HDFC बैंक में मचा हड़कंप: चेयरमैन के इस्तीफे से शेयर धड़ाम, सेबी की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस

HDFC बैंक के चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से शेयरों में गिरावट और सेबी की जांच के बाद बड़ा नेतृत्व संकट खड़ा हो गया है।

HDFC बैंक में मचा हड़कंप: चेयरमैन के इस्तीफे से शेयर धड़ाम, सेबी की एंट्री से बढ़ा सस्पेंस

अचानक इस्तीफे से HDFC बैंक में नेतृत्व संकट गहराया
3 दिन में शेयरों में करीब 12% गिरावट, निवेशकों में हड़कंप
सेबी ने जांच शुरू की, ‘नैतिकता’ वाले आरोपों पर उठे बड़े सवाल


देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank में अचानक बड़ा नेतृत्व संकट खड़ा हो गया है। बैंक के गैर-कार्यकारी अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे ने कॉर्पोरेट जगत और शेयर बाजार दोनों में हलचल मचा दी है। इस घटनाक्रम के बाद बैंक के प्रबंधन, पारदर्शिता और भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

बताया गया कि चक्रवर्ती ने 18 मार्च 2026 को अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपने इस्तीफे में ‘मूल्य और नैतिकता’ का हवाला देते हुए कहा कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर कुछ गतिविधियां और प्रथाएं उनके व्यक्तिगत सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं। खास बात यह है कि HDFC बैंक के इतिहास में पहली बार किसी पार्ट-टाइम चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में इस तरह पद छोड़ा है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

इस्तीफे के बाद बैंक प्रबंधन ने इसे ‘हैरान करने वाला’ बताया है। नए अंतरिम चेयरमैन केकी मिस्त्री ने संकेत दिए कि चक्रवर्ती और कार्यकारी नेतृत्व के बीच संबंधों में कुछ तनाव हो सकता है, लेकिन उन्होंने किसी ठोस गड़बड़ी से इनकार किया है। उनका कहना है कि बैंक का संचालन पूरी तरह स्थिर है और किसी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है।

इस पूरे विवाद के बीच बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी सेबी भी सक्रिय हो गया है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने स्पष्ट किया कि स्वतंत्र निदेशकों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए और बिना ठोस सबूत के आरोप नहीं लगाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सेबी इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेगा और सभी तथ्यों को सामने लाया जाएगा।

इस विवाद का सीधा असर शेयर बाजार पर भी देखने को मिला है। निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ने के कारण HDFC बैंक के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। महज तीन दिनों के भीतर बैंक के शेयर करीब 12 प्रतिशत तक लुढ़क गए। बीएसई और एनएसई दोनों पर स्टॉक में लगातार गिरावट देखने को मिली, जिससे कंपनी के बाजार पूंजीकरण में करीब 1.52 लाख करोड़ रुपए की कमी आ गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवाल खड़े करता है। अब निवेशकों और बाजार की नजरें सेबी की जांच रिपोर्ट और बैंक के अगले कदमों पर टिकी हैं।