कैथल: हेड कॉन्स्टेबल की बर्खास्तगी की खबर, पुलिस करेगी प्रेस कॉन्फ्रेंस
कैथल में हेड कॉन्स्टेबल सुनील संधू के बर्खास्त होने की खबर सामने आई है। उन्होंने फेसबुक पोस्ट में DSP पर झूठे नशा केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप लगाया था। 9 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर किए गए हैं और मामले की जांच जारी है।
■ कैथल के हेड कॉन्स्टेबल सुनील संधू के बर्खास्त होने की चर्चा
■ DSP पर झूठे नशा केस में फंसाने की धमकी का आरोप
■ 2 दिन पहले 9 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, जांच जारी
कैथल में तैनात हेड कॉन्स्टेबल सुनील संधू को बर्खास्त किए जाने की खबर ने पुलिस महकमे और स्थानीय स्तर पर हलचल मचा दी है। हालांकि अब तक विभागीय अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के हवाले से कार्रवाई की चर्चा तेज है। मामले पर DSP गुरविंद्र सिंह ने कहा कि जल्द ही इस विषय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली और आंतरिक अनुशासन को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
विवाद की शुरुआत 23 फरवरी को हुई, जब सुनील संधू ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक लंबी पोस्ट लिखकर कलायत के DSP ललित यादव पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्हें झूठे नशा तस्करी के केस में फंसाने की धमकी दी गई है। इस पोस्ट के सामने आते ही मामला तूल पकड़ गया और सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। पोस्ट वायरल होने के बाद SP उपासना सिंह ने जांच के आदेश देते हुए गुहला के DSP कुलदीप बेनीवाल को जांच अधिकारी नियुक्त किया।
इसी विवाद के बीच दो दिन पहले सुनील संधू सहित नशा मुक्ति टीम के 9 सदस्यों को लाइन हाजिर कर दिया गया। जिला पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने अनुशासन और नियमों का पालन नहीं किया, जिसके चलते यह कदम उठाया गया। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किस विशेष नियम का उल्लंघन हुआ।
विवाद के बाद से सुनील संधू अस्वस्थ बताए जा रहे हैं और उनका इलाज कैथल के एक निजी अस्पताल में चल रहा है। परिवार के अनुसार वह मानसिक तनाव में हैं। उनकी फेसबुक पोस्ट में लिखे शब्दों ने पूरे मामले को भावनात्मक मोड़ दे दिया। उन्होंने लिखा था कि उन्होंने प्रशासन के कहने पर नशे के खिलाफ अभियान चलाया, लेकिन अब उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि वह सच का साथ दें या झूठ का।
संधू ने पोस्ट में यह भी आरोप लगाया कि DSP ललित यादव ने उन्हें स्मैक बेचने के झूठे केस में फंसाने की धमकी दी। उन्होंने लिखा कि वह एक उच्च अधिकारी के सामने यह धमकी दी गई थी। उन्होंने खुद को शहीद भगत सिंह का वंशज बताते हुए कहा कि वह झूठ नहीं बोल सकते और जरूरत पड़ी तो उनका नार्को टेस्ट करवा लिया जाए। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपने सेवा काल में कभी रिश्वत नहीं ली और यदि किसी ने उन्हें चाय तक पिलाई हो तो सामने आकर बताएं।
सुनील संधू कैथल में अपने परिवार के साथ रहते हैं। परिवार में उनकी पत्नी, दो बच्चे और मां हैं। उनके पिता का निधन हो चुका है। वह पहले कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे और बाद में पदोन्नत होकर हेड कॉन्स्टेबल बने। वह ‘मानवता विश्वास’ नामक एक NGO से भी जुड़े हैं, जिसके माध्यम से गरीब लड़कियों की शादी और जरूरतमंदों के इलाज में सहयोग करते रहे हैं।
अब सबकी निगाहें पुलिस विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया और प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की स्थिति साफ हो सकेगी।
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