निजीकरण पर भड़के बिजली कर्मचारियों फूकेंगे सीएम-केंद्रीय मंत्री के पुतले, 22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल

हरियाणा में बिजली निजीकरण के विरोध में कर्मचारी दशहरे पर प्रदर्शन, 21 अक्टूबर को लाइसेंस प्रतियां जलाने और 22 से 24 अक्टूबर हड़ताल करेंगे।

निजीकरण पर भड़के बिजली कर्मचारियों फूकेंगे सीएम-केंद्रीय मंत्री के पुतले,  22 से 24 अक्टूबर तक हड़ताल

➤ निजी कंपनी इलेवन पावर को लाइसेंस देने के विरोध में आर-पार की लड़ाई
➤ 21 अक्टूबर को 300 से ज्यादा सब डिवीजनों में लाइसेंस की प्रतियां जलाने का ऐलान
➤ 22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी हड़ताल, लाइसेंस रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी


हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था के निजीकरण को लेकर बिजली कर्मचारियों और सरकार के बीच टकराव बढ़ता दिखाई दे रहा है। निजी कंपनी इलेवन पावर को बिजली वितरण के क्षेत्र में लाइसेंस दिए जाने के विरोध में बिजली कर्मचारियों ने अब आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर तेज करने का ऐलान किया है। यूनियन के मुताबिक, दशहरे के दिन प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों और सर्कल कार्यालयों पर प्रदर्शन किया जाएगा और मुख्यमंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर तथा एचआरईसी के चेयरमैन के पुतले फूंके जाएंगे। इसके साथ ही 21 अक्टूबर को 300 से अधिक सब डिवीजनों में सरकार की ओर से जारी पत्र और लाइसेंस के मसौदे की प्रतियां जलाने तथा 22 से 24 अक्टूबर तक प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया गया है।

ऑल हरियाणा पावर कॉरपोरेशन वर्कर यूनियन के राज्य प्रधान सुरेश राठी ने कहा कि निजी कंपनी इलेवन पावर को लाइसेंस जारी करना बिजली व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम है। यूनियन का आरोप है कि सरकार निजीकरण की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ा रही है और हरियाणा को इसके लिए प्रयोगशाला के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

दशहरे पर सड़कों पर उतरेंगे बिजली कर्मचारी

यूनियन के अनुसार, दशहरे के दिन प्रदेशभर में विरोध प्रदर्शन किए जाएंगे। जिला मुख्यालयों और सर्कल कार्यालयों पर बिजली कर्मचारी एकत्रित होंगे और निजीकरण के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे।

प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और एचआरईसी के चेयरमैन के पुतले फूंकने का ऐलान किया गया है। यूनियन ने इसे निजीकरण के खिलाफ अपने आंदोलन में विरोध के बड़े प्रतीक के तौर पर पेश किया है।

सुरेश राठी का कहना है कि इस विरोध में केवल बिजली कर्मचारी ही नहीं, बल्कि किसान और मजदूर भी शामिल होंगे। यूनियन निजी कंपनी को दिए जा रहे लाइसेंस को वापस लेने की मांग पर अड़ी हुई है।

300 से ज्यादा सब डिवीजनों में जलेंगी लाइसेंस की प्रतियां

आंदोलन का अगला चरण 21 अक्टूबर को होगा। राज्य प्रधान के मुताबिक, प्रदेश की 300 से अधिक सब डिवीजनों में बिजली कर्मचारी एकत्रित होकर सरकार की ओर से जारी पत्र और लाइसेंस के मसौदे की प्रतियां जलाएंगे।

इस दौरान बिजली कर्मचारियों के साथ इंजीनियरों और विभिन्न कर्मचारी संगठनों के भी शामिल होने की संभावना जताई गई है। यूनियन का कहना है कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को रोकना और उसे वापस लेना ही आंदोलन का मुख्य उद्देश्य है।

22 से 24 अक्टूबर तक बिजली कर्मचारी रहेंगे हड़ताल पर

निजीकरण के विरोध में सबसे बड़ा ऐलान 22, 23 और 24 अक्टूबर की प्रदेशव्यापी हड़ताल को लेकर किया गया है। यूनियन ने कहा है कि इन तीन दिनों तक प्रदेश के बिजली कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।

सुरेश राठी ने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन केवल तीन दिन की हड़ताल तक सीमित नहीं रहेगा। उनके मुताबिक, जब तक निजी कंपनी इलेवन पावर का लाइसेंस रद्द नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।

बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की संयुक्त कार्रवाई समिति के माध्यम से आगे की रणनीति तैयार करने की बात कही गई है। इससे आने वाले दिनों में आंदोलन के और व्यापक होने की संभावना है।

सरकार से बातचीत नहीं होने पर बढ़ी नाराजगी

यूनियन का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से बातचीत के लिए कोई बुलावा नहीं आया है। कर्मचारियों ने सरकार से निजी कंपनी को दिए गए लाइसेंस से जुड़े फैसले को वापस लेने की मांग की है।

सुरेश राठी ने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांग पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो आंदोलन को जनता के बीच और तेज किया जाएगा। यूनियन का कहना है कि निजीकरण का असर केवल बिजली कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बिजली उपभोक्ताओं और मौजूदा बिजली व्यवस्था पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका है।

बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है आंदोलन का असर

22 से 24 अक्टूबर की प्रस्तावित हड़ताल के ऐलान के बाद अब सबसे बड़ा सवाल प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर इसके संभावित असर को लेकर है। बिजली कर्मचारियों की संख्या और आंदोलन के विस्तार को देखते हुए सरकार के सामने भी स्थिति संभालने की चुनौती रहेगी।

फिलहाल यूनियन अपने फैसले पर कायम है और लाइसेंस रद्द होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रही है। दूसरी ओर, सरकार की ओर से इस मामले में बातचीत या आगे की रणनीति को लेकर क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।

आने वाले दिनों में 21 अक्टूबर का प्रतिलिपि दहन कार्यक्रम और 22 से 24 अक्टूबर की हड़ताल इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम पड़ सकते हैं। अगर सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच बातचीत नहीं हुई तो बिजली निजीकरण का मुद्दा प्रदेश में बड़ा कर्मचारी आंदोलन बन सकता है।