स्मृति की बैठक के बाद राव का अपना दरबार: 8 विधायक जुटे, दक्षिण हरियाणा की राजनीति में फिर हलचल
स्मृति ईरानी की बैठक के तुरंत बाद राव इंद्रजीत की टी-पार्टी में आठ विधायक जुटे। आरती राव की मौजूदगी से दक्षिण हरियाणा के राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा तेज हुई।
➤ स्मृति ईरानी के हरियाणा दौरे के तुरंत बाद राव इंद्रजीत ने अपने प्रभाव वाले विधायकों को चंडीगढ़ में जुटाया
➤ आरती राव के घर हुई टी-पार्टी में 8 विधायक पहुंचे, वर्करों की सुनवाई और मान-सम्मान का मुद्दा चर्चा में
➤ ‘भावी सीएम’ के नारों की पृष्ठभूमि में आरती राव की मौजूदगी ने बैठक को और ज्यादा राजनीतिक बना दिया
चंडीगढ़। हरियाणा भाजपा में इस समय सबसे दिलचस्प बात सिर्फ यह नहीं है कि कौन किस बैठक में शामिल हुआ, बल्कि यह है कि किस बैठक के तुरंत बाद कौन अपने राजनीतिक साथियों को एक जगह बैठा रहा है। भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी के हरियाणा प्रवास में पार्टी नेताओं से संगठन और कार्यकर्ताओं को लेकर फीडबैक लिए जाने के तुरंत बाद केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह की ओर से चंडीगढ़ में कराई गई टी-पार्टी इसी वजह से राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है। आरती राव के आवास पर हुई इस बैठक में आरती राव समेत आठ भाजपा विधायक मौजूद रहे। दक्षिण हरियाणा से जुड़े इन विधायकों का एक साथ जुटना ऐसे समय हुआ है, जब खुद राव इंद्रजीत और आरती राव कार्यकर्ताओं की सुनवाई और उनके मान-सम्मान की बात कर चुके हैं।
यह बैठक कोई आधिकारिक भाजपा कार्यक्रम नहीं थी और न ही इसकी ओर से कोई राजनीतिक प्रस्ताव सामने आया है। लेकिन राजनीति में समय और संगत दोनों मायने रखते हैं। एक तरफ भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व हरियाणा संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं तक पहुंच बढ़ाने की बात कर रहा है, दूसरी तरफ दक्षिण हरियाणा के प्रभावशाली नेता राव इंद्रजीत सिंह अपने साथ जुड़े विधायकों के साथ अलग बैठते हैं। यही घटनाक्रम इस सामान्य दिखने वाली टी-पार्टी को राजनीतिक कहानी में बदल देता है।
पहले स्मृति ने सुनी पार्टी की बात, फिर राव ने बैठाया अपना दायरा
स्मृति ईरानी के हरियाणा दौरे को भाजपा संगठन के लिहाज से अहम माना जा रहा है। उन्होंने पार्टी के नेताओं और जनप्रतिनिधियों से संवाद किया और संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर फीडबैक लिया।
बैठक से बाहर निकलने के बाद राव इंद्रजीत सिंह और आरती राव दोनों ने कार्यकर्ताओं की सुनवाई और उन्हें सम्मान दिए जाने की जरूरत पर जोर दिया। यही बात अगले घटनाक्रम को महत्वपूर्ण बनाती है।
क्योंकि इसके तुरंत बाद आरती राव के चंडीगढ़ आवास पर राव समर्थक माने जाने वाले विधायकों का जुटना सामने आया। यानी जिस समय भाजपा के भीतर ‘कार्यकर्ता’ और ‘संगठन’ की बात हो रही थी, उसी समय दक्षिण हरियाणा के एक प्रभावशाली राजनीतिक समूह के विधायक आपस में बैठकर संवाद कर रहे थे।
इसे सीधे गुटबाजी कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन इसे महज चाय पर हुई मुलाकात कहकर नजरअंदाज करना भी आसान नहीं है।
आठ विधायक क्यों महत्वपूर्ण हैं?
टी-पार्टी में आरती राव के अलावा गुरुग्राम से मुकेश शर्मा, पटौदी से बिमला चौधरी, सोहना से तेजपाल तंवर, कोसली से अनिल यादव, बावल से डॉ. कृष्ण कुमार, बाढड़ा से उमेद पातुवास और दादरी से सुनील सांगवान शामिल हुए।
इन नामों को एक साथ देखें तो तस्वीर दक्षिण हरियाणा के बड़े हिस्से को जोड़ती नजर आती है। यही इस बैठक का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक पहलू है।
राव इंद्रजीत लंबे समय से दक्षिण हरियाणा की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। ऐसे में उनके राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्र के विधायकों का एक साथ बैठना यह बताता है कि क्षेत्रीय स्तर पर संवाद और राजनीतिक संपर्क की उनकी भूमिका अभी भी सक्रिय है।
हालांकि, बैठक में कोई रणनीतिक फैसला हुआ या भविष्य की राजनीति को लेकर कोई चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
असली सवाल आरती राव को लेकर
इस पूरी कहानी का दूसरा सिरा आरती राव हैं।
आरती राव अब सिर्फ राव इंद्रजीत की बेटी नहीं, बल्कि खुद अटेली की विधायक और हरियाणा सरकार में मंत्री हैं। पिछले दिनों रेवाड़ी में उनके कार्यक्रम के दौरान समर्थकों की ओर से उन्हें भावी मुख्यमंत्री बनाए जाने के नारे भी लगे थे।
आरती राव ने हालांकि इन नारों को मुख्यमंत्री पद की अपनी दावेदारी के रूप में पेश नहीं किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला भाजपा करती है।
लेकिन राजनीति में किसी नेता के नाम पर लगने वाले नारे और उसके बाद उसी नेता के आवास पर कई विधायकों का जुटना अपने आप में चर्चा पैदा करता है।
यही वजह है कि इस टी-पार्टी को आरती राव के राजनीतिक कद के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फिलहाल इसे मुख्यमंत्री पद की तैयारी कहना तथ्यों से आगे जाना होगा, लेकिन राव परिवार की अगली पीढ़ी की राजनीतिक सक्रियता के संकेत के तौर पर इसे जरूर पढ़ा जा सकता है।
राव की ‘डिनर डिप्लोमेसी’ की याद क्यों आई?
