UPI पर चार्ज अगले साल तक टल सकता है: फेस्टिव सीजन में पेमेंट फ्री रहने का दावा, 15 अक्टूबर से लागू होना था 0.4% चार्ज

UPI पर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट चार्ज अगले साल तक टल सकता है। फेस्टिव सीजन में पेमेंट फ्री रखने पर सरकार विचार कर रही है।

UPI पर चार्ज अगले साल तक टल सकता है: फेस्टिव सीजन में पेमेंट फ्री रहने का दावा, 15 अक्टूबर से लागू होना था 0.4% चार्ज

➤ 15 अक्टूबर से लागू होने वाला 0.4% चार्ज टल सकता है

➤ फेस्टिव सीजन में UPI पेमेंट फ्री रखने पर विचार

➤ पेटीएम समेत कई फिनटेक शेयरों में गिरावट


UPI पेमेंट पर मर्चेंट चार्ज लागू करने की तारीख आगे बढ़ सकती है। केंद्र सरकार 15 अक्टूबर से ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगाने का नियम लागू करने वाली थी, लेकिन न्यूज एजेंसी PTI ने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि सरकार अब इसे अगले साल 1 जनवरी से लागू करने पर विचार कर रही है। अगर ऐसा होता है तो फेस्टिव सीजन के दौरान दुकानदारों और पेमेंट कंपनियों को राहत मिल सकती है और इस अवधि में UPI ट्रांजैक्शन फ्री रहेंगे। सरकार की ओर से इस संबंध में अंतिम फैसला अगले कुछ दिनों में सामने आने की बात कही जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेस्टिव सीजन के दौरान दुकानदारों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े, इसलिए सरकार 0.4% मर्चेंट शुल्क लागू करने की तारीख आगे बढ़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, अभी इसे लेकर अंतिम आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है। प्रस्तावित बदलाव लागू होने की स्थिति में नया नियम अगले साल 1 जनवरी से प्रभावी हो सकता है।

UPI पर मर्चेंट चार्ज टलने की खबर का असर शेयर बाजार में लिस्टेड फिनटेक कंपनियों के शेयरों पर भी दिखाई दिया। कारोबार के दौरान पेटीएम समेत कई कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।

पेटीएम के शेयर में 10% तक गिरावट

ट्रेडिंग के दौरान पेटीएम का शेयर एक समय 10% तक टूटकर ₹1,561 के निचले स्तर पर पहुंच गया था। हालांकि, बाजार बंद होने तक इसमें कुछ सुधार आया और शेयर 5.42% की गिरावट के साथ ₹1,640 पर बंद हुआ।

मोबिक्विक, पाइन लैब्स और NPST भी गिरे

मोबिक्विक का शेयर दिन के कारोबार में 8.43% गिरकर ₹235 तक पहुंच गया था। हालांकि, मार्केट क्लोज होने पर यह 4.57% की गिरावट के साथ ₹245 पर बंद हुआ।

पाइन लैब्स का शेयर ₹169 के निचले स्तर तक पहुंचा और बाद में 4.39% की गिरावट के साथ ₹170 पर बंद हुआ।

NPST का शेयर भी 3.39% गिरकर ₹1,791.30 पर बंद हुआ।

UPI MDR चार्ज के प्रस्तावित नियम क्या हैं

प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, महीने में ₹1 लाख से ज्यादा UPI कलेक्शन करने वाले बड़े व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के हर पेमेंट पर 0.4% MDR+GST देना होगा। इसमें MDR चार्ज पर 18% GST लगेगा।

वहीं, जिन छोटे व्यापारियों की महीने में UPI से कुल कमाई ₹1 लाख तक है, उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। यह नियम उस स्थिति में भी लागू होगा, जब उनका कोई एक ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा का हो।

यदि कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा UPI कलेक्शन करता है, तो बैंक उसे ऑटोमेटिक तौर पर बड़े मर्चेंट यानी पर्सन-टू-मर्चेंट कैटेगरी में शिफ्ट कर सकते हैं। इसके बाद उस व्यापारी पर प्रस्तावित मर्चेंट चार्ज लागू होगा।

प्रस्तावित व्यवस्था में बड़े व्यापारियों को ₹2,000 तक के पेमेंट पर कोई फीस नहीं देनी होगी। यानी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट इस चार्ज के दायरे से बाहर रहेंगे।

वहीं, ₹75,000 या उससे बड़े ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से अधिकतम ₹300+GST ही चार्ज लिया जाएगा। यानी 0.4% की गणना के बावजूद एक ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से वसूले जाने वाले चार्ज की अधिकतम सीमा तय रहेगी।

₹2,000 की सीमा पूरे दिन की कुल बिक्री पर लागू नहीं होगी। यह सीमा हर एक पेमेंट के आधार पर देखी जाएगी। यानी किसी व्यापारी को एक दिन में मिलने वाली कुल UPI बिक्री के बजाय प्रत्येक अलग-अलग ट्रांजैक्शन की राशि को आधार बनाया जाएगा।

कुछ सेक्टर में ₹5 की फ्लैट फीस

प्रस्तावित नियमों में कुछ खास सेक्टर के व्यापारियों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% के बजाय फ्लैट ₹5 देना होगा।

कार्ड पेमेंट के मुकाबले UPI MDR कम

दिए गए नियमों के मुताबिक, UPI पर प्रस्तावित MDR चार्ज क्रेडिट और डेबिट कार्ड के मुकाबले कम रहेगा। क्रेडिट कार्ड पर 1.5%-2.5% और डेबिट कार्ड पर 0.90% तक चार्ज होने की तुलना में UPI का प्रस्तावित MDR 0.4% है।

MDR क्या होता है

Merchant Discount Rate यानी MDR वह फीस होती है, जो कोई व्यापारी या दुकानदार डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या डिजिटल पेमेंट सुविधा जैसे UPI के लिए पॉइंट ऑफ सेल मशीन या पेमेंट गेटवे का इस्तेमाल करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है।

यह फीस डिजिटल पेमेंट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क को चलाने की लागत को पूरा करने के लिए ली जाती है। यह चार्ज व्यापारी को देना होता है, ग्राहक को नहीं।

फिलहाल UPI पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट चार्ज की तारीख को आगे बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला सामने आना बाकी है। अगर सरकार इसे अगले साल 1 जनवरी तक टालती है, तो फेस्टिव सीजन के दौरान दुकानदारों और पेमेंट कंपनियों को अतिरिक्त चार्ज से राहत मिल सकती है।