मौत की गांठ: स्कूल की टाई खोलने की कोशिश में 7 साल के मासूम की दम घुटने से मौत, हरियाणा की रुला देने वाली घटना

Bhiwani News, School Tie Accident, Haryana News, Child Accident, Bhiwani Child Death, School Uniform, Breaking News, CityTehlka

मौत की गांठ: स्कूल की टाई खोलने की कोशिश में 7 साल के मासूम की दम घुटने से मौत,  हरियाणा की रुला देने वाली घटना

➤ स्कूल से घर लौटने के बाद यूनिफॉर्म बदलते समय हुआ दर्दनाक हादसा

टाई की गांठ खुलने के बजाय गले में कसती चली गई, दम घुटने से गई जान

अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित किया, पुलिस जांच में जुटी


हर माता-पिता अपने बच्चे को सुबह स्कूल के लिए तैयार करते समय उसके सुनहरे भविष्य के सपने देखते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बच्चे की स्कूल यूनिफॉर्म का एक छोटा सा हिस्सा उसकी जान का दुश्मन बन सकता है? हरियाणा के भिवानी जिले से एक ऐसी ही दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जो सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि हर अभिभावक और स्कूल प्रबंधन के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है।

भिवानी के गांव फूलपुरा में 7 वर्षीय मासूम हर्षित की मौत उसकी ही स्कूल की टाई से गला घुटने के कारण हो गई। यह हादसा इतना अप्रत्याशित है कि इस पर यकीन करना मुश्किल है, लेकिन यह एक कड़वी सच्चाई है जिसने एक हंसते-खेलते परिवार को कभी न खत्म होने वाला दर्द दे दिया है।

रोज की तरह स्कूल से लौटा था हर्षित

वीरवार की दोपहर थी। समय करीब साढ़े तीन बजे का रहा होगा। 7 साल का हर्षित रोज की तरह स्कूल से घर लौटा। घर आने के बाद, जैसे हर बच्चा करता है, वह अपनी स्कूल यूनिफॉर्म बदलने के लिए अपने कमरे में चला गया। घर के बाकी लोग अपने कामों में व्यस्त थे। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बंद कमरे के अंदर वह मासूम जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। जब काफी देर तक हर्षित कमरे से बाहर नहीं आया, तो परिवार वालों को चिंता हुई।

खोलने की कोशिश में कसती चली गई मौत की गांठ

कमरे के अंदर जो हुआ, वह किसी भी इंसान का दिल दहला देने के लिए काफी है। हर्षित ने कपड़े बदलते समय अपने गले में बंधी टाई को खुद खोलने की कोशिश की। लेकिन, एक 7 साल के बच्चे को टाई की गांठ खोलने का सही तरीका नहीं पता था।

उसने गांठ को ढीला करने के बजाय गलत दिशा में खींच दिया। वह जितना टाई को खींचता गया, गांठ उतनी ही कसती चली गई। गले पर दबाव बढ़ता गया और मासूम का दम घुटने लगा। घबराहट में उसने शायद और जोर लगाया होगा, जिससे श्वास नली पूरी तरह दब गई और वह बेसुध होकर गिर पड़ा।

कमरे का नजारा देख उड़े परिजनों के होश

जब परिजन उसे देखने कमरे में पहुंचे, तो हर्षित फर्श पर बेसुध पड़ा था। यह मंजर देखकर परिवार वालों के पैरों तले जमीन खिसक गई। वे तुरंत उसे आनन-फानन में भिवानी के नागरिक अस्पताल लेकर भागे। रास्ते भर वे उसकी सलामती की दुआएं मांगते रहे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने जांच के बाद मासूम हर्षित को मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। जिस मां ने सुबह अपने बच्चे को चूमकर स्कूल भेजा था, उसका रो-रोकर बुरा हाल है। पूरे फूलपुरा गांव में मातम पसरा है।

क्या कहती है पुलिस की जांच?

खरक पुलिस चौकी के जांच अधिकारी वीरेंद्र के अनुसार, बच्चे की टाई में कोई 'इलास्टिक' (रबड़) नहीं लगी थी। वह एक सामान्य कपड़े की टाई थी, जिसमें गांठ लगाई जाती है। प्रारंभिक जांच में यही सामने आया है कि बच्चे द्वारा गलत दिशा में खींचे जाने के कारण टाई का कसाव इतना बढ़ गया कि उसका दम घुट गया। पुलिस इसे एक दर्दनाक हादसा मानकर सभी तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर रही है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए जागरूकता संदेश (Alert for Parents & Schools)

हर्षित अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यह हृदयविदारक कहानी हम सभी के लिए एक बहुत बड़ा सबक छोड़ गई है। इस तरह के हादसों को रोकने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • इलास्टिक वाली टाई का करें उपयोग: स्कूलों को चाहिए कि वे छोटी कक्षाओं (प्राइमरी तक) के बच्चों के लिए गांठ वाली टाई के बजाय 'रेडिमेड इलास्टिक' या 'वेल्क्रो' (Velcro) वाली टाई को ही यूनिफॉर्म का हिस्सा बनाएं। यह गले में फंसती नहीं है और आसानी से निकल जाती है।

  • बच्चों पर रखें नजर: जब छोटे बच्चे स्कूल से आएं और कपड़े बदल रहे हों, तो उन पर नजर रखें या उनकी मदद करें।

  • बच्चों को सिखाएं सही तरीका: अगर बच्चे को खुद कपड़े बदलने की आदत डाल रहे हैं, तो उसे टाई खोलने, बेल्ट निकालने या बटन खोलने का सही तरीका शांति से सिखाएं।

  • घबराहट में क्या करें: बच्चों को यह जरूर बताएं कि अगर कभी कोई कपड़ा या धागा कहीं फंस जाए, तो उसे जोर से खींचने के बजाय तुरंत अपने माता-पिता को आवाज लगाएं।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि हमारी छोटी सी अनदेखी या अनजाने में हुई चूक कितनी भारी पड़ सकती है। इस खबर को केवल पढ़कर न भूलें, बल्कि अपने आस-पास के लोगों और स्कूल प्रबंधनों को भी जागरूक करें ताकि भविष्य में किसी और 'हर्षित' के साथ ऐसा दर्दनाक हादसा न हो।