CJI ने दिया आदेश तो उनके भाई को शख्‍स ने उनके भाई केा मिला दिया फोन, जस्टिस सूर्यकांत बोले- हिम्मत कैसे हुई

CJI सूर्यकांत ने भाई को फोन कर अदालत के आदेश पर सवाल उठाने पर सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की चेतावनी दी।

CJI ने दिया आदेश तो उनके  भाई को शख्‍स ने उनके भाई केा मिला दिया फोन, जस्टिस सूर्यकांत बोले- हिम्मत कैसे हुई

CJI सूर्यकांत कोर्ट में सख्त, भाई को फोन करने पर भड़के
मेडिकल कॉलेज एडमिशन विवाद से जुड़ा मामला, फर्जी धर्म परिवर्तन पर जांच
कोर्ट ने आपराधिक अवमानना की चेतावनी दी, सख्त कार्रवाई के संकेत


नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत में बुधवार को एक हैरान करने वाला नजारा दिखा, जब चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत एक मामले की सुनवाई के दौरान बेहद सख्त रुख में नजर आए। मामला केवल कानूनी बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायपालिका की गरिमा, स्वतंत्रता और सुरक्षा तक जा पहुंचा, जब एक याचिकाकर्ता के पिता द्वारा सीधे CJI के भाई को फोन कर अदालत के आदेश पर सवाल उठाने की बात सामने आई।

यह पूरा विवाद उत्तर प्रदेश के एक मेडिकल कॉलेज में ‘बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे’ के तहत दाखिले से जुड़ा हुआ है। अदालत को संदेह था कि कुछ छात्रों ने आरक्षण का लाभ लेने के लिए फर्जी तरीके से धर्म परिवर्तन के प्रमाण पत्र तैयार करवाए हैं। इसी शक के आधार पर CJI की बेंच ने मामले की जांच के आदेश दिए थे, ताकि सच्चाई सामने आ सके और सिस्टम की पारदर्शिता बनी रहे।

सुनवाई के दौरान जैसे ही बहस शुरू हुई, CJI सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील को बीच में ही रोकते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आपके मुवक्किल के पिता ने मेरे भाई को फोन कर पूछा कि मैंने जांच का आदेश क्यों दिया। क्या वे मुझे निर्देश देंगे? क्या यह मुझे प्रभावित या धमकाने की कोशिश है? अदालत के इस तीखे रुख ने पूरे माहौल को गंभीर बना दिया।

CJI ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वे पिछले 23 वर्षों से ऐसे दबावों और प्रयासों का सामना करते आए हैं और किसी भी कीमत पर न्याय प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता सर्वोपरि है और इस पर किसी भी तरह का दबाव डालने की कोशिश बेहद गंभीर मानी जाएगी।

इस दौरान CJI ने याचिकाकर्ता के वकील को भी कड़ी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अगर उनका मुवक्किल ऐसी ओछी और अनुचित हरकतों में शामिल है, तो वकील को तुरंत केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए। हालांकि, वकील ने इस पूरे घटनाक्रम के लिए अदालत से बिना शर्त माफी मांगते हुए कहा कि उनका इस कृत्य से कोई संबंध नहीं है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने इसे ‘आपराधिक अवमानना’ (Criminal Contempt) का मामला मानते हुए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि जजों या उनके परिवार को डराने, प्रभावित करने या दबाव बनाने की कोई भी कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे मामलों में कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

यह घटनाक्रम न केवल न्यायपालिका की मजबूती को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि अदालत अपने अधिकारों और गरिमा की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।