हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का धरना खत्म, बातचीत पर बनी सहमति: 58 साल रिटायरमेंट और 730 दिन CCL वाले नियम ठुकराए, कल 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का पानीपत धरना बातचीत की सहमति के बाद खत्म हुआ। 24 सितंबर को 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ACS से नियमितीकरण समेत मांगों पर चर्चा करेगा।

हरियाणा में गेस्ट टीचर्स का धरना खत्म, बातचीत पर बनी सहमति: 58 साल रिटायरमेंट और 730 दिन CCL वाले नियम ठुकराए, कल 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक

शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर धरना बातचीत के आश्वासन पर खत्म
24 सितंबर को शिक्षा विभाग के ACS से मिलेगी 11 सदस्यीय टीम
गेस्ट टीचर्स ने 58 साल रिटायरमेंट और 730 दिन CCL वाले नियम ठुकराए


हरियाणा में गेस्ट टीचर्स को पक्का करने की मांग को लेकर बुधवार को पानीपत में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा के आवास के बाहर चल रहा धरना सरकार के बातचीत के लिए तैयार होने के बाद खत्म हो गया। प्रदेशभर से पहुंचे प्रदर्शनकारी शिक्षकों और सरकार के बीच प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत पर सहमति बनी है। तय कार्यक्रम के अनुसार वीरवार शाम चंडीगढ़ में शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ गेस्ट टीचर्स के 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक होगी। इस बैठक में शिक्षकों की मांगों और विभिन्न मुद्दों पर बातचीत की जाएगी। इसके बाद गेस्ट टीचर्स आगे की रणनीति और बड़ा फैसला लेंगे। धरना समाप्त होने के बाद पुलिस और प्रशासन ने भी राहत की सांस ली। हरियाणा शिक्षा विभाग ने Haryana Guest Teachers Service Rules, 2026 की अधिसूचना 22 सितंबर को जारी की है।

गेस्ट टीचर्स लंबे समय से नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इससे पहले 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना भी चल रहा था। 23 सितंबर को प्रदेशभर के अतिथि अध्यापकों ने पानीपत पहुंचकर शिक्षा मंत्री के आवास पर प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग अदालत के फैसले के अनुसार नियमितीकरण की प्रक्रिया लागू करना है।

सरकार के नए सेवा नियमों से संतुष्ट नहीं गेस्ट टीचर्स

गेस्ट टीचर्स ने सरकार की ओर से जारी हरियाणा अतिथि सेवा नियम-2026 को स्वीकार नहीं किया है। मंगलवार को सरकार ने इन सेवा नियमों की अधिसूचना जारी की थी। नियमों में गेस्ट टीचर के लिए 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट, महिला और एकल पुरुष गेस्ट टीचर्स के लिए पूरी सेवा अवधि में 730 दिन की चाइल्ड केयर लीव (CCL) समेत कई सेवा शर्तें तय की गई हैं। हरियाणा शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर भी 22 सितंबर 2026 की तारीख के साथ इन नियमों को प्रकाशित किया गया है।

हरियाणा गेस्ट टीचर्स के मीडिया प्रभारी डॉ. अजय लोहान ने कहा कि प्रदेश सरकार ने कोर्ट का फैसला लागू करने के बजाय जो सेवा नियम बनाए हैं, वह उनकी मांग नहीं थी। उनके मुताबिक करीब 12 हजार गेस्ट टीचर्स की एक ही मांग है कि कोर्ट का फैसला लागू करके उन्हें पक्का किया जाए। उन्होंने कहा कि इससे कम कुछ भी मंजूर नहीं है।

सेवा नियमों में 58 साल की उम्र में रिटायरमेंट

नए नियमों के अनुसार जिस महीने गेस्ट टीचर की उम्र 58 साल पूरी होगी, उसी महीने के आखिरी दिन उसकी रिटायरमेंट होगी। इससे पहले सेवा जारी रहेगी और केवल उम्र के इस आधार पर नौकरी से नहीं हटाया जाएगा। सेवा नियमों में गेस्ट टीचर्स के लिए अन्य अवकाश और सेवा संबंधी प्रावधान भी किए गए हैं।

