हरियाणा मूल के आचार्य देवव्रत देश के दो राज्‍यों के बने राज्‍यपाल, महाराष्‍ट्र का भी मिला अतिरिक्‍त प्रभार

हरियाणा मूल के आचार्य देवव्रत, जो प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय अभियान बना चुके हैं, को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। यह जिम्मेदारी उपराष्ट्रपति बने सी.पी. राधाकृष्णन के इस्तीफे के बाद दी गई है।

हरियाणा मूल के आचार्य देवव्रत  देश के दो राज्‍यों के बने राज्‍यपाल,  महाराष्‍ट्र का भी मिला अतिरिक्‍त प्रभार



• राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा
• हरियाणा मूल के देवव्रत ने प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय मिशन बनाने में अहम योगदान दिया
• महाराष्ट्र का पद सी.पी. राधाकृष्णन के उपराष्ट्रपति चुने जाने के बाद खाली हुआ

चंडीगढ़। हरियाणा मूल के और प्राकृतिक खेती को देशव्यापी मिशन का रूप देने वाले आचार्य देवव्रत को अब एक और बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी मिली है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें महाराष्ट्र का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा है। यह कदम उस समय उठाया गया जब महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन उपराष्ट्रपति पद पर निर्वाचित हो गए और 11 सितम्बर 2025 को उन्होंने राज्यपाल पद से इस्तीफा दे दिया।

आचार्य देवव्रत लंबे समय तक कुरुक्षेत्र गुरुकुल में आचार्य रहे और शिक्षा, भारतीय संस्कारों तथा सामाजिक अभियानों के प्रचार-प्रसार में सक्रिय रहे। सादगी, संयम और समाजहित उनकी पहचान है। हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने किसानों को रसायन मुक्त खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया, जिसके बाद हजारों किसानों ने जैविक खेती को अपनाया।

गुजरात के राज्यपाल बनने के बाद भी उन्होंने प्राकृतिक खेती की दिशा में कई पहल की। उनका मानना है कि रसायनों का अंधाधुंध प्रयोग मिट्टी, पानी और पर्यावरण के लिए हानिकारक है, जबकि प्राकृतिक खेती किसानों का खर्च घटाकर उन्हें ज्यादा आमदनी दिला सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कई बार ‘मन की बात’ में आचार्य देवव्रत की पहल की सराहना कर चुके हैं। केंद्र सरकार ने हालिया बजट में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विशेष फंड की घोषणा की थी। हरियाणा सरकार भी उनके साथ इस दिशा में कार्य कर रही है।

अब महाराष्ट्र का प्रभार मिलने के बाद आचार्य देवव्रत से अपेक्षा है कि वे न केवल संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाएँगे, बल्कि सामाजिक और कृषि अभियानों को भी नई गति देंगे