हरियाणा में नमो भारत कॉरिडोर को अगले सप्ताह मिल सकती है सैद्धांतिक मंजूरी, दिल्ली से करनाल-पानीपत और गुरुग्राम-जेवर तक बढ़ेगी कनेक्टिविटी
हरियाणा में नमो भारत कॉरिडोर परियोजनाओं को अगले सप्ताह सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। दिल्ली-करनाल, गुरुग्राम-जेवर समेत तीन रूट प्रस्तावित हैं।
➤ दिल्ली-करनाल कॉरिडोर की लंबाई करीब 136.30 किलोमीटर होगी
➤ गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक 64 किलोमीटर का कॉरिडोर प्रस्तावित
➤ केंद्र की बैठक के बाद परियोजनाओं पर काम तेजी से शुरू होने की उम्मीद
हरियाणा में नमो भारत ट्रेन कॉरिडोर से जुड़ी तीन अहम परियोजनाओं को लेकर अगले सप्ताह बड़ा फैसला हो सकता है। दिल्ली से हरियाणा के विभिन्न शहरों को जोड़ने वाले प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम यानी RRTS कॉरिडोर को केंद्र सरकार से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने की उम्मीद है। योजना से जुड़े अधिकारियों की बैठक केंद्रीय शहरी तथा आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में नई दिल्ली में प्रस्तावित है। बैठक की तारीख जल्द तय होने की संभावना है। इसके बाद परियोजनाओं पर काम तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है। हरियाणा सरकार इन योजनाओं को पहले ही अपनी सहमति दे चुकी है। इन कॉरिडोर के तैयार होने से दिल्ली और हरियाणा के बीच तेज कनेक्टिविटी बढ़ेगी तथा रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को समय की बचत के साथ बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है।
तीन प्रमुख रूट पर प्रस्तावित है नमो भारत कॉरिडोर.
हरियाणा में नमो भारत कॉरिडोर के लिए तीन प्रमुख रूट प्रस्तावित हैं। इनमें दिल्ली-गुरुग्राम-धारूहेड़ा-बावल-बहरोड़, दिल्ली-कुंडली-सोनीपत-गन्नौर-समालखा-पानीपत-करनाल और गुरुग्राम से जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक का मार्ग शामिल है।
परियोजनाओं से संबंधित शुरुआती तैयारियां भी आगे बढ़ चुकी हैं। ट्रैक के पिलर और लाइन के निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया के लिए मिट्टी के नमूने लिए जा चुके हैं। केंद्र से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद आगे की औपचारिकताओं को पूरा करने की दिशा में तेजी आने की उम्मीद है।
दिल्ली से करनाल तक करीब 136 किलोमीटर का कॉरिडोर.
प्रस्तावित प्रमुख मार्गों में दिल्ली से करनाल तक का कॉरिडोर खास तौर पर हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह मार्ग दिल्ली से कुंडली, सोनीपत, गन्नौर, समालखा और पानीपत होते हुए करनाल तक जाएगा।
इस कॉरिडोर की लंबाई करीब 136.30 किलोमीटर प्रस्तावित है। इसे राष्ट्रीय राजमार्ग-44 के साथ विकसित करने की योजना है। इससे दिल्ली से पानीपत, सोनीपत और करनाल की ओर आने-जाने वाले यात्रियों को तेज सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होने की उम्मीद है।
दिल्ली-गुरुग्राम से राजस्थान तक भी जुड़ेगा रूट.
दूसरी परियोजना में दिल्ली-गुरुग्राम-धारूहेड़ा-बावल-बहरोड़ मार्ग शामिल है। इस कॉरिडोर पर करीब 32,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
योजना के पहले चरण में प्रस्तावित मार्ग विकसित किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में ट्रैक को राजस्थान के अलवर तक ले जाने की योजना है। इससे दिल्ली, गुरुग्राम और राजस्थान के बीच क्षेत्रीय परिवहन नेटवर्क को विस्तार मिलने की उम्मीद है।
गुरुग्राम से जेवर एयरपोर्ट तक भी प्रस्तावित कॉरिडोर.
तीसरे मार्ग के तहत गुरुग्राम के इफको चौक से गोल्फ कोर्स रोड, घाटा और फरीदाबाद के बाटा चौक होते हुए उत्तर प्रदेश के जेवर स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक नमो भारत कॉरिडोर प्रस्तावित है।
इस मार्ग की लंबाई करीब 64 किलोमीटर होगी। इस साझा ट्रैक पर नमो भारत ट्रेन के साथ मेट्रो चलाने की भी योजना है। इससे गुरुग्राम, फरीदाबाद और जेवर एयरपोर्ट के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी विकसित होने की उम्मीद है।
लाखों यात्रियों को मिल सकती है सुविधा.
नमो भारत कॉरिडोर परियोजनाओं का उद्देश्य दिल्ली और आसपास के शहरों के बीच तेज और बेहतर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित रूट हरियाणा के कई प्रमुख औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों को जोड़ेंगे।
दिल्ली से पानीपत और करनाल की ओर जाने वाले यात्रियों के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद और जेवर एयरपोर्ट के बीच यात्रा करने वालों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। तेज परिवहन सुविधा से रोजाना आने-जाने वाले यात्रियों के समय की बचत हो सकती है और सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम होने की संभावना है।
अगले सप्ताह की बैठक पर टिकी नजर.
अब इस परियोजना के लिए अगले सप्ताह प्रस्तावित केंद्र सरकार की बैठक महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बैठक में योजना से जुड़े अधिकारियों के साथ परियोजनाओं की प्रगति और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा होने की उम्मीद है।
केंद्रीय शहरी तथा आवासन मंत्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में होने वाली बैठक के बाद परियोजनाओं को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। योजना से जुड़ी औपचारिकताएं जल्द पूरी करने की बात कही गई है। सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद इन प्रस्तावित कॉरिडोर को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
Akhil Mahajan