सावधान! एल नीनो भारत में ला रहा है झुलसाने वाली गर्मी और भीषण बिजली संकट; जानें CREA का बड़ा अलर्ट
CREA की रिपोर्ट के अनुसार 2026 का एल नीनो भारत की ऊर्जा व्यवस्था को सबसे अधिक प्रभावित कर सकता है। कमजोर मानसून, घटता बिजली उत्पादन और बढ़ती बिजली मांग बड़ी चुनौती बन सकती है।
➤ CREA रिपोर्ट का दावा- एल नीनो का सबसे ज्यादा असर भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ सकता है
➤ कम बारिश और कमजोर हवाओं से जलविद्युत व पवन ऊर्जा उत्पादन घटने की आशंका
➤ भीषण गर्मी में एसी की बढ़ती मांग से बिजली की खपत और दबाव बढ़ेगा
सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) की नई रिपोर्ट ने भारत के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर एक बेहद गंभीर और डराने वाली तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के दावों पर गौर करें तो साल 2026 में एल नीनो (El Niño) का प्रभाव भारत की ऊर्जा व्यवस्था पर दुनिया के अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक विनाशकारी हो सकता है। देश के सामने एक अभूतपूर्व 'दोहरी चुनौती' खड़ी है: एक तरफ बिजली के उत्पादन में भारी गिरावट का अंदेशा है, तो दूसरी तरफ भीषण गर्मी के कारण बिजली की मांग अपने ऐतिहासिक चरम पर होगी।
रूठेगा मानसून, थमेगी हवा: कैसे घटेगा बिजली उत्पादन?
भारत की नवीकरणीय (Renewable) ऊर्जा का एक बड़ा हिस्सा पानी और हवा पर निर्भर करता है। एल नीनो के कारण इस इकोसिस्टम को सीधा नुकसान पहुंचने वाला है:
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सूखते जलाशय: एल नीनो के प्रभाव से मानसूनी बारिश कमजोर पड़ने की पूरी आशंका है। बारिश कम होने का सीधा अर्थ है नदियों और जलाशयों में पानी की कमी, जिससे हाइड्रोपावर (जलविद्युत) उत्पादन बुरी तरह प्रभावित होगा।
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पवन ऊर्जा पर ब्रेक: रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान हवा की गति भी सामान्य से कम रह सकती है। इससे देश भर में चल रहे पवन ऊर्जा (Wind Energy) प्रोजेक्ट्स का उत्पादन भी तेजी से गिरेगा।
भीषण गर्मी और एयर कंडीशनर का बढ़ता बोझ
जैसे-जैसे बिजली का उत्पादन घटेगा, मौसम का मिजाज मांग को आसमान पर पहुंचा देगा।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि एल नीनो के कारण तापमान सामान्य से कहीं अधिक रहेगा। झुलसाने वाली इस गर्मी से बचने के लिए घरों से लेकर दफ्तरों तक एयर कंडीशनर (AC), कूलर और अन्य कूलिंग उपकरणों का इस्तेमाल कई गुना बढ़ जाएगा। हाल के महीनों का ट्रेंड भी यही बताता है कि जरा सी गर्मी बढ़ने पर देश में बिजली की मांग रिकॉर्ड स्तर को छूने लगती है।
पावर ग्रिड पर दबाव और 'कोयले' की वापसी
यह स्थिति भारतीय पावर ग्रिड के लिए एक बुरे सपने जैसी है। जब एक तरफ हाइड्रो और विंड एनर्जी से मिलने वाली बिजली कम हो जाएगी और दूसरी तरफ मांग में अचानक उछाल आएगा, तो पूरा दबाव पावर ग्रिड पर पड़ेगा।
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ब्लैकआउट का खतरा: मांग और आपूर्ति का यह असंतुलन ग्रिड फेल होने या भारी बिजली कटौती (Load Shedding) का कारण बन सकता है।
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कोयले पर निर्भरता: हालात को संभालने और देश को अंधेरे से बचाने के लिए सरकार को एक बार फिर कोयला आधारित बिजली संयंत्रों (Coal Power Plants) पर अपनी निर्भरता बढ़ानी पड़ेगी, जो पर्यावरण के लिहाज से एक और बड़ा झटका होगा।
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क्या है समाधान? सरकार और राज्यों के लिए 'अलर्ट'
CREA की यह रिपोर्ट केवल एक चेतावनी नहीं, बल्कि समय रहते जागने का अलार्म है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस आसन्न संकट से बचने के लिए युद्धस्तर पर तैयारी करनी होगी:
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स्मार्ट ग्रिड मैनेजमेंट: ऊर्जा के वितरण को स्मार्ट तकनीक से कंट्रोल करना होगा ताकि बर्बादी रोकी जा सके।
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बैटरी स्टोरेज (BESS): सौर ऊर्जा (Solar Energy) को स्टोर करने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज सिस्टम विकसित करने होंगे, ताकि मांग बढ़ने पर उसका इस्तेमाल हो सके।
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डिमांड मैनेजमेंट: पीक आवर्स (Peak Hours) में बिजली की खपत को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
अगर समय रहते इन उपायों पर अमल नहीं किया गया, तो आने वाला एल नीनो भारत के लिए सिर्फ पसीने छुड़ाने वाली गर्मी ही नहीं, बल्कि एक गहरा ऊर्जा संकट भी लेकर आएगा।
Akhil Mahajan