हरियाणा में गो माता से ऐसा प्रेम...गो माता ‘नंदिनी’ की तेरहवीं: 11 गांवों को न्योता, 650 किलो रसगुल्लों का भोग- हवन, गो आरती और महाभोज

सोनीपत के हसनयारपुर तिहाड़ा कलां गांव में 18 वर्षों तक दहिया परिवार के साथ रहीं गो माता नंदिनी की तेरहवीं पर सामूहिक हवन, गो आरती और महाभोज का आयोजन किया गया है। 11 गांवों को निमंत्रण दिया गया है और नंदिनी की पसंद को याद करते हुए 650 किलो रसगुल्लों का विशेष भोग तैयार कराया गया है।

हरियाणा में गो माता से ऐसा प्रेम...गो माता ‘नंदिनी’ की तेरहवीं: 11 गांवों को न्योता, 650 किलो रसगुल्लों का भोग- हवन, गो आरती और महाभोज

➤ 18 वर्षों तक परिवार का हिस्सा रहीं गो माता ‘नंदिनी’ की स्मृति में विशेष श्रद्धांजलि सभा

➤ 11 विद्वान पंडित कराएंगे सामूहिक हवन, गो आरती के बाद 21 ब्राह्मणों को सबसे पहले मिलेगा प्रसाद

➤ नंदिनी को बेहद पसंद थे रसगुल्ले, परिवार ने स्मृति में तैयार कराया 650 किलो का विशेष भोग


सोनीपत जिले के गांव हसनयारपुर तिहाड़ा कलां में बुधवार, 15 जुलाई को आस्था, श्रद्धा और गो सेवा से जुड़ा एक विशेष धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। करीब 18 वर्षों तक दहिया परिवार के साथ परिवार के सदस्य की तरह रहीं गो माता ‘नंदिनी’ के गोलोक गमन के बाद उनकी तेरहवीं पर सामूहिक हवन यज्ञ, गो आरती, पुष्पांजलि और महाभोज आयोजित किया गया है। आयोजन के लिए आसपास के 11 गांवों के लोगों को निमंत्रण दिया गया है, जबकि नंदिनी की पसंद को याद करते हुए करीब 650 किलोग्राम रसगुल्लों का विशेष भोग तैयार कराया गया है।

परिवार के अनुसार, नंदिनी केवल एक गाय नहीं थीं, बल्कि वर्षों से घर का अभिन्न हिस्सा बन चुकी थीं। बीमारी के कारण उनके निधन के बाद परिवार ने उन्हें पूरे सम्मान और वैदिक रीति-रिवाजों के साथ अंतिम विदाई दी थी। अब उनकी स्मृति में आयोजित तेरहवीं को परिवार ने गो सेवा, गो संरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने का माध्यम बनाया है।

11 विद्वान पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार से शुरू होगा धार्मिक कार्यक्रम

मंजीत तिहाड़ा के अनुसार, धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 9 बजे सामूहिक हवन यज्ञ से होगी। इसके लिए विशेष आकार का हवन कुंड तैयार कराया गया है। हवन में 11 विद्वान पंडित वैदिक मंत्रोच्चार के बीच करीब 45 मिनट तक आहुति दिलाएंगे।

व्यवस्था इस तरह की गई है कि एक समय में 10 से अधिक श्रद्धालु हवन में आहुति देकर गो माता नंदिनी को श्रद्धासुमन अर्पित कर सकें। परिवार ने बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए आयोजन स्थल पर व्यापक तैयारियां की हैं।

गो आरती के बाद महाभोज, सबसे पहले 21 ब्राह्मणों को दिया जाएगा प्रसाद

हवन यज्ञ के बाद सुबह 10 बजे सामूहिक गो आरती की जाएगी। इसके बाद सुबह 11 बजे महाभोज शुरू होगा। परिवार के अनुसार, सबसे पहले 21 ब्राह्मणों को प्रसाद वितरित किया जाएगा और इसके बाद आयोजन में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं, गो भक्तों और ग्रामीणों को महाभोज कराया जाएगा।

महाभोज में रसगुल्लों के अलावा पेठे और आलू की सब्जी, पूरी तथा अन्य प्रसाद तैयार किया गया है। परिवार का कहना है कि आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद है, इसलिए भोजन और अन्य व्यवस्थाएं उसी के अनुसार की गई हैं।

नंदिनी को पसंद थे रसगुल्ले, स्मृति में तैयार कराया 650 किलो का विशेष भोग

आयोजन का सबसे भावनात्मक पहलू 650 किलोग्राम रसगुल्लों का विशेष भोग है। मंजीत दहिया के अनुसार, गो माता नंदिनी को अपने जीवनकाल में खीर या दूसरी मिठाइयों की तुलना में रसगुल्ले बेहद पसंद थे। परिवार ने इसी भावनात्मक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए उनकी तेरहवीं पर बड़ी मात्रा में रसगुल्ले तैयार करवाए हैं।

परिवार का कहना है कि यह भोग केवल धार्मिक परंपरा का हिस्सा नहीं, बल्कि नंदिनी के साथ बिताए 18 वर्षों की स्मृतियों और उनके प्रति परिवार के स्नेह का प्रतीक भी है।

