मणिमहेश यात्रा में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू, भरमौर से 7 और होली से 10 मिनट में गौरीकुंड; फर्जी बुकिंग से बचने की अपील
मणिमहेश यात्रा 2026 में हेलीकॉप्टर सेवा शुरू हो गई है। भरमौर और होली से गौरीकुंड तक उड़ान मिलेगी। प्रशासन ने फर्जी बुकिंग से बचने की अपील की है।
➤ DGCA की अनुमति के बाद बुधवार सुबह से शुरू हुई हेलीकॉप्टर सेवा, 4 हेली टैक्सी श्रद्धालुओं को देंगी सुविधा
➤ भरमौर और होली से गौरीकुंड तक मिलेगी सेवा, यात्रा 19 सितंबर तक चलेगी
➤ टिकट सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट से बुक करें, फर्जी वेबसाइट और एजेंटों से सावधान रहने की अपील
उत्तर भारत की मशहूर मणिमहेश यात्रा-2026 के लिए हेलीकॉप्टर सेवा बुधवार सुबह से शुरू हो गई है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से अनुमति मिलने के बाद हेलीकॉप्टर सेवा का संचालन शुरू किया गया। इससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को मणिमहेश कैलाश के दर्शन करने और पवित्र शिवकुंड में डुबकी लगाने के लिए सुविधा मिलेगी।
भरमौर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हेलीकॉप्टर सेवा के टिकट की बुकिंग केवल मणिमहेश यात्रा की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से ही करें। manimaheshyatra.hp.gov.in प्रशासन ने अनधिकृत वेबसाइटों, एजेंटों या अन्य फर्जी माध्यमों से टिकट बुक नहीं करने की सलाह दी है, ताकि श्रद्धालु किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार न हों।
ऑफलाइन टिकट का विकल्प केवल विशेष परिस्थितियों में गौरीकुंड से भरमौर की एकतरफा वापसी के लिए मिल सकता है। श्रद्धालु हेलीकॉप्टर टिकट की बुकिंग और यात्रा से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देशों की जानकारी आधिकारिक वेबसाइट पर प्राप्त कर सकते हैं।
भरमौर और होली से मिलेगी हेलीकॉप्टर सेवा
हेलीकॉप्टर सेवा भरमौर और होली से उपलब्ध होगी। हेलीकॉप्टर श्रद्धालुओं को मणिमहेश के शिव कुंड से करीब एक किलोमीटर नीचे स्थित गौरीकुंड तक पहुंचाएगा। 19 सितंबर तक चलने वाली यात्रा के दौरान इस बार श्रद्धालुओं को 4 हेली टैक्सी की सेवाएं मिलेंगी।
इनमें दो हेलीकॉप्टर भरमौर से गौरीकुंड के लिए उड़ान भरेंगे, जबकि दो हेलीकॉप्टर होली से गौरीकुंड तक श्रद्धालुओं को पहुंचाएंगे। भरमौर से गौरीकुंड तक हेलीकॉप्टर से करीब 7 मिनट और होली से गौरीकुंड तक करीब 10 मिनट लगेंगे।
DGCA की अनुमति नहीं मिलने से मंगलवार को लौटे थे श्रद्धालु
मणिमहेश यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। इससे पहले मंगलवार को DGCA द्वारा सभी औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण हेलीपैड पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा था।
अब DGCA की अनुमति मिलने के बाद बुधवार सुबह से हेलीकॉप्टर सेवा शुरू कर दी गई है। इससे यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को गौरीकुंड तक पहुंचने के लिए एक वैकल्पिक और तेज माध्यम उपलब्ध हो गया है।
मणिमहेश यात्रा के लिए हड़सर से शुरू होता है पैदल सफर
मणिमहेश यात्रा के लिए भरमौर से करीब 11 किलोमीटर आगे हड़सर से पैदल यात्रा शुरू होती है। चंबा से भरमौर पहुंचने के बाद श्रद्धालु वाहनों के जरिए हड़सर तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद आगे का सफर पैदल तय करना होता है।
हड़सर से मणिमहेश झील यानी शिव कुंड की दूरी 13 किलोमीटर से ज्यादा है। रास्ते में कुछ जगह खड़ी चढ़ाई है और ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन का स्तर कम होने के कारण यात्रा आसान नहीं रहती।
धनछो से मणिमहेश शिव कुंड तक ठहरने की व्यवस्था
मणिमहेश यात्रा के पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धनछो, सुंदरासी, गौरीकुंड और मणिमहेश शिव कुंड के पास टेंट की व्यवस्था रहती है। यहां प्रति बिस्तर 250 से 350 रुपए वसूल किए जाते हैं। यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह व्यवस्था पैदल मार्ग के दौरान रात्रि विश्राम का विकल्प उपलब्ध कराती है।
13 हजार फीट की ऊंचाई पर है मणिमहेश झील
मणिमहेश की पवित्र झील समुद्र तल से 13000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि मणिमहेश कैलाश 18 हजार फीट से भी ऊंचा है। ऊंचाई और कठिन पैदल मार्ग के कारण यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। मणिमहेश झील को शिव कुंड के नाम से भी जाना जाता है और यहां स्नान के लिए हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
यात्रा के लिए पंजीकरण जरूरी, 50 रुपए शुल्क निर्धारित
मणिमहेश यात्रा के लिए पंजीकरण ट्रस्ट की वेबसाइट पर जाकर किया जा सकता है। इसके लिए 50 रुपए शुल्क निर्धारित किया गया है। बिना पंजीकरण के यात्रा पर जाने की अनुमति नहीं है। इसलिए यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को पहले पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद ही उन्हें यात्रा की अनुमति मिलेगी।
19 सितंबर को राधाष्टमी पर होगा मणिमहेश यात्रा का समापन
मणिमहेश यात्रा 2026 का समापन 19 सितंबर 2026 को राधाष्टमी के शुभ अवसर पर होगा। राधाष्टमी स्नान का शुभ मुहूर्त 18 सितंबर को दोपहर 1 बजे से शुरू होकर 19 सितंबर को दोपहर 3:26 बजे तक रहेगा।
यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन की ओर से आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही हैं। वहीं हेलीकॉप्टर सेवा शुरू होने के साथ दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए गौरीकुंड तक पहुंचना आसान होगा। प्रशासन ने टिकट बुकिंग के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी से बचने के लिए आधिकारिक वेबसाइट का ही इस्तेमाल करने की विशेष अपील की है।
Akhil Mahajan