुक्तियों को अस्थायी व्यवस्था बताया

हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार की ओर से दलील दी गई कि इन शिक्षकों की नियुक्तियां अस्थायी व्यवस्था के तहत की गई थीं। सरकार का पक्ष था कि शिक्षक नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए, इसलिए उन्हें स्थायी करने का दावा स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले में शिक्षकों की लंबे समय तक ली गई सेवाओं और उनके काम की प्रकृति को भी ध्यान में रखा गया।

हाईकोर्ट ने लंबे समय तक सेवा लेने पर की टिप्पणी

उपलब्ध विवरण के अनुसार, हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार खुद मान चुकी है कि स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी के कारण इन शिक्षकों की सेवाएं ली गई थीं। करीब 20 वर्षों तक सेवाएं लिए जाने के बाद उन्हें केवल अस्थायी या ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना उचित नहीं माना गया।

अदालत ने शिक्षकों की भूमिका को लेकर भी टिप्पणी की। फैसले में कहा गया कि शिक्षक समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला होते हैं और उन्हें मनमाने ढंग से ‘स्पेयर’ की तरह इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक संविदा पर सेवाएं लेने के बाद राज्य उन्हें केवल अस्थायी कर्मचारी नहीं कह सकता।

2014 की नियमितीकरण नीति की वैधता का भी उल्लेख

हाईकोर्ट के फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ मामले का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था।

हाईकोर्ट ने कहा कि नीति की वैधता को लेकर विवाद समाप्त हो चुका है और याचिकाकर्ताओं ने नीति की शर्तों को पर्याप्त रूप से पूरा किया है। गेस्ट टीचर्स अब इसी आधार पर सरकार से नियमितीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने और अदालत के आदेशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

नियमित होने पर इन लाभों की मांग

गेस्ट टीचर्स का कहना है कि यदि सरकार उन्हें नियमित करती है तो उन्हें सरकारी शिक्षकों के अनुरूप विभिन्न सेवा लाभ मिल सकेंगे। इनमें पे स्केल, महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता, मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव, मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन संबंधी लाभ शामिल हैं।

इसके अलावा शिक्षकों की ओर से सेवा नियमों के अनुसार प्रमोशन का लाभ दिए जाने की भी मांग की जा रही है। पेंशन सहित अन्य लाभ संबंधित सरकारी नियमों के अनुसार लागू होने की बात कही गई है।

अब चंडीगढ़ तक पहुंचेगा आंदोलन

रविवार को कुरुक्षेत्र से शुरू हुआ पैदल मार्च गेस्ट टीचर्स के आंदोलन का नया चरण है। शिक्षक शाहाबाद में पहला पड़ाव करेंगे और इसके बाद चंडीगढ़ की ओर बढ़ेंगे। वहां पहुंचकर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की योजना है।

गेस्ट टीचर्स का कहना है कि वे लंबे समय से सरकारी स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं और नियमितीकरण की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। अब उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर है। वहीं, 26 अक्टूबर को विधायकों और मंत्रियों को ज्ञापन तथा 1 नवंबर को छह जिलों में प्रस्तावित रैलियों के जरिए आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी है।