इजराइली सेना की सख्त एडवाइजरी: बंकरों में रहें, हमलों की जानकारी साझा न करें; जानिए ईरान के सुप्रीम लीडर की असली ताकत

इजराइली सेना ने नागरिकों को ईरानी हमलों से जुड़ी जानकारी साझा न करने और बंकरों में रहने की सलाह दी है। साथ ही जानिए ईरान में सुप्रीम लीडर की शक्तियां और भूमिका क्या है।

इजराइली सेना की सख्त एडवाइजरी: बंकरों में रहें, हमलों की जानकारी साझा न करें; जानिए ईरान के सुप्रीम लीडर की असली ताकत

इजराइली सेना ने लोगों को हमलों से जुड़ी तस्वीरें और लोकेशन साझा न करने की चेतावनी दी
बंकरों में रहने की एडवाइजरी, जवाबी कार्रवाई जारी होने का दावा
ईरान में सुप्रीम लीडर धार्मिक ही नहीं, बल्कि देश के सर्वोच्च राजनीतिक और सैन्य प्रमुख भी


मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच इजराइल की सेना ने एक अहम एडवाइजरी जारी कर नागरिकों से अपील की है कि वे ईरानी बमबारी से प्रभावित इलाकों की कोई भी तस्वीर, वीडियो या लोकेशन सोशल मीडिया पर साझा न करें। सेना का कहना है कि इस तरह की जानकारी दुश्मन के लिए रणनीतिक रूप से मददगार साबित हो सकती है।

इजराइली डिफेंस फोर्स ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर स्पष्ट किया कि जवाबी हमले जारी हैं और सुरक्षा कारणों से नागरिकों को सतर्क रहना होगा। सेना ने कहा कि जब तक आधिकारिक रूप से बाहर निकलने की अनुमति न दी जाए, तब तक सभी निवासी सुरक्षित बंकरों में ही रहें।

यह एडवाइजरी ऐसे समय आई है जब ईरान और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। दोनों देशों की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों के दावे किए जा रहे हैं। इजराइल की यह चेतावनी दर्शाती है कि हालात अभी सामान्य नहीं हैं और सैन्य कार्रवाई जारी है।

ईरान का सुप्रीम लीडर: सिर्फ धर्मगुरु नहीं, देश का सर्वोच्च शासक

इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान की राजनीतिक संरचना को समझना भी जरूरी है। ईरान में सुप्रीम लीडर केवल धार्मिक प्रमुख नहीं होता, बल्कि वही देश का वास्तविक सर्वोच्च शासक होता है। वर्तमान में यह पद Ali Khamenei के पास रहा है।

ईरानी संविधान के अनुसार सुप्रीम लीडर सरकार, सेना, न्यायपालिका, मीडिया और अर्थव्यवस्था—सभी प्रमुख संस्थाओं पर अंतिम अधिकार रखते हैं। वे सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ होते हैं और विदेश नीति से लेकर परमाणु कार्यक्रम तक के बड़े फैसलों पर उनकी अंतिम मुहर होती है।

संविधान में यह भी उल्लेख है कि सुप्रीम लीडर को दुनिया भर के शिया मुसलमानों का आध्यात्मिक नेता माना जाता है। उन्हें विशेष धार्मिक अधिकार प्राप्त होते हैं, और उनके आदेश ईरान में सर्वोच्च माने जाते हैं। यही वजह है कि इस पद पर बैठा व्यक्ति केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की दिशा तय करने वाला केंद्रीय शक्ति केंद्र होता है।

मौजूदा हालात में जब मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव बढ़ रहा है, तब इजराइल की सुरक्षा चेतावनियां और ईरान की सत्ता संरचना दोनों ही वैश्विक चर्चा के केंद्र में हैं। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह टकराव सीमित रहेगा या व्यापक संघर्ष में बदल जाएगा।