दिल्ली प्रदर्शन में रोहतक के छात्र नेता का आरोप, पुलिस ने लाठियां मारकर सड़क पर घसीटा
दिल्ली के जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल रोहतक के छात्र नेता अमित पिलाना ने पुलिस पर लाठीचार्ज, सड़क पर घसीटने और महिलाओं से अभद्रता के आरोप लगाए।
दिल्ली प्रदर्शन में रोहतक के छात्र नेता का आरोप, पुलिस ने लाठियां मारकर सड़क पर घसीटा
➤ जंतर-मंतर से 800 मीटर पहले रोके गए प्रदर्शनकारी, 500-600 युवाओं ने तोड़ी बैरिकेडिंग
➤ नांगलोई के महाराजा सूरजमल स्टेडियम में रखा, शाम 7 बजे हिरासत से छोड़े जाने का दावा
रोहतक से दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के प्रदेश उपाध्यक्ष अमित पिलाना ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। अमित के मुताबिक, 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए निकले युवाओं को दिल्ली में कई स्तर की बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारी इन बैरिकेडिंग को पार करते हुए जंतर-मंतर से करीब 800 मीटर पहले तक पहुंच गए, जहां पुलिस ने उन्हें रोक लिया। अमित ने आरोप लगाया कि पुलिस ने युवाओं पर लाठियां बरसाईं, उन्हें पकड़कर सड़क पर घसीटा और हिरासत में लेकर नांगलोई के महाराजा सूरजमल स्टेडियम में रखा। उन्होंने महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने का दावा किया। अमित के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को शाम करीब 7 बजे छोड़ा गया।
दिल्ली पहुंचने से लेकर प्रदर्शन तक पुलिस की निगरानी का दावा
अमित पिलाना ने बताया कि दिल्ली पहुंचने और प्रदर्शन में शामिल होने तक का सफर आसान नहीं था। उनके अनुसार, पुलिस का कड़ा पहरा था और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई स्तर पर बैरिकेडिंग की गई थी। पुलिस से बचते हुए वे दिल्ली पहुंचे, लेकिन जंतर-मंतर के पास पहुंचने से पहले ही उन्हें रोकने की कोशिश की गई।
अमित का कहना है कि प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे युवाओं को लगातार पुलिस की निगरानी और रोक-टोक का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए हर स्तर पर कार्रवाई कर रही थी।
नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एचकेएस भवन पहुंचना बना चुनौती
अमित ने बताया कि रात के समय जब वे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे तो बाहर पुलिस का कड़ा पहरा था। स्टेशन से बाहर निकलना भी चुनौती बन गया था। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों से बचते हुए किसी तरह स्टेशन से बाहर निकले और इसके बाद हरकिशन सरजीत भवन (एचकेएस भवन) पहुंचे।
उनके अनुसार, प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे युवाओं की गतिविधियों पर पुलिस नजर रख रही थी। ऐसे में उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने के लिए सावधानी बरतनी पड़ रही थी।
पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने एचकेएस भवन को घेरा
अमित पिलाना के मुताबिक, जब पुलिस को पता चला कि एचकेएस भवन में युवा पहुंच रहे हैं तो रात में ही पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने भवन को चारों तरफ से घेर लिया। उन्होंने दावा किया कि इसके बाद युवाओं ने पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर वहां से निकलने का फैसला किया।
अमित के अनुसार, एचकेएस भवन से निकलने के बाद वे एके गोपालन भवन पहुंचे, लेकिन वहां भी पुलिस ने उन्हें घेर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों स्थानों पर पुलिस की मौजूदगी के कारण प्रदर्शनकारियों के लिए आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा था।
500-600 युवाओं ने एक साथ निकाला मार्च, बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े
अमित ने बताया कि 10 अक्टूबर को एके गोपालन भवन से करीब 500-600 लोगों की भीड़ नारेबाजी करते हुए एक साथ निकली। प्रदर्शनकारी आगे बढ़े तो रास्ते में पुलिस की बैरिकेडिंग आ गई। अमित के अनुसार, युवाओं ने बैरिकेडिंग तोड़ते हुए आगे बढ़ना जारी रखा और पुलिस की कई स्तर की बैरिकेडिंग पार कर ली।
उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर से करीब 800 मीटर पहले तक पहुंचने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें रोक लिया और हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी।
अमित का आरोप- लाठियां मारकर सड़क पर घसीटा, महिलाओं से अभद्रता की
अमित पिलाना ने आरोप लगाया कि जंतर-मंतर से करीब 800 मीटर पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ सख्ती की। उन्होंने दावा किया कि युवाओं को हिरासत में लेने के दौरान लाठियां मारी गईं और कई लोगों को पकड़कर सड़क पर घसीटा गया। अमित ने महिलाओं के साथ भी अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया।
उनके अनुसार, पुलिस की कार्रवाई के दौरान कई युवाओं को शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोटें आईं। अमित ने बताया कि किसी की पीठ पर, किसी के हाथ पर तो किसी के कान पर चोट लगी। उन्होंने दावा किया कि चोटिल युवाओं को बसों में भरकर हिरासत में ले जाया गया।
अमित ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वे आतंकवादी या बड़े अपराधी हों। हालांकि, ये सभी आरोप अमित पिलाना के बयान पर आधारित हैं।
महाराजा सूरजमल स्टेडियम में 300 से अधिक सीजेपी सदस्यों के पहले से मौजूद होने का दावा
अमित ने बताया कि हिरासत में लिए जाने के बाद उन्हें नांगलोई स्थित महाराजा सूरजमल स्टेडियम में रखा गया। उनके अनुसार, वहां पहले से ही सीजेपी के 300 से अधिक सदस्य मौजूद थे। अमित ने दावा किया कि पुलिस ने इन सदस्यों के फोन भी ले लिए थे।
उन्होंने बताया कि जब पुलिस उनके फोन लेने पहुंची तो उन्होंने फोन देने से मना कर दिया। अमित के अनुसार, हिरासत में रखे गए युवाओं के साथ हुए व्यवहार के विरोध में उन्होंने स्टेडियम में ही धरना शुरू कर दिया।
राष्ट्रगान के साथ धरने पर बैठे युवा, महिलाओं ने पहले रिहा होने से किया इनकार
अमित पिलाना ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई और उनके साथ हुए कथित अमानवीय व्यवहार के विरोध में प्रदर्शनकारी राष्ट्रगान के साथ स्टेडियम में धरने पर बैठ गए। उन्होंने बताया कि शाम करीब 7 बजे पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग समूहों में छोड़ना शुरू किया।
अमित के मुताबिक, पुलिस ने पहले महिलाओं को रिहा करने की बात कही, लेकिन महिलाओं ने पहले अकेले छोड़े जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस को सभी प्रदर्शनकारियों को एक साथ छोड़ना पड़ा।
अमित बोले- युवाओं से वोट का अधिकार छीना जा रहा
अमित पिलाना ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता युवाओं के मुद्दों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में भी युवाओं को लेकर इसी तरह की बातें कही गई थीं। अमित ने दावा किया कि रोहतक में एक लाख 15 हजार वोट कटे हैं और किन लोगों के वोट कटे, यह सभी को पता है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नोटिस भेजे गए और उनके वोट देने के अधिकार पर असर पड़ा। अमित ने आरोप लगाया कि एसआईआर के माध्यम से भी लोगों का वोट का अधिकार छीना जा रहा है।
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, भाजपा पर बचाव करने का आरोप
अमित ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर भाजपा को घेरते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार एक पद पर बैठे व्यक्ति हैं, वे सरकार नहीं हैं। इसके बावजूद उनके बचाव में पूरी भाजपा सरकार लगी हुई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिस तरह ज्ञानेश कुमार का बचाव किया जा रहा है, उससे ऐसा लगता है कि वे भारत के चुनाव आयुक्त के बजाय किसी एक राजनीतिक पार्टी के चुनाव आयुक्त हों। अमित ने कहा कि इसी वजह से प्रदर्शनकारी उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
एमडीयू और प्रदेश के छात्र आंदोलनों में सक्रिय हैं अमित पिलाना
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के जिला सचिव और प्रदेश उपाध्यक्ष अमित पिलाना महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी (एमडीयू) सहित हरियाणा में छात्र आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। वह दिल्ली में सीजेपी के प्रदर्शन में तीसरी बार शामिल हुए। इस प्रदर्शन में भी उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई।
Akhil Mahajan