हरियाणा में दशहरे की धूम, पंचकूला में 221 फीट का रावण जला; रोहतक में CM सैनी ने किया पुतला दहन
हरियाणा में दशहरे पर जगह-जगह रावण दहन हुआ। पंचकूला में 221 फीट का विशाल पुतला जला, जबकि रोहतक में ड्रोन शो और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम आकर्षण रहा।
➤ पंचकूला में 221 फीट के रावण का दहन, पुतला बनाने में करीब 34 लाख रुपये खर्च
➤ रोहतक में 300 से ज्यादा ड्रोन दिखाएंगे रामायण और राम-रावण युद्ध का नजारा
➤ पानीपत में सबसे पहले रावण दहन, 4 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने धारण किया हनुमान स्वरूप
हरियाणा में विजयदशमी का पर्व पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। प्रदेश के अलग-अलग शहरों में शाम होते ही रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलों के दहन के साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया। पानीपत के 13/17 दशहरा ग्राउंड में प्रदेश में सबसे पहले रावण दहन किया गया। इससे पहले खर और दूषण के पुतलों को भी आग लगाई गई। वहीं पंचकूला में देश के सबसे ऊंचे बताए जा रहे 221 फीट के रावण के पुतले का दहन किया गया। इस विशाल पुतले को तैयार करने में करीब 34 लाख रुपये की लागत आने की बात सामने आई है।
दशहरे को लेकर पूरे प्रदेश में सुबह से ही तैयारियां चल रही थीं। शाम होते-होते दशहरा मैदानों में लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई। कई स्थानों पर रामलीला और धार्मिक कार्यक्रमों के बाद रावण दहन किया गया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक लोगों में त्योहार को लेकर खास उत्साह देखने को मिला।
पंचकूला में 221 फीट के रावण का दहन
पंचकूला में इस बार दशहरा समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण 221 फीट ऊंचा रावण का पुतला रहा। कार्यक्रम में इस विशाल पुतले का दहन किया गया। पुतले को तैयार करने में करीब 34 लाख रुपये खर्च होने की जानकारी दी गई।
इतने विशाल पुतले को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग दशहरा मैदान पहुंचे। रावण दहन के साथ ही मैदान में आतिशबाजी और उत्सव का माहौल देखने को मिला।
रोहतक में CM सैनी ने किया रावण दहन
रोहतक के दशहरा ग्राउंड में मुख्यमंत्री नायब सैनी पहुंचे। यहां रावण दहन के साथ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले ही मैदान में बड़ी संख्या में लोग जुट चुके थे।
रोहतक में दशहरा समारोह को खास बनाने के लिए 300 से अधिक ड्रोन के जरिए करीब 200 फीट की ऊंचाई पर रामायण के प्रसंग और राम-रावण युद्ध दिखाने की तैयारी की गई। करीब 12 मिनट के इस ड्रोन शो के लिए अयोध्या से विशेष टीम बुलाए जाने की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि रावण के दस चेहरे थे, लेकिन आज के रावण के हजारों चेहरे हैं। इस दौरान दशहरा समारोह में फिल्म हनुमान अंश की स्टारकास्ट के पहुंचने की भी जानकारी सामने आई।
हालांकि, मुख्यमंत्री के कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने से पहले ही मेघनाथ के पुतले का दहन किए जाने से वहां हंगामे की स्थिति बन गई।
पानीपत में सबसे पहले हुआ रावण दहन
पानीपत के 13/17 दशहरा ग्राउंड में प्रदेश में सबसे पहले रावण दहन किया गया। रावण से पहले खर और दूषण के पुतलों को भी आग लगाई गई।
इस बार पानीपत का दशहरा एक और वजह से खास रहा। यहां 4 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने हनुमान स्वरूप धारण किया। यह परंपरा विभाजन के समय पाकिस्तान से पानीपत आई थी और लैय्या बिरादरी इसे करीब 79 साल बाद भी निभा रही है।
रेवाड़ी में 160 फीट का रावण
रेवाड़ी के बेरली कलां में भी विशाल रावण का पुतला तैयार किया गया था। यहां 160 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया।
शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग दशहरा मैदान पहुंचे। रावण दहन के साथ ही लोगों ने बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया।
प्रदेशभर में दिखा उत्साह
दशहरे के मौके पर सोनीपत, गुरुग्राम, कुरुक्षेत्र, करनाल, झज्जर, यमुनानगर, हिसार और भिवानी समेत प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रावण दहन किया गया।
सोनीपत के कामी रोड स्थित रामलीला ग्राउंड में शाम करीब साढ़े छह बजे रावण दहन किया गया। गुरुग्राम के मॉडल टाउन और सेक्टर-45 में भी दशहरा कार्यक्रम आयोजित हुए। कुरुक्षेत्र के केडीबी मेला ग्राउंड में धर्मक्षेत्र दशहरा कमेटी की ओर से रावण का पुतला जलाया गया।
करनाल के सेक्टर-4 में रावण दहन के दौरान पुतले के मुंह और आंखों से चिंगारी निकलने का अलग नजारा देखने को मिला। झज्जर में पूर्व मंत्री ओपी धनखड़ ने रावण दहन किया। यमुनानगर के मॉडल टाउन दशहरा ग्राउंड में भी रावण दहन किया गया।
दशहरे के बीच अलग-अलग जगहों पर अलग दृश्य
सोनीपत के गोहाना क्षेत्र के गांव कासंडी में ग्रामीणों, आर्य समाजियों और रक्षक सेना ने पाखंडवाद के खिलाफ जागृति जुलूस निकाला। इस दौरान रामपाल का पुतला लेकर ग्रामीण गांव की गलियों से गुजरे और पाखंडवाद के खिलाफ नारे लगाए। बाद में गांव के मुख्य द्वार पर जनसभा के बाद पुतला फूंका गया।
इस तरह हरियाणा में विजयदशमी का पर्व धार्मिक आयोजन, रावण दहन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आधुनिक तकनीक से सजे आयोजनों के बीच मनाया गया। कहीं विशाल पुतले आकर्षण का केंद्र बने तो कहीं ड्रोन शो ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं पानीपत में दशकों पुरानी हनुमान स्वरूप धारण करने की परंपरा ने भी दशहरे के आयोजन को खास बना दिया।
Akhil Mahajan