730 दिन की CCL का प्रावधान महिला और एकल पुरुष गेस्ट टीचर्स के लिए है। यह पूरी सेवा अवधि में मिलेगी। यह अवकाश बिना वेतन होगा, लेकिन इसे सर्विस ब्रेक नहीं माना जाएगा।

इसके अलावा दो जीवित बच्चों तक वाले पुरुष गेस्ट टीचर को पत्नी के प्रसव या एक साल से कम उम्र के बच्चे को गोद लेने पर 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलेगा। यह अवकाश प्रसव की तारीख से 15 दिन पहले से लेकर प्रसव के छह महीने बाद तक लिया जा सकेगा।

नियमों में दंड का प्रावधान भी रखा गया है। गेस्ट टीचर्स पर रेगुलर टीचर्स की तरह नियुक्ति एवं दंड प्राधिकारी के नियम लागू होंगे। मामूली दंड में सर्विस रिकॉर्ड में चेतावनी या निंदा दर्ज करना तथा लापरवाही या आदेश के उल्लंघन से हुए नुकसान की वेतन से वसूली शामिल होगी।

गेस्ट टीचर्स की मुख्य मांग क्या है

गेस्ट टीचर्स एसोसिएशन की मांग है कि उन्हें कोर्ट के फैसलों के अनुसार 28 मई 2014 से पक्का माना जाए। शिक्षकों का कहना है कि नियमितीकरण की तारीख से ही उन्हें बकाया राशि, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य देय लाभ दिए जाने चाहिए।

गेस्ट टीचर्स की मांग में 6 प्रतिशत ब्याज समेत सभी लाभ दिए जाने की बात भी शामिल है। नए सेवा नियमों में EPF, वेतन बढ़ोतरी, मेडिकल लीव या पक्का करने का स्पष्ट जिक्र नहीं होने से गेस्ट टीचर्स नाराज हैं।

राज्य कार्यकारिणी सदस्य मेवा सिंह पिलानिया, बलजीत सिंह ढिल्लों और कुलदीप कुमार के मुताबिक नियमितीकरण की मांग को लेकर 23 जून से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन धरना चल रहा है। उनका कहना है कि सरकार को पक्का करने से जुड़े अदालती आदेश लागू करने चाहिए।

2005-06 में हुई थी नियुक्ति

गेस्ट टीचर्स विवाद की शुरुआत पुरानी नियुक्तियों से जुड़ी है। याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह के मुताबिक वर्ष 2005-06 में सरकारी स्कूलों में खाली पदों पर वैकेंसी निकाली गई थी। इसके लिए विज्ञापन जारी किया गया, चयन समिति का गठन हुआ, आवेदकों की जांच की गई और मेरिट लिस्ट जारी करने के बाद जॉइनिंग कराई गई।

इन शिक्षकों की जॉइनिंग गेस्ट फैकल्टी के रूप में हुई थी। इसमें करीब 12 हजार 700 टीचर्स को नियुक्ति दी गई। जॉइनिंग के बाद से ही शिक्षक और याचिकाकर्ता सुखविंदर सिंह स्थायी नियुक्ति की मांग करते रहे। इसको लेकर प्रदेशभर में प्रदर्शन हुए और मामला पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंचा।

सरकार ने कोर्ट में अस्थायी नियुक्ति की दलील दी

मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति केवल अस्थायी व्यवस्था के तौर पर की गई थी। सरकार का कहना था कि वे नियमित भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्त नहीं हुए थे, इसलिए उन्हें परमानेंट करने का अधिकार नहीं है।

गेस्ट टीचर्स के अनुसार, हाईकोर्ट ने सरकार के इस तर्क को खारिज कर दिया। अदालत के फैसले का हवाला देते हुए शिक्षक अब सरकार से उसके अनुरूप कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।

हाईकोर्ट के फैसले का गेस