पुरानी पेंशन की मांग को लेकर 2 जून को कैथल में निकलेगी साइकिल यात्रा

कैथल में 2 जून को पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति साइकिल यात्रा निकालेगी। कर्मचारी प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर OPS बहाली की मांग करेंगे।

पुरानी पेंशन की मांग को लेकर 2 जून को कैथल में निकलेगी साइकिल यात्रा

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर 2 जून को कैथल में निकलेगी साइकिल यात्रा

कर्मचारी शहीद स्मारक से सचिवालय तक निकालेंगे प्रदर्शन

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को सौंपेंगे ज्ञापन

कैथल में पुरानी पेंशन बहाली संघर्ष समिति ने 2 जून को बड़े प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस प्रदर्शन में केवल कैथल ही नहीं, बल्कि हरियाणा के अन्य जिलों से भी बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के शामिल होने की उम्मीद है।

संघर्ष समिति के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र धारीवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि 2 जून को कर्मचारी सुबह शहीद स्मारक, कैथल पर एकत्रित होंगे। इसके बाद शहर में साइकिल यात्रा निकाली जाएगी, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए सचिवालय पहुंचेगी।

उन्होंने बताया कि यात्रा के समापन पर कर्मचारियों की ओर से प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा जाएगा। इस दौरान पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की मांग दोहराई जाएगी।

विजेंद्र धारीवाल ने कहा कि कर्मचारी लंबे समय से पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इस मुद्दे पर कई बार आंदोलन और प्रदर्शन किए गए, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

उन्होंने दावा किया कि यदि पुरानी पेंशन योजना को दोबारा लागू किया जाता है तो इससे कर्मचारियों के साथ-साथ सरकार को भी फायदा होगा। कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और उनका भविष्य अधिक सुरक्षित होगा।

प्रेस वार्ता के दौरान धारीवाल ने नई पेंशन योजना (NPS) पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के वेतन से 10 प्रतिशत राशि काटी जाती है, जबकि सरकार 14 प्रतिशत योगदान करती है। उनके अनुसार यह राशि शेयर बाजार में निवेश की जाती है, लेकिन इसके सुरक्षित रहने की कोई गारंटी नहीं होती।

उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों और विभिन्न क्षेत्रों में चल रहे संघर्षों का असर शेयर बाजार पर पड़ता है। यदि बाजार में गिरावट आती है तो कर्मचारियों की जमा पूंजी भी प्रभावित होती है, जिससे उनके भविष्य को लेकर चिंता बढ़ जाती है।

धारीवाल ने बताया कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारियों को जमा राशि का 60 प्रतिशत हिस्सा दिया जाता है, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि के आधार पर पॉलिसी बनाई जाती है। उनका कहना है कि इस व्यवस्था को पारंपरिक पेंशन का विकल्प नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाल नहीं की जा रही। संघर्ष समिति ने सरकार से कर्मचारियों के हित में जल्द निर्णय लेने की मांग की है।