अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का भव्य समापन: CM सुक्खू ने रावी में किया 'मिंजर' विसर्जन, हजारों श्रद्धालुओं ने देखी ऐतिहासिक शोभायात्रा

हिमाचल प्रदेश के चंबा में अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का भव्य समापन हुआ। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने शोभायात्रा का नेतृत्व करते हुए रावी नदी में पारंपरिक मिंजर विसर्जन किया।

अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का भव्य समापन: CM सुक्खू ने रावी में किया 'मिंजर' विसर्जन, हजारों श्रद्धालुओं ने देखी ऐतिहासिक शोभायात्रा

➤ चंबा के ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का रंगारंग समापन, CM सुक्खू ने किया शोभायात्रा का नेतृत्व

➤ पारंपरिक रीति से रावी नदी में 'मिंजर' का विसर्जन, प्रदेश की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना

➤ देवी-देवताओं की भव्य झांकियां, लोक संस्कृति और पारंपरिक वेशभूषा ने बांधा समां


हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक चंबा शहर में सप्ताहभर तक चले अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेले का रविवार को पारंपरिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक उल्लास के साथ समापन हो गया। समापन समारोह में मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पारंपरिक शोभायात्रा का नेतृत्व किया और सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार रावी नदी में 'मिंजर' का विसर्जन कर प्रदेश की खुशहाली, शांति और अच्छी फसल की कामना की।

मेले के अंतिम दिन हजारों श्रद्धालु, स्थानीय लोग और पर्यटक इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बने। पूरे शहर में धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और पारंपरिक विरासत का अनूठा संगम देखने को मिला।

ऐतिहासिक शोभायात्रा बनी आकर्षण का केंद्र

समापन अवसर पर अखंड चंडी पैलेस से मंजरी गार्डन तक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए देवी-देवताओं की पालकियां, पारंपरिक वेशभूषा में सजे महिला-पुरुष, लोक कलाकार और सांस्कृतिक दल शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज से पूरा चंबा उत्सव के रंग में रंगा नजर आया।

हिमाचल प्रदेश पुलिस, होमगार्ड और प्रशासनिक दल भी शोभायात्रा का हिस्सा बने। आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था के व्यापक इंतजाम किए गए थे।

क्या है 'मिंजर' विसर्जन की परंपरा?

मिंजर मेला चंबा की सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। समापन के दिन लाल वस्त्र में नारियल, मौसमी फल, सिक्के और मिंजर बांधकर रावी नदी में प्रवाहित किए जाते हैं। यह परंपरा अच्छी फसल, समृद्धि, शांति और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक मानी जाती है।

मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने भी इसी परंपरा का पालन करते हुए रावी नदी में मिंजर अर्पित किया और प्रदेश व देश की खुशहाली की प्रार्थना की।

चंबा की संस्कृति से रूबरू हुए पर्यटक

मेले के दौरान देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य, संगीत और हस्तशिल्प का आनंद लिया। रंग-बिरंगी झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मेले को यादगार बना दिया।


मुख्यमंत्री सुक्खू ने चंबा को दी 333 करोड़ की विकास सौगात: 26 परियोजनाओं से बदलेगी जिले की तस्वीर

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने रविवार को चंबा विधानसभा क्षेत्र को 333.25 करोड़ रुपये की लागत वाली 26 विकास परियोजनाओं की सौगात देकर जिले के विकास को नई दिशा देने का बड़ा संदेश दिया। मुख्यमंत्री ने एक साथ कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। इनमें स्वास्थ्य, सड़क, पुल, ग्रामीण संपर्क मार्ग, पार्किंग और औषधि भंडारण जैसी आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है और चंबा को विकास के मामले में किसी भी स्तर पर पीछे नहीं रहने दिया जाएगा।

सबसे बड़ी सौगात पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल, चंबा को मिली। मुख्यमंत्री ने 158 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 200 बिस्तरों वाले अत्याधुनिक अस्पताल भवन का लोकार्पण किया। इस भवन के शुरू होने से चंबा सहित पांगी, भरमौर और आसपास के दूरदराज क्षेत्रों के हजारों मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी। अब गंभीर मरीजों को उपचार के लिए दूसरे जिलों या बड़े शहरों का रुख कम करना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण सड़क और पुल परियोजनाओं का भी लोकार्पण किया। इनमें शाहपुर-सिहुंता-चुवाड़ी-चंबा सड़क, परेल-कोहलड़ी सड़क, परेल मार्ग-चंबा-बनीखेत सड़क, लुड्डू-घरमाड़ी सड़क, सराहन-रान सड़क तथा भनेरा-देवीदेहरा-रठियार-मनकोट सड़क प्रमुख हैं। इसके अलावा रावी नदी पर करियां-भरियां-कोठी सड़क पर बने बॉक्स गर्डर पुल का उद्घाटन भी किया गया। इन परियोजनाओं से लोगों की आवाजाही आसान होगी और परिवहन व्यवस्था को नई गति मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने द्रबला, सनोथा, साच-फतेहपुर, नाणु, द्रडा सेरू, घरग्राम, घतरेड़, छांजून, रुंडेगा, बसोधन और मानकोट सहित कई गांवों के संपर्क मार्गों के निर्माण का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के पूरा होने से ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तक लोगों की पहुंच आसान बनेगी।

शहर की बढ़ती यातायात समस्या को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने भगत क्षेत्र में 25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली बहुमंजिला वाहन पार्किंग (प्रथम चरण) की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना से चंबा शहर में पार्किंग की समस्या काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।

स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने सरोल स्थित कुष्ठ अस्पताल परिसर में जिला औषधि भंडार एवं टीकाकरण भंडार की आधारशिला भी रखी। यह परियोजना जिले में दवाइयों और टीकों की आपूर्ति व्यवस्था को अधिक प्रभावी और व्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार विकास कार्यों को राजनीति से ऊपर उठकर आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और आधारभूत ढांचे को मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल चंबा विधानसभा क्षेत्र बल्कि पूरे जिले के लोगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और क्षेत्र के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि हिमाचल के दूरस्थ क्षेत्रों तक भी आधुनिक सुविधाएं पहुंचें। चंबा के लिए घोषित इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।