योगी कैबिनेट का बड़ा विस्तार: 8 नए मंत्रियों ने ली शपथ, पश्चिम यूपी और जातीय समीकरण साधने पर भाजपा का जोर
योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल का विस्तार हुआ, जिसमें 8 नए चेहरों को शामिल किया गया। भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे कैबिनेट मंत्री बने, जबकि भाजपा ने जातीय और क्षेत्रीय समीकरण साधने पर जोर दिया।
➤ योगी मंत्रिमंडल में 8 नए चेहरों की एंट्री
➤ भूपेंद्र चौधरी और मनोज पांडे बने कैबिनेट मंत्री
➤ पश्चिम यूपी और जातीय समीकरण साधने पर भाजपा का फोकस
Yogi Adityanath सरकार के मंत्रिमंडल का रविवार को बड़ा विस्तार किया गया। लखनऊ स्थित जनभवन के गांधी सभागार में आयोजित समारोह में राज्यपाल Anandiben Patel ने नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत सरकार और भाजपा संगठन के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
मंत्रिमंडल विस्तार में कुल 8 नए चेहरों को शामिल किया गया। इनमें Bhupendra Singh Chaudhary और Manoj Kumar Pandey को कैबिनेट मंत्री बनाया गया, जबकि कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर, हंसराज विश्वकर्मा और कैलाश सिंह राजपूत ने राज्यमंत्री पद की शपथ ली।
दो मंत्रियों का प्रमोशन
योगी सरकार में पहले से राज्यमंत्री रहे अजीत सिंह पाल और सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन भी किया गया। दोनों अब राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के रूप में काम करेंगे। शपथ ग्रहण के बाद नए मंत्रियों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पुष्पगुच्छ भेंट कर आभार जताया।
समारोह के दौरान जनभवन का गांधी सभागार “भारत माता की जय” और “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा।
कौन हैं नए मंत्री?
भूपेंद्र सिंह चौधरी भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में विधान परिषद सदस्य हैं। वहीं मनोज कुमार पांडे ऊंचाहार सीट से विधायक हैं और समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे।
राज्यमंत्री बनीं कृष्णा पासवान खागा से विधायक हैं। सुरेंद्र दिलेर खैर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि कैलाश सिंह राजपूत तिर्वा से विधायक हैं। हंसराज विश्वकर्मा विधान परिषद सदस्य हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय माने जाते हैं।
अब योगी कैबिनेट में कुल 54 मंत्री
इस विस्तार के बाद योगी सरकार 2.0 में मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों समेत कुल 54 मंत्री हो गए हैं। इनमें 21 कैबिनेट मंत्री, 14 राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 18 राज्य मंत्री शामिल हैं।
संवैधानिक प्रावधान के अनुसार उत्तर प्रदेश में अधिकतम 60 मंत्री बनाए जा सकते हैं। खास बात यह रही कि किसी मौजूदा मंत्री को हटाए बिना आठ नए चेहरों को शामिल किया गया।
पश्चिम यूपी और जातीय समीकरण पर भाजपा की नजर
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए भाजपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और जाट राजनीति को साधने की कोशिश की है। भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट में शामिल करना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
इसके अलावा ओबीसी, दलित और सवर्ण वर्गों के बीच संतुलन बनाने पर भी पार्टी ने फोकस किया है। भाजपा के मौजूदा विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की सामाजिक संरचना को ध्यान में रखते हुए नए मंत्रियों का चयन किया गया।
मार्च 2024 में हुआ था पिछला विस्तार
इससे पहले योगी सरकार का पहला मंत्रिमंडल विस्तार मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले हुआ था। उस समय ओम प्रकाश राजभर, दारा सिंह चौहान, अनिल कुमार और सुनील कुमार शर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
Akhil Mahajan