155 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में करनाल के कारोबारी पर ED की बड़ी कार्रवाई
करनाल में 155.21 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने कारोबारी अशोक मित्तल के ठिकानों सहित हरियाणा, दिल्ली और गोवा के 11 स्थानों पर छापेमारी की।
155 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले में करनाल के कारोबारी पर ED की बड़ी कार्रवाई
हरियाणा, दिल्ली और गोवा में 11 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड खंगाल रही जांच एजेंसी
हरियाणा के करनाल में 155.21 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी की टीम ने सुबह करीब पांच बजे सेक्टर-13 स्थित लकड़ कारोबारी अशोक मित्तल के आवास और लक्कड़ मार्केट स्थित कार्यालय पर छापेमारी की। कई घंटों तक चली इस कार्रवाई में बैंकिंग दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से जुड़े अहम दस्तावेजों की जांच की गई।
छापेमारी की सूचना मिलते ही शहर में चर्चा का माहौल बन गया। कार्रवाई के दौरान ईडी अधिकारियों के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने परिसर को अपने कब्जे में लेकर रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू की।
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई है। जांच एजेंसी का दावा है कि मामला बैंकिंग प्रणाली में हेरफेर और विदेशी व्यापार से जुड़े वित्तीय लेन-देन से संबंधित है।
ईडी के अनुसार इस मामले में अशोक मित्तल के अलावा सौरभ ढींगरा, भारत भूषण मित्तल, रमन सिंघल और अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। एजेंसी वित्तीय नेटवर्क और लेन-देन की पूरी श्रृंखला को खंगाल रही है।
11 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई
प्रवर्तन निदेशालय ने केवल करनाल ही नहीं बल्कि हरियाणा, दिल्ली और गोवा में कुल 11 स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान चलाया। जांच एजेंसी के मुताबिक ये सभी ठिकाने महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड और उससे जुड़े कारोबारी नेटवर्क से संबंधित हैं।
जांच एजेंसी इस पूरे मामले को बड़े वित्तीय नेटवर्क और मनी ट्रेल की जांच के रूप में देख रही है। इसी वजह से विभिन्न राज्यों में एक साथ कार्रवाई की गई।
क्या है 155 करोड़ रुपये का घोटाला?
ईडी के अनुसार आरोपियों ने विदेशी व्यापार से जुड़े लेटर ऑफ क्रेडिट (LC) की सीमा बढ़ाने के लिए कथित तौर पर बैंकिंग रिकॉर्ड में हेरफेर की। इससे तत्कालीन ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और अन्य बैंकों के कंसोर्टियम को करीब 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को विभिन्न खातों, कंपनियों और संपत्तियों में ट्रांसफर किया गया। इसी आधार पर मामले की जांच मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की जा रही है।
अशोक मित्तल की भूमिका पर फोकस
ईडी की टीम ने अशोक मित्तल के घर और कार्यालय में मौजूद बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंपनी दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन से संबंधित जानकारी की बारीकी से जांच की। एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित घोटाले में उनकी भूमिका क्या रही और धन के प्रवाह का नेटवर्क किस प्रकार संचालित किया गया।
फिर चर्चा में आया GST चोरी का मामला
मंगलवार की कार्रवाई के बाद अशोक मित्तल एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। इसके साथ ही करीब दो वर्ष पहले सामने आए 134 करोड़ रुपये के कथित GST चोरी मामले की भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बताया जाता है कि उस मामले में उनकी गिरफ्तारी हुई थी और कुछ समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली थी।
पंचकूला से हुई थी गिरफ्तारी
जानकारी के अनुसार GST चोरी मामले में कार्रवाई के दौरान अशोक मित्तल को पंचकूला से गिरफ्तार किया गया था। बाद में वे कई महीनों तक जेल में रहने के बाद जमानत पर रिहा हुए।
शिकायतकर्ता अनिल अरोड़ा का दावा है कि GST बकाया की रिकवरी के दौरान उनकी कुछ संपत्तियों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया था। बताया जाता है कि उन संपत्तियों को सौरभ ढींगरा ने करीब 1.89 करोड़ रुपये में खरीदा था। अब ED की नई कार्रवाई के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
pooja