हिमाचल में नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उप-प्रधानों ने ली शपथ,'एंटी चिट्टा' अभियान से जुड़ा संकल्प

हिमाचल प्रदेश में 2,909 पंचायतों के नव-निर्वाचित प्रधानों और उप-प्रधानों ने शपथ ली। मुख्यमंत्री सुक्खू ने 'एंटी चिट्टा' अभियान के तहत नशामुक्त समाज बनाने की विशेष शपथ भी दिलाई।

हिमाचल में नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उप-प्रधानों ने ली शपथ,'एंटी चिट्टा' अभियान से जुड़ा संकल्प

हिमाचल की 2,909 पंचायतों के प्रधानों और उप-प्रधानों ने ली शपथ

मुख्यमंत्री सुक्खू ने 'एंटी चिट्टा' अभियान के तहत दिलाई विशेष शपथ

नशामुक्त समाज और ग्रामीण विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान

हिमाचल प्रदेश में हाल ही में संपन्न हुए पंचायत चुनावों के बाद सोमवार को नव-निर्वाचित पंचायत प्रधानों और उप-प्रधानों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। जिला शिमला की 441 पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों और उप-प्रधानों का शपथ ग्रहण समारोह शिमला स्थित पीटर हाउस में आयोजित किया गया।

समारोह में प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने राज्य सरकार के 'एंटी चिट्टा' अभियान के तहत सभी प्रतिनिधियों को विशेष शपथ भी दिलाई। इस पहल का उद्देश्य पंचायत स्तर पर नशे के खिलाफ जनजागरूकता बढ़ाना और समाज को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से अपने-अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने, युवाओं को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों से अवगत कराने और नशे की बिक्री व सेवन पर रोक लगाने में सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया।

प्रदेश में हुए पंचायत चुनावों के बाद 12 जिलों में कुल 3,754 पंचायत प्रधान और 3,754 उप-प्रधान निर्वाचित हुए हैं। इनमें से सोमवार को कांगड़ा जिले को छोड़कर शेष 11 जिलों की 2,909 पंचायतों के प्रधानों और उप-प्रधानों को जिला स्तर पर आयोजित कार्यक्रमों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने शपथ दिलाई।

जिला कांगड़ा के नवनिर्वाचित प्रधानों और उप-प्रधानों का शपथ ग्रहण समारोह 18 जून को दाड़ी मेला मैदान में आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री स्वयं उपस्थित होकर प्रतिनिधियों को शपथ दिलाएंगे।

पंचायती राज संस्थाओं को ग्रामीण विकास और स्थानीय स्वशासन की मजबूत आधारशिला माना जाता है। शपथ ग्रहण के दौरान नव-निर्वाचित प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने, पारदर्शी प्रशासन सुनिश्चित करने और जनकल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का संकल्प लिया।