राव इंद्रजीत सिंह की राजनीतिक बैठकों का अपना इतिहास है। पिछले साल 18 जून को उनकी डिनर डिप्लोमेसी चर्चा में आई थी। उस समय 12 विधायक उनके साथ डिनर में शामिल हुए थे।
इस बार संख्या आठ रही।
लेकिन संख्या कम होने के बावजूद राजनीतिक संदर्भ अलग है। पिछली बार चर्चा डिनर तक सीमित थी, जबकि इस बार यह टी-पार्टी स्मृति ईरानी के संगठनात्मक दौरे के तुरंत बाद हुई है।
यानी कहानी सिर्फ यह नहीं कि आठ विधायक एक साथ बैठे। कहानी यह है कि भाजपा के केंद्रीय संगठन की सक्रियता के बीच राव इंद्रजीत ने अपने राजनीतिक नेटवर्क को एक जगह बैठाया।
तस्वीरें नहीं, फिर भी चर्चा क्यों?
इस बैठक की तस्वीरें राव इंद्रजीत या आरती राव के सोशल मीडिया अकाउंट पर सार्वजनिक नहीं की गईं। यह बात भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी।
हालांकि किसी बैठक की तस्वीर सोशल मीडिया पर नहीं आना अपने आप में किसी राजनीतिक रणनीति का प्रमाण नहीं है। लेकिन जब कोई बैठक पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील समय में हो और उसमें कई विधायक शामिल हों, तो उसकी सार्वजनिकता या गैर-सार्वजनिकता भी चर्चा का हिस्सा बन जाती है।
भाजपा के लिए इसका मतलब क्या?
भाजपा के नजरिए से देखें तो पार्टी के सामने दो समानांतर जरूरतें हैं। पहली, संगठन को मजबूत रखना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय बनाए रखना। दूसरी, अलग-अलग क्षेत्रों में प्रभावशाली नेताओं और उनके राजनीतिक नेटवर्क को पार्टी के व्यापक संगठनात्मक ढांचे के साथ जोड़कर रखना।
दक्षिण हरियाणा में राव इंद्रजीत का राजनीतिक प्रभाव इसी समीकरण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इसलिए इस टी-पार्टी को भाजपा के खिलाफ किसी समानांतर शक्ति केंद्र के रूप में देखना अभी उचित नहीं होगा। बल्कि इसे इस रूप में देखना ज्यादा सटीक होगा कि राव इंद्रजीत अपने राजनीतिक संपर्क और प्रभाव वाले विधायकों के साथ संवाद बनाए हुए हैं।
लेकिन अगर आने वाले दिनों में ऐसी बैठकों का सिलसिला बढ़ता है, और इसमें विधायकों के साथ संगठन के प्रमुख चेहरे भी दिखाई देने लगते हैं, तब इसके राजनीतिक अर्थ ज्यादा स्पष्ट हो सकते हैं।
अभी सबसे बड़ा संकेत क्या?
इस पूरी कहानी में फिलहाल सबसे बड़ा संकेत आरती राव का बढ़ता राजनीतिक स्पेस और राव इंद्रजीत के साथ विधायकों का संपर्क है।
स्मृति ईरानी का दौरा भाजपा के संगठनात्मक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण है। उसी समय राव इंद्रजीत की टी-पार्टी यह बताती है कि दक्षिण हरियाणा की राजनीति में उनका नेटवर्क अभी भी सक्रिय है।
इसलिए इस बैठक को न तो केवल ‘चाय पर चर्चा’ मानना सही होगा और न ही इसे किसी बड़े नेतृत्व परिवर्तन की शुरुआत कहना।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि हरियाणा भाजपा में संगठन की नई कवायद के बीच दक्षिण हरियाणा का राजनीतिक अध्याय फिर से सक्रिय दिखाई दे रहा है। और इस अध्याय के केंद्र में इस समय राव इंद्रजीत सिंह के साथ उनकी बेटी आरती राव भी साफ तौर पर नजर आ रही हैं।
आने वाले दिनों में असली कहानी यह होगी कि क्या यह सिर्फ एक बैठक थी या फिर इसके बाद राव खेमे की राजनीतिक सक्रियता का कोई नया दौर दिखाई देता है।
Akhil Mahajan