कांग्रेस को झटका, मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

सोनीपत में कांग्रेस के मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने नामांकन के बाद चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया। पार्षद टिकट विवाद और गुटबाजी को इसका मुख्य कारण माना जा रहा है।

कांग्रेस को झटका, मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार

कांग्रेस को बड़ा झटका, मेयर प्रत्याशी कमल दीवान ने चुनाव लड़ने से किया इनकार
■ पार्षद टिकटों को लेकर गुटबाजी और नाराजगी बनी मुख्य वजह
■ नामांकन के बाद बदला फैसला, हाईकमान में मचा हड़कंप


सोनीपत नगर निगम मेयर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है। पार्टी के घोषित उम्मीदवार Kamal Diwan ने अचानक चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है।

हैरानी की बात यह है कि कमल दीवान ने एक दिन पहले ही अपना नामांकन दाखिल किया था, लेकिन अब उन्होंने अपना रुख बदल लिया। इस फैसले से स्थानीय संगठन में हलचल मच गई है और पार्टी हाईकमान भी सक्रिय हो गया है।


पार्षद टिकटों पर विवाद बना बड़ा कारण

सूत्रों के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम की जड़ पार्षद टिकटों का विवाद है। बताया जा रहा है कि कुछ ऐसे चेहरों को टिकट देने की चर्चा से दीवान नाराज हैं, जिन पर पहले भी पार्टी के खिलाफ काम करने के आरोप लग चुके हैं।

इन नामों को पूर्व विधायक Surender Panwar के करीबी माना जा रहा है। इसी वजह से संगठन के भीतर गुटबाजी और टकराव खुलकर सामने आ गया है।


पुराने चुनाव की हार का भी असर

कमल दीवान की नाराजगी की एक बड़ी वजह पिछला मेयर उपचुनाव भी माना जा रहा है। उस चुनाव में उन्हें करीब 35,766 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था।

उस समय भी उन्होंने पार्टी के कुछ नेताओं और पार्षदों पर भीतरघात के आरोप लगाए थे। माना जा रहा है कि उन्हीं चेहरों को फिर से टिकट मिलने की चर्चा ने उनकी नाराजगी बढ़ा दी।


फोन बंद, अंबाला में होगा मंथन

सूत्रों के अनुसार, कमल दीवान ने अपना फोन बंद कर लिया है और फिलहाल किसी से संपर्क में नहीं हैं। परिवार के साथ चर्चा के बाद उन्हें अंबाला बुलाया गया है, जहां पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक होगी।

इस बैठक में ही यह तय हो सकता है कि वे चुनाव लड़ेंगे या नहीं।


चुनावी समीकरण बदलने के संकेत

इस घटनाक्रम ने सोनीपत मेयर चुनाव के समीकरण बदल दिए हैं। कांग्रेस के लिए यह फैसला बड़ा झटका माना जा रहा है, जबकि विरोधी दलों को इससे फायदा मिल सकता है।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी हाईकमान इस संकट को कैसे संभालता है।