पानीपत में 10 हजार की रिश्वत लेते बिचौलिया गिरफ्तार, पुलिसकर्मी की भूमिका पर भी उठे सवाल
पानीपत में ACB ने 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते बिचौलिए को गिरफ्तार किया। शिकायतकर्ता ने समझौते के नाम पर दो लाख रुपए मांगने और पुलिसकर्मी की भूमिका का आरोप लगाया।
➤ ACB ने किशनपुरा चौकी के पास 10 हजार रुपए लेते दीपक को पकड़ा
➤ शिकायतकर्ता का आरोप, समझौते के नाम पर मांगे गए थे दो लाख रुपए
➤ DSP बोले- पुलिसकर्मी की शह पर बिचौलिए ने ली रिश्वत, पूछताछ जारी
हरियाणा के पानीपत में रिश्वतखोरी के मामले में करनाल ACB ने कार्रवाई करते हुए एक बिचौलिए को 10 हजार रुपए लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। कार्रवाई बुधवार शाम पुलिस चौकी किशनपुरा के पास की गई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पानीपत के कुटानी रोड स्थित हनुमान कॉलोनी निवासी दीपक के रूप में हुई है। शिकायतकर्ता कलीराम का आरोप है कि एक महिला से जुड़े विवाद में समझौता कराने के नाम पर उससे पहले दो लाख रुपए मांगे गए और बाद में 35 हजार रुपए में मामला निपटाने की बात कही गई। शिकायत के आधार पर ACB ने ट्रैप लगाया और 10 हजार रुपए की रकम लेते हुए दीपक को पकड़ लिया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि मौके पर एक पुलिसकर्मी को हिरासत में लिए जाने के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई। वहीं DSP सतीश वत्स ने बताया कि बिचौलिए ने एक पुलिसकर्मी की शह पर रिश्वत ली थी और संबंधित पुलिसकर्मी से पूछताछ की जा रही है।**
जीवनसाथी की तलाश में दलालों से जुड़ा था कलीराम.
करनाल के नलवी कलां निवासी कलीराम ने बताया कि वह रेहड़ी लगाकर परिवार चलाता है। उसकी पत्नी का करीब 10 साल पहले निधन हो गया था और उसके तीन बच्चे हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। कलीराम के अनुसार, वह दोबारा जीवनसाथी की तलाश में था। इसी दौरान उसने करनाल में कुछ लोगों से संपर्क किया, जिन्होंने उसकी मुलाकात दिल्ली के बिचौलियों से करवाई। बाद में पानीपत में एक महिला से उसकी मुलाकात कराई गई और शादी के लिए साढ़े तीन लाख रुपए की मांग की गई।
लोन लेकर दिए साढ़े तीन लाख रुपए.
कलीराम का कहना है कि उसके पास इतनी रकम नहीं थी, इसलिए उसने लोन लेकर साढ़े तीन लाख रुपए बिचौलियों को दिए। करीब चार महीने पहले एक महिला के साथ कोर्ट में लिव-इन से संबंधित कागजात तैयार करवाए गए। कलीराम के अनुसार, उसे बताया गया कि अब महिला उसके साथ रहेगी और दोनों का संबंध पत्नी-पति जैसा होगा।
उसका आरोप है कि महिला केवल दो दिन उसके साथ रही और इसके बाद पानीपत स्थित अपने घर लौट गई। कलीराम ने उसे वापस अपने साथ आने के लिए बुलाया, लेकिन वह नहीं आई।
महिला के नहीं लौटने के बाद भी मांगे गए पैसे.
कलीराम के अनुसार, महिला के उसके साथ नहीं रहने के बाद बिचौलियों ने उससे अलग-अलग समय पर और पैसे लिए। कभी 50 हजार रुपए तो कभी 30 हजार रुपए लिए जाने का आरोप है। इसके बावजूद महिला उसके पास वापस नहीं आई।
कलीराम का आरोप है कि बाद में उससे फिर पैसे मांगे गए। पैसे देने से इनकार करने पर महिला की ओर से उसके खिलाफ पानीपत की किशनपुरा चौकी में शिकायत कराई गई।
झूठे केस में फंसाने की धमकी देने का आरोप.
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि महिला और उसके साथ जुड़े लोगों ने उसे झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर पैसे मांगे। उसके अनुसार, उसे बार-बार पानीपत बुलाया गया और फोन पर भी दबाव बनाया गया।
कलीराम का यह भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में थाने में उसके साथ मारपीट की गई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
समझौते के लिए दो लाख रुपए मांगने का आरोप.
कलीराम के मुताबिक, मामले को खत्म करने और समझौता कराने के नाम पर उससे दो लाख रुपए मांगे जा रहे थे। बाद में 35 हजार रुपए में समझौता कराने की बात कही गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस पूरी प्रक्रिया में एक बिचौलिया पुलिस और उसके बीच संपर्क का काम कर रहा था।
इसके बाद कलीराम ने मामले की शिकायत ACB को दी और टीम के निर्देश पर 10 हजार रुपए लेकर बिचौलिए के पास पहुंचा।
ACB ने 10 हजार रुपए लेते पकड़ा.
शिकायत के आधार पर करनाल ACB की टीम ने ट्रैप कार्रवाई की। DSP सतीश वत्स के अनुसार, किशनपुरा चौकी के पास दीपक को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। मौके से रिश्वत की पूरी रकम बरामद किए जाने की बात भी DSP ने कही।
कार्रवाई राजपत्रित अधिकारी और छाया गवाह की मौजूदगी में की गई। राजपत्रित अधिकारी के तौर पर करनाल के जिला खेल अधिकारी सत्यवीर मौके पर मौजूद रहे।
पुलिसकर्मी की शह पर रिश्वत लेने की बात सामने आई.
DSP सतीश वत्स ने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि बिचौलिए ने एक पुलिसकर्मी की शह पर रिश्वत ली थी। संबंधित पुलिसकर्मी से पूछताछ की जा रही है। इससे मामले में पुलिसकर्मी की भूमिका को लेकर भी जांच आगे बढ़ रही है।
वहीं शिकायतकर्ता कलीराम का कहना है कि मौके पर पुलिसकर्मी को भी हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसके खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से उसने ACB की कार्रवाई पर असंतोष जताया है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि रिश्वत की रकम मांगने और लेने में बिचौलिए तथा पुलिसकर्मी की वास्तविक भूमिका क्या थी। ACB की कार्रवाई और पुलिस की पूछताछ के बाद ही मामले में आगे की तस्वीर साफ होगी।
Akhil Mahajan