स्पेन भेजने के नाम पर 20 लाख की ठगी, फर्जी वीजा-टिकट देने के मामले में चार पर केस

करनाल में स्पेन भेजकर नौकरी दिलाने के नाम पर 20 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगा है। फर्जी वीजा, टिकट और बाउंस चेक मामले में चार लोगों पर केस दर्ज।

स्पेन भेजने के नाम पर 20 लाख की ठगी, फर्जी वीजा-टिकट देने के मामले में चार पर केस

स्पेन में नौकरी दिलाने का झांसा देकर करनाल के परिवार से 20 लाख रुपये ठगने का आरोप

➤ फर्जी वीजा और हवाई टिकट थमाने का दावा, रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी हुए बाउंस

➤ विक्रमजीत सिंह, पत्नी मनप्रीत कौर, सुभाष और कपिल समेत चार नामजद आरोपियों पर केस दर्ज, आर्थिक अपराध शाखा करेगी जांच

करनाल में बेटे को स्पेन भेजकर नौकरी दिलाने का भरोसा देकर 20 लाख रुपये ठगने का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विदेश भेजने का झांसा देने वाले लोगों ने पहले कम खर्च में सुरक्षित तरीके से यूरोप भेजने का भरोसा दिलाया। इसके बाद दस्तावेज लिए गए, दिल्ली में बायोमीट्रिक की प्रक्रिया कराई गई और अलग-अलग समय पर रकम वसूली गई। बाद में युवक को कथित तौर पर फर्जी वीजा और हवाई टिकट थमा दी गई। विदेश जाने की तारीख नजदीक आने पर कभी टिकट रद्द होने तो कभी वीजा रद्द होने की बात कहकर उसे टाल दिया गया।

शिकायत के मुताबिक, रकम वापस मांगने पर आरोपियों की ओर से चेक दिए गए, लेकिन वे बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए। मामले में पासपोर्ट से जुड़ी कथित गड़बड़ी भी सामने आई। इसके चलते युवक को चंडीगढ़ स्थित पासपोर्ट कार्यालय में परेशानी का सामना करना पड़ा और उसका पासपोर्ट अब तक नहीं बन पाया है। शिकायत के आधार पर थाना सेक्टर-32-33 करनाल में चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। मामले की आगे की जांच आर्थिक अपराध शाखा करनाल को भेज दी गई है। पुलिस के अनुसार, आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

दुकान खरीदने गए पिता-पुत्र को मिला विदेश भेजने का भरोसा

करनाल निवासी काला राम ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलर का काम करता है। 19 सितंबर 2025 को वह अपने बेटे रवि के साथ मुगल कैनाल में दुकान खरीदने गया था। वहां रवि को उसके दोस्त सौरभ पंचाल का जानकार कपिल मिला। बातचीत के दौरान कपिल ने बताया कि उसका खास परिचित विक्रमजीत सिंह लोगों को विदेश भेजने और नौकरी दिलाने का काम करता है।

कपिल ने भरोसा दिलाया कि विक्रमजीत कम खर्च में रवि को सुरक्षित तरीके से यूरोप के स्पेन भेज सकता है और वहां नौकरी भी दिलवा सकता है। उसने यह भी कहा कि वह अपने दो अन्य दोस्तों अभिषेक और गगनदीप सिंह को भी विक्रमजीत के माध्यम से विदेश भेज रहा है। कपिल ने इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेने की बात कही।

इसके बाद कपिल, काला राम और रवि को मुगल कैनाल स्थित स्काईलिंक कार्यालय ले गया। वहां विक्रमजीत सिंह ने भी रवि को स्पेन भेजने और नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। उसने कहा कि इसके लिए रवि का पासपोर्ट और दसवीं-बारहवीं की मार्कशीट देनी होगी। साथ ही यह भरोसा दिलाया कि वीजा आने के बाद पूरी फीस ली जाएगी। बातचीत के बाद विदेश भेजने का सौदा 20 लाख रुपये में तय हुआ।

दिल्ली में बायोमीट्रिक के नाम पर मांगे 9,665 रुपये

शिकायत के अनुसार, 20 सितंबर 2025 को अभिषेक ने रवि को फोन किया। उसने बताया कि विक्रमजीत शुगर मिल कॉलोनी स्थित शिव मंदिर के पास आएगा और रवि को अपने दस्तावेज लेकर वहां पहुंचना है। इसके बाद विक्रमजीत ने रवि को बायोमीट्रिक प्रक्रिया के लिए दिल्ली बुलाने की बात कही। उसने भरोसा दिया कि वहां उसकी व्यवस्था है और उसे किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

