रणदीप सुरजेवाला को मिली ग्रेनेड लांचर से उड़ाने की धमकी, हाईकोर्ट पहुंचे

कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हाईकोर्ट में अर्जी दायर कर कहा कि उन्हें पाकिस्तानी नंबर से जान से मारने की धमकी मिली है कोर्ट ने केंद्र और हरियाणा सरकार से रिपोर्ट तलब की है सुरजेवाला ने मोबाइल सुरक्षा की भी मांग की

रणदीप सुरजेवाला को मिली ग्रेनेड लांचर से उड़ाने की धमकी, हाईकोर्ट पहुंचे

➤ रणदीप सुरजेवाला ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार, जान को बताया खतरा
➤ पाकिस्तानी नंबर से मिली धमकी, कहा- ग्रेनेड लांचर से उड़ा दूंगा
➤ केंद्र सरकार से हाईकोर्ट ने मांगी रिपोर्ट, सुरक्षा बहाली की मांग


कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने अपनी और अपने परिवार की जान को खतरा बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में एक अर्जी दाखिल की है। अर्जी में सुरजेवाला ने खुलासा किया कि उन्हें ग्रेनेड लांचर से उड़ाने की धमकी मिली है। यह धमकी पाकिस्तानी मोबाइल नंबर से आई थी।

सुरजेवाला के वकील आर. कार्तिकेय ने अदालत को बताया कि 11 और 13 सितंबर को सुरजेवाला को एक अज्ञात व्यक्ति से धमकी भरे ऑडियो नोट्स और कॉल्स मिलीं। कॉल करने वाले ने उन्हें और उनके परिवार को जान से मारने की धमकी दी तथा यह भी कहा कि वह ग्रेनेड लांचर से उनकी कार पर हमला करेगा

धमकियों के बाद सुरजेवाला ने 13 सितंबर को हरियाणा के डीजीपी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद 15 सितंबर को दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर उन्होंने सभी साक्ष्य और धमकी से संबंधित दस्तावेजी रिपोर्ट सौंपी। 20 सितंबर को एक संक्षिप्त रिपोर्ट दोबारा साझा की गई।

वकील ने बताया कि सुरजेवाला को पहले वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा दी गई थी, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हालिया रिपोर्ट में कहा कि अब उन्हें किसी विशेष खतरे की आशंका नहीं है। इसलिए मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा वापस लेने का प्रस्ताव दिया है। इस पर अदालत ने केंद्र सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

कोर्ट ने 11 जुलाई को आदेश जारी कर कहा था कि सुरजेवाला चार सप्ताह में संबंधित अधिकारियों के समक्ष अपने खतरे से जुड़ी सभी सामग्री और साक्ष्य पेश करें। अब हाईकोर्ट ने केंद्र और हरियाणा सरकार को 10 नवंबर तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

सुरजेवाला का कहना है कि अन्य पूर्व सांसदों और विधायकों को मोबाइल सुरक्षा दी गई है, जबकि उन्हें इससे वंचित रखा गया है। यह भेदभावपूर्ण व्यवहार है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि उन्हें और उनके परिवार को मोबाइल सुरक्षा कवर उपलब्ध कराया जाए और उनके जीवन की रक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा कदम उठाए जाएं