27 लाख से सीधे 1.14 करोड़! हाईकोर्ट के फैसले से हादसे में मारे गए कारोबारी के परिवार को बड़ी राहत

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27 लाख से सीधे 1.14 करोड़! हाईकोर्ट के फैसले से हादसे में मारे गए कारोबारी के परिवार को बड़ी राहत

➤ 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही का फैसला हाईकोर्ट ने किया खारिज
➤ मुआवजा 27.93 लाख से बढ़ाकर 1.14 करोड़ रुपये किया गया
➤ 9% ब्याज का आदेश, तीन महीने बाद भुगतान न होने पर 12% ब्याज


सड़क हादसे में जान गंवाने वाले कारोबारी सुरेंद्र के परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, हिसार के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें सुरेंद्र की 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही मानते हुए परिवार को सिर्फ 27,93,936 रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया था। हाईकोर्ट ने इस निष्कर्ष को हटाते हुए मुआवजे की दोबारा गणना की और परिवार को कुल 1,14,01,744 रुपये देने का आदेश दिया है। अदालत ने मुआवजे पर ब्याज की दर भी 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 9 प्रतिशत सालाना कर दी है। वहीं, आदेश के तीन महीने के भीतर भुगतान नहीं होने पर इसके बाद 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।

यह मामला 24 फरवरी 2014 का है। सुरेंद्र अपने भाई बिरेंद्र के साथ मारुति स्विफ्ट डिजायर कार से गुरुग्राम से हिसार जा रहे थे। सुबह करीब आठ बजे नारनौंद थाना क्षेत्र में पिपला पुल के पास सामने से आ रहे टाटा कैंटर ने उनकी कार को टक्कर मार दी। हादसा इतना गंभीर था कि सुरेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। सुरेंद्र सनराइज रोड कैरियर के मालिक थे और खेती-बाड़ी का काम भी करते थे।

हादसे के बाद परिवार ने मुआवजे के लिए मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, हिसार का दरवाजा खटखटाया। अधिकरण ने दावे की गणना करते हुए कुल 1.11 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा निर्धारित किया था। हालांकि, अधिकरण ने सुरेंद्र की 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही मान ली। इसी आधार पर परिवार को केवल 27,93,936 रुपये देने का आदेश हुआ।

परिवार ने इस फैसले को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने सबसे अहम सवाल यही था कि क्या हादसे के लिए सुरेंद्र को भी जिम्मेदार ठहराने के पर्याप्त आधार मौजूद थे।

प्रत्यक्षदर्शी की गवाही ने बदली तस्वीर

मामले की सुनवाई के दौरान सुरेंद्र के भाई बिरेंद्र, जो हादसे के समय उनके साथ कार में मौजूद थे, ने गवाही दी। उन्होंने बताया कि कार अपनी सही दिशा में चल रही थी और हादसा सामने से आ रहे कैंटर चालक की लापरवाही के कारण हुआ।

अदालत ने इस गवाही के साथ जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर भी गौर किया। जांच अधिकारी ने भी माना था कि जांच के दौरान ऐसा कोई प्रत्यक्षदर्शी सामने नहीं आया, जिसने सुरेंद्र को हादसे के लिए जिम्मेदार बताया हो।

हाईकोर्ट ने इन तथ्यों को महत्वपूर्ण माना और कहा कि केवल हादसे के बाद वाहनों की स्थिति देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि टक्कर से पहले कार गलत दिशा में चल रही थी।

75 प्रतिशत लापरवाही का निष्कर्ष हटाया

जस्टिस हरकेश मनुजा की पीठ ने कहा कि सहायक लापरवाही का आरोप लगाने वाले पक्ष पर उसे साबित करने की जिम्मेदारी थी। अदालत के अनुसार, उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित नहीं होता कि सुरेंद्र दुर्घटना से पहले वाहन को गलत दिशा में चला रहे थे।

हाईकोर्ट ने इसी आधार पर सुरेंद्र की 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही से जुड़ा निष्कर्ष हटा दिया। इसके बाद मुआवजे की पूरी राशि की दोबारा गणना की गई।

यही फैसला परिवार के लिए सबसे बड़ा बदलाव लेकर आया। जिस परिवार को अधिकरण के फैसले के तहत 27.93 लाख रुपये मिलने थे, अब उसे 1.14 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मिलेगी।

परिवार को किन मदों में कितना मुआवजा मिलेगा

हाईकोर्ट ने दोबारा गणना के बाद अलग-अलग मदों में मुआवजा निर्धारित किया है।

आश्रितता के नुकसान के लिए परिवार को 1,11,05,744 रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा पांच दावेदारों को पारिवारिक सहयोग की क्षति के लिए कुल 2.40 लाख रुपये दिए जाएंगे।

अदालत ने अंतिम संस्कार के खर्च के लिए 18 हजार रुपये, संपत्ति की क्षति के लिए 18 हजार रुपये और शव ले जाने के खर्च के लिए 20 हजार रुपये देने का आदेश दिया है।

इन सभी राशियों को मिलाकर कुल मुआवजा 1,14,01,744 रुपये तय किया गया है।

पहले के मुकाबले 86 लाख रुपये से ज्यादा बढ़ा मुआवजा

हाईकोर्ट के फैसले के बाद परिवार को मिलने वाला मुआवजा पहले के मुकाबले 86,07,808 रुपये अधिक हो गया है। पहले 75 प्रतिशत सहायक लापरवाही मानने के कारण परिवार को केवल 27,93,936 रुपये देने का आदेश था।

अब अदालत ने उस निष्कर्ष को हटाकर पूरी गणना दोबारा की है। इससे मुआवजे की राशि सीधे 1.14 करोड़ रुपये से अधिक हो गई।

2018 से मिलेगा 9 प्रतिशत सालाना ब्याज

हाईकोर्ट ने केवल मुआवजे की राशि ही नहीं बढ़ाई, बल्कि ब्याज की दर भी बढ़ाई है। अदालत ने दावा याचिका दाखिल किए जाने की तारीख यानी 2018 से भुगतान होने तक 9 प्रतिशत सालाना ब्याज देने का निर्देश दिया है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश के तीन महीने के भीतर मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया तो इसके बाद 12 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।

इस आदेश के बाद परिवार को मिलने वाली वास्तविक राशि ब्याज के कारण और बढ़ सकती है।

कैंटर चालक, मालिक और बीमा कंपनी पर भुगतान की जिम्मेदारी

हाईकोर्ट ने मुआवजे के भुगतान की जिम्मेदारी कैंटर चालक, वाहन मालिक और बीमा कंपनी पर संयुक्त रूप से डाली है। यानी परिवार को निर्धारित मुआवजे की राशि और अदालत के आदेश के मुताबिक ब्याज का भुगतान इन्हीं पक्षों की जिम्मेदारी होगी।

करीब एक दशक से अधिक पुराने इस हादसे से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के फैसले ने मृतक कारोबारी के परिवार को बड़ी आर्थिक राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल दुर्घटना के बाद वाहनों की स्थिति के आधार पर मृतक पर सहायक लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता, जब तक उसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद न हों।