16 अक्टूबर 2025 को विक्रमजीत का फोन आया कि बायोमीट्रिक के लिए दिल्ली पहुंचना है। इसके बाद काला राम और रवि दिल्ली स्थित स्पेन वीजा आवेदन केंद्र, डॉ. गोपालदास भवन, अपर ग्राउंड फ्लोर, 12 खंभा रोड पहुंचे। वहां कपिल, अभिषेक और गगनदीप सिंह भी मिले।

बायोमीट्रिक प्रक्रिया के दौरान केंद्र पर 9,665 रुपये जमा कराने को कहा गया। रवि ने कर्मचारियों को बताया कि विक्रमजीत पहले ही पैसे दे चुका है, लेकिन केंद्र के कर्मचारियों ने फीस जमा करना जरूरी बताया। इस दौरान विक्रमजीत से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई। ऐसे में काला राम और रवि को अपने पास से रकम देनी पड़ी।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसी शाम विक्रमजीत ने व्हाट्सऐप कॉल कर बताया कि उसका सिम खराब हो गया है और आगे वह इसी माध्यम से बात करेगा। उसने दावा किया कि बायोमीट्रिक की प्रक्रिया पूरी हो गई है और 10 दिन के भीतर स्पेन का वीजा आ जाएगा।

पोते की मौत के दिन भी पैसे मांगे, खाते में जमा कराए 2.50 लाख रुपये

काला राम ने शिकायत में बताया कि 13 नवंबर 2025 को उनके नवजात पोते की मृत्यु हो गई थी। परिवार इस दुख से गुजर रहा था, उसी दिन विक्रमजीत ने फोन कर रवि का वीजा आने की बात कही और पैसे मांगे। काला राम ने उसे परिवार में हुई मृत्यु के बारे में बताया, लेकिन आरोप है कि विक्रमजीत ने तय रकम तुरंत देने को कहा।

इसके बाद काला राम ने विक्रमजीत के एचडीएफसी बैंक, मॉडल टाउन करनाल स्थित खाते में चेक के माध्यम से 2.50 लाख रुपये जमा करवाए। कुछ समय बाद रवि को कार्यालय बुलाकर वीजा लेने और बाकी रकम देने के लिए कहा गया। परिवार में शोक होने के कारण रवि तुरंत कार्यालय नहीं जा सका।

इसी दौरान कपिल, अभिषेक और गगनदीप अपना वीजा लेने विक्रमजीत के कार्यालय पहुंचे। कपिल ने रवि को फोन कर बताया कि वह अपना वीजा ले आया है। उसने वीजा की फोटो भी व्हाट्सऐप पर भेजी। इसके बाद रवि स्काईलिंक कार्यालय पहुंचा और विक्रमजीत के खाते में 20 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए।

टिकट रद्द होने की बात कहकर विदेश जाने से रोका

शिकायत के मुताबिक, विक्रमजीत ने रवि को बताया कि स्पेन जाने के लिए उसकी टिकट 6 जनवरी को बुक है। उसने यह भी भरोसा दिया कि रवि के दिल्ली में रहने और खाने-पीने की व्यवस्था वह करेगा, लेकिन इसके लिए बाकी रकम देनी होगी।

20 दिसंबर 2025 को काला राम ने अपने परिचित आढ़ती राजेश से पैसे लेकर विक्रमजीत और उसकी पत्नी मनप्रीत कौर को रकम दी। शिकायत के अनुसार, शाम करीब 7 बजे जीत राम हलवाई की दुकान पर यह भुगतान किया गया।

6 जनवरी को रवि ने विक्रमजीत को फोन कर फ्लाइट के बारे में पूछा तो उसने कहा कि टिकट रद्द कर दी गई है। साथ ही बताया कि पूरी रकम का भुगतान होने तक रवि विदेश नहीं जा सकता। इस जवाब के बाद परिवार को विदेश भेजने के नाम पर की गई व्यवस्था पर संदेह होने लगा।

इसके बाद 8 जनवरी को विक्रमजीत और तीसरे आरोपी सुभाष, जिसे शिकायत में सरपंच बताया गया है, देवी लाल चौक स्थित जीत राम स्वीट्स पर पहुंचे। आरोप है कि दोनों वहां से काला राम के दो लाख रुपये नकद लेकर गए। सुभाष ने खुद को गांव सोलो का प्रभावशाली व्यक्ति बताते हुए रवि को स्पेन भेजने और रकम की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 12 जनवरी को विक्रमजीत, मनप्रीत और सुभाष फिर उसी जगह पहुंचे और तीन लाख रुपये नकद ले गए। काला राम का दावा है कि इस तरह उन्होंने विदेश भेजने के नाम पर कुल 20 लाख रुपये दे दिए।

वीजा और हवाई टिकट की जांच में फर्जी होने का आरोप

काला राम के मुताबिक, 14 जनवरी को विक्रमजीत ने रवि को बताया कि उसकी टिकट 22 जनवरी की बुक हो गई है। परिवार को उम्मीद थी कि अब रवि विदेश जा सकेगा, लेकिन 21 जनवरी को विक्रमजीत से संपर्क करने की कोशिश की गई तो उसका मोबाइल बंद मिला।

इसके बाद कपिल ने रवि को बताया कि उसकी विक्रमजीत से बात हुई है और वीजा रद्द हो गया है। उसने नया इंतजाम कराने का भरोसा दिया। इस बीच काला राम, रवि और उसका बड़ा बेटा विजय कई बार स्काईलिंक कार्यालय गए, लेकिन विक्रमजीत वहां नहीं मिला।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बाद में वीजा और टिकट की जांच कराई गई तो दोनों कथित तौर पर फर्जी पाए गए। इसके बाद परिवार ने अपनी रकम वापस लेने के लिए आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की। विदेश भेजने की उम्मीद में जुटाई गई रकम वापस नहीं मिलने से परिवार परेशान हो गया।

रकम लौटाने के लिए दिए चेक बाउंस, पंचायत के सामने भी हुआ भुगतान का वादा

शिकायत के अनुसार, परिवार ने कपिल से भी संपर्क करने की कोशिश की। बाद में कपिल के बताए अनुसार काला राम की मुलाकात आरके पुरम, करनाल की गली नंबर 4 में विक्रमजीत और उसकी पत्नी मनप्रीत कौर से हुई।

काला राम का आरोप है कि विक्रमजीत ने उन्हें 10 लाख रुपये का और मनप्रीत के नाम से चार लाख रुपये का चेक दिया। जब दोनों चेक बैंक में लगाए गए तो वे बाउंस हो गए। इसके बाद भी रकम वापस नहीं मिली।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, बाद में विक्रमजीत कुछ लोगों के साथ उसके घर पहुंचा और रकम लौटाने के लिए कुछ समय मांगा। उसने पैसे वापस करने का भरोसा दिया। पंचायत के सामने भी इस मामले को लेकर बातचीत हुई। आरोप है कि वहां मनप्रीत के नाम से इंडियन बैंक, करनाल का 15 लाख रुपये का चेक दिया गया।

काला राम ने शिकायत में कहा है कि इस पूरे मामले में रकम वापस करने के कई आश्वासन दिए गए, लेकिन उन्हें अपनी पूरी रकम नहीं मिली। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

पासपोर्ट के मामले में भी गड़बड़ी का आरोप

काला राम ने शिकायत में पासपोर्ट से जुड़ी कथित गड़बड़ी का भी जिक्र किया है। उनका आरोप है कि पंचायत के दबाव के बाद रवि का पासपोर्ट लौटाया गया, लेकिन जिस पेज पर वीजा लगा था, वह फटा हुआ था।

इसके बाद कथित तौर पर विक्रमजीत ने रवि के नाम से नया पासपोर्ट आवेदन कर दिया, जिसकी जानकारी परिवार को नहीं थी। रवि ने अपने क्षतिग्रस्त पासपोर्ट के लिए दोबारा आवेदन किया और अपॉइंटमेंट के अनुसार चंडीगढ़ स्थित पासपोर्ट कार्यालय पहुंचा।

वहां पुलिस ने उससे पासपोर्ट गुम होने के आधार पर आवेदन करने के बारे में पूछताछ की। शिकायतकर्ता का आरोप है कि विक्रमजीत और कपिल ने आवेदन में अपने मामा के घर का पता दर्शाया था। इस विवाद के कारण रवि का पासपोर्ट अब तक नहीं बन पाया है।

काला राम ने आरोप लगाया कि इस मामले में विक्रमजीत ने करीब दो लाख रुपये लौटाए, जबकि सुभाष ने उनके खाते में 35 हजार रुपये ट्रांसफर किए। बाकी रकम लौटाने का भरोसा दिया गया था, लेकिन शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर पूरी रकम वापस नहीं करने का आरोप लगाया है।

चार नामजद आरोपियों के खिलाफ केस, आर्थिक अपराध शाखा करेगी जांच

काला राम ने 21 सितंबर को शिकायत दी थी। इसके बाद 22 सितंबर को परिवाद पर अपराध शाखा करनाल के प्रभारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना सेक्टर-32-33 में 20 अक्टूबर को मुकदमा दर्ज किया गया।

मामले में नामजद आरोपियों में विक्रमजीत सिंह, उसकी पत्नी मनप्रीत कौर, गांव सोलो निवासी सुभाष और करनाल निवासी कपिल शामिल हैं। शिकायत में अन्य लोगों की भूमिका का भी जिक्र किया गया है।

शिकायतकर्ता ने आरोपियों पर मिलीभगत, धोखाधड़ी, पैसे ऐंठने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच आर्थिक अपराध शाखा करनाल को भेज दी है। फिलहाल आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।