सिरसा की भंडारा समिति पर ₹5 करोड़ गबन का आरोप दानदाताओं को फर्जी रसीदें देने का मामला

सिरसा की चिन्मय कुट्टी भंडारा समिति पर ₹5 करोड़ के फर्जीवाड़े और फर्जी रसीदें देने के आरोप लगे हैं। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

सिरसा की भंडारा समिति पर ₹5 करोड़ गबन का आरोप दानदाताओं को फर्जी रसीदें देने का मामला

भंडारा समिति में ₹5 करोड़ फर्जीवाड़े का आरोप
दानदाताओं को फर्जी रसीदें देने का मामला सामने आया
कैश लेन-देन और रिकॉर्ड में गड़बड़ी पर केस दर्ज


सिरसा शहर में श्री चिन्मय कुट्टी भंडारा समिति में दान राशि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। समिति पर आरोप है कि वर्षों से दान में मिली रकम में गड़बड़ी कर करीब ₹5 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया गया और दानदाताओं को फर्जी रसीदें थमाई गईं। मामला तब उजागर हुआ जब एक सदस्य को खुद दान राशि देने पर फर्जी रसीद दे दी गई, जिसका कोई रिकॉर्ड कैश बुक में दर्ज नहीं मिला।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने इस मामले को लेकर समिति पदाधिकारियों से जवाब मांगा, तो संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। आरोप है कि समिति के पास पुराने लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं है। इससे पूरे मामले में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है।सिरसा में संस्था की इमारत का फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

बताया जा रहा है कि समिति का पंजीकरण वर्ष 2016 में हुआ, जबकि संस्था द्वारा उपयोग किए जा रहे लेटर पैड 2014-15 के हैं। इन लेटर पैड पर ‘अखिल भारतीय पंजीकृत’ जैसी जानकारी छपी हुई है, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप यह भी है कि इन्हीं लेटर पैड के जरिए दानदाताओं को फर्जी रसीदें दी जाती रहीं और लेन-देन का अधिकांश हिस्सा नकद में किया गया।

शिकायतकर्ता सुरेंद्र मोंगा, जो पंजाब के फरीदकोट (बठिंडा) के निवासी हैं और पहले समिति के सदस्य रह चुके हैं, ने पुलिस को दी शिकायत में कहा कि समिति के प्रबंधक और अन्य पदाधिकारी लंबे समय से दान राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई रसीदों की एंट्री कैश बुक में दर्ज नहीं की गई और नियमानुसार बैंक के माध्यम से होने वाले लेन-देन को नजरअंदाज किया गया।

मोंगा के अनुसार, वह 2014 से 2019 तक समिति के सदस्य रहे, लेकिन अगस्त 2019 में उन्हें समिति से निष्कासित कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 से 2025 तक की दान राशि में बड़े पैमाने पर गबन किया गया है और इसे छिपाने के लिए जाली दस्तावेज तैयार किए गए।

इस मामले में आर्थिक अपराध शाखा ने प्रारंभिक जांच की, जिसके आधार पर शहर थाना पुलिस ने आईपीसी की धारा 420 के तहत केस दर्ज कर लिया है। पुलिस का कहना है कि दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है और जांच के दौरान अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।

फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें दस्तावेजों की सत्यता, लेन-देन का तरीका और कथित फर्जीवाड़े की पूरी श्रृंखला को खंगाला जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।