हरियाणा की 3 साल की परीशा का कमाल, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

रेवाड़ी की 3 वर्षीय परीशा यादव का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज हुआ। परिवार के अनुसार वह एक मिनट में फल, सब्जियों, झंडों और जीवों के दर्जनों नाम बताती है

हरियाणा की 3 साल की परीशा का कमाल, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ नाम

रेवाड़ी की 3 साल की परीशा का इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज

➤ एक मिनट में 35 फल, 35 सब्जियां और 35 देशों के झंडों के नाम बताने का दावा

➤ अब परिवार बेटी को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयार कर रहा है

रेवाड़ी जिले के गांव गोठड़ा पाली निवासी तीन वर्षीय परीशा यादव ने कम उम्र में अपनी याददाश्त और लगातार अभ्यास के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज कराया है। परीशा एक मिनट में अलग-अलग श्रेणियों के दर्जनों नाम बता देती है। परिवार के मुताबिक, वह फल, सब्जियों, देशों के झंडों, जानवरों, पक्षियों और समुद्री जीवों के नाम तेजी से पहचानकर बता सकती है।

परीशा ने रिकॉर्ड के लिए 5 अक्टूबर को आवेदन किया था और 7 अक्टूबर को क्वालीफाई किया। इसके बाद 19 अक्टूबर को प्रमाणपत्र परिवार के पास पहुंचा। बेटी की इस उपलब्धि से परिवार में खुशी का माहौल है। अब परिजन उसे बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल कराने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए परीशा को योग और भगवद्गीता के श्लोकों का अभ्यास भी कराया जा रहा है।

एक मिनट में कई श्रेणियों के दर्जनों नाम बताती है परीशा

परिजनों के अनुसार, परीशा एक मिनट में 35 सब्जियों, 35 फलों और 35 देशों के झंडों के नाम बता देती है। इसके अलावा वह 35 जानवरों, 40 पक्षियों, 25 रेप्टाइल यानी रेंगने वाले जीवों और 35 समुद्री जीवों के नाम भी बता सकती है।

इतनी कम उम्र में अलग-अलग श्रेणियों के नाम याद रखना और उन्हें तय समय में बताना उसके नियमित अभ्यास का हिस्सा है। परिवार का कहना है कि परीशा को यह सब खेल-खेल में सिखाया गया। उसकी मां सोनम यादव नियमित रूप से उसके साथ बैठती थीं और उसे अलग-अलग वस्तुओं, जीव-जंतुओं तथा देशों के झंडों की पहचान कराती थीं।

धीरे-धीरे परीशा ने इन नामों को याद करना और बिना देर किए बताना शुरू कर दिया। परिवार ने उसकी इसी क्षमता के आधार पर रिकॉर्ड के लिए आवेदन किया था।

डेढ़ साल की उम्र से मां ने शुरू कराया था अभ्यास

परीशा के पिता प्रदीप गोठड़ा प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करते हैं, जबकि मां सोनम यादव गृहिणी हैं। सोनम ने बताया कि बेटी की याद रखने और चीजों को पहचानने की क्षमता को देखते हुए उन्होंने करीब डेढ़ साल की उम्र से ही उसे अभ्यास कराना शुरू कर दिया था।

उस समय परीशा ठीक से बोल नहीं पाती थी, लेकिन इशारों के माध्यम से शरीर के 8 से 10 अंगों के नाम बता देती थी। बेटी की इस क्षमता को देखकर मां ने उसे अलग-अलग चीजों के नाम पहचानने और याद रखने का अभ्यास कराना जारी रखा।

परिवार ने उसकी रुचि के अनुसार धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाया। अलग-अलग श्रेणियों के नाम याद करने और उन्हें दोहराने से परीशा की पहचानने और बताने की क्षमता विकसित हुई। इसके बाद परिवार ने उसकी प्रतिभा को रिकॉर्ड के लिए प्रस्तुत करने का फैसला लिया।

संस्कृत में पांच गायत्री मंत्रों का भी करती है उच्चारण

परीशा केवल फल, सब्जियों और जीव-जंतुओं के नाम ही नहीं बताती। परिजनों के मुताबिक, वह पांच गायत्री मंत्रों का संस्कृत में सही उच्चारण भी कर लेती है।

परिवार अब उसकी इस क्षमता को आगे बढ़ाने के लिए योग और भगवद्गीता के श्लोकों का अभ्यास करा रहा है। परिजनों का प्रयास है कि परीशा नई चीजें सीखती रहे और अपनी प्रतिभा के दम पर आगे भी उपलब्धियां हासिल करे।

19 अक्टूबर को परिवार के पास पहुंचा प्रमाणपत्र

परीशा ने 5 अक्टूबर को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स के लिए आवेदन किया था। परिवार के मुताबिक, उसने 7 अक्टूबर को क्वालीफाई किया और 19 अक्टूबर को प्रमाणपत्र उनके पास पहुंच गया। प्रमाणपत्र मिलने के बाद परिवार का उत्साह बढ़ा है।

परिजनों का कहना है कि अब वे परीशा को योग और गीता के श्लोक सिखाकर बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयार कर रहे हैं। हालांकि, परिवार की ओर से प्रदेश और जिले में इस तरह का रिकॉर्ड बनाने वाली पहली बच्ची होने का जो दावा किया गया है, उसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार का दावा- प्रदेश में इस श्रेणी में पहली बच्ची

परिवार का दावा है कि परीशा इस तरह का रिकॉर्ड बनाने वाली पहली बच्ची है। उनके अनुसार, हरियाणा में भी इससे पहले किसी बच्चे ने इस श्रेणी में अपना नाम दर्ज नहीं कराया है। परिवार ने इसे रेवाड़ी जिले के लिए भी खास उपलब्धि बताया है।

फिलहाल, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने के बाद परिवार का अगला लक्ष्य परीशा को बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लिए तैयार करना है।