11 गांवों में मुनादी कर लोगों को दिया गया आयोजन का निमंत्रण

श्रद्धांजलि सभा और महाभोज के लिए तिहाड़ा कलां, तिहाड़ा खुर्द, ताजपुर, भटगांव, लुहारी टिब्बा, रतनगढ़, सलीमसर माजरा, बड़वासनी, महलाना, खेड़ी दहिया और भदाना सहित 11 गांवों के लोगों को आमंत्रित किया गया है।

परिवार की ओर से कई दिन पहले इन गांवों में मुनादी भी करवाई गई, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण, श्रद्धालु और गो भक्त कार्यक्रम में शामिल होकर नंदिनी को श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें और प्रसाद ग्रहण कर सकें।

तीन महीने की बछड़ी बनकर घर आई थीं नंदिनी, धीरे-धीरे बनीं परिवार का हिस्सा

मंजीत तिहाड़ा के अनुसार, करीब 18 साल पहले उनके भाई मेहरबान गांव महलाना स्थित रिश्तेदारी से नंदिनी की मां को घर लेकर आए थे। उस समय नंदिनी महज तीन महीने की बछड़ी थीं। समय के साथ वह परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ इतनी घुल-मिल गईं कि उन्हें घर के सदस्य की तरह माना जाने लगा।

करीब 16 साल पहले प्रसव के दौरान नंदिनी की मां की मौत हो गई थी। उस समय नंदिनी करीब दो वर्ष की थीं। इसके बाद परिवार ने उनकी देखभाल की पूरी जिम्मेदारी संभाली और उन्हें स्नेह के साथ पाला।

परिवार में बेटी नहीं थी, नंदिनी से जुड़ता गया भावनात्मक रिश्ता

मंजीत तिहाड़ा के अनुसार, उस समय परिवार में कोई बेटी नहीं थी। करीब 33 साल पहले परिवार में एक बहन थी। ऐसे में नंदिनी के घर आने के बाद परिवार का उनसे बेटी जैसा भावनात्मक रिश्ता बनता गया। बाद में मेहरबान के घर बेटी का जन्म हुआ, लेकिन तब तक नंदिनी परिवार के हर सदस्य के जीवन का खास हिस्सा बन चुकी थीं।

परिवार के बच्चे उनके साथ खेलते थे। परिजनों के अनुसार, नंदिनी ने अपने पूरे जीवन में कभी किसी बच्चे, बुजुर्ग या अन्य व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचाया। उनके शांत स्वभाव के कारण परिवार और गांव के लोगों के बीच भी उनसे विशेष लगाव था।

12 संतानों को दिया जन्म, छह गाय आज भी परिवार के पास

नंदिनी ने अपने जीवनकाल में 12 बार संतानों को जन्म दिया। इनमें से छह गाय आज भी दहिया परिवार के पास हैं, जबकि अन्य बछड़ों और बछड़ियों को परिवार ने अपने मित्रों और परिचितों को दिया है।

परिवार का कहना है कि नंदिनी की वंश परंपरा आज भी उनके घर में सुरक्षित है और सभी गोवंश की उसी समर्पण के साथ सेवा की जा रही है। परिवार लंबे समय से गो सेवा और गो संरक्षण से जुड़ा हुआ है।

साढ़े तीन महीने से बीमार थीं नंदिनी, इलाज के बावजूद नहीं बच सकीं

परिजनों के अनुसार, नंदिनी करीब साढ़े तीन महीने से बीमार थीं। उनके इलाज के लिए कई डॉक्टरों से सलाह ली गई। डॉक्टरों ने आशंका जताई थी कि संभव है उन्होंने लोहे का कोई टुकड़ा निगल लिया हो, जिससे उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती गई। हालांकि बीमारी के दौरान भी उन्होंने अंतिम समय तक भोजन करना नहीं छोड़ा।

परिवार के मुताबिक, करीब एक वर्ष पहले नंदिनी ने समय से पहले एक बछड़ी को जन्म दिया था। समय से पहले जन्म होने के कारण वह लगातार कमजोर रही और नंदिनी के निधन से करीब एक सप्ताह पहले उसकी भी मौत हो गई थी। इसके बाद बीमारी से जूझ रही नंदिनी ने भी दम तोड़ दिया।

पुष्प वर्षा के बाद वैदिक रीति से दी गई अंतिम विदाई, समाधि में डाला 31 किलो नमक

नंदिनी के निधन के बाद परिवार ने उन्हें किसी सामान्य पशु की तरह नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह सम्मानपूर्वक अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर पर गुलाब की पंखुड़ियों से पुष्प वर्षा की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच धार्मिक रीति-रिवाज पूरे किए गए।

परिवार के अनुसार, नंदिनी को समाधि देते समय 31 किलोग्राम नमक डालकर मिट्टी दी गई। परिवार का कहना है कि वर्षों तक घर का हिस्सा रहीं गो माता को सम्मानपूर्वक विदाई देना उनका धार्मिक और नैतिक दायित्व था।

आयोजन के जरिए गो सेवा और संरक्षण का संदेश देना चाहता है परिवार

संत गुरु चंदर दास से जुड़े दहिया परिवार का कहना है कि नंदिनी की तेरहवीं केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य समाज में गो सेवा, गो संरक्षण और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था को मजबूत करना भी है।

परिवार ने क्षेत्र के ग्रामीणों, गो भक्तों और श्रद्धालुओं से आयोजन में शामिल होने की अपील की है। गांव में धार्मिक माहौल बना हुआ है और श्रद्धांजलि सभा, हवन, गो आरती तथा महाभोज के लिए व्यापक तैयारियां की गई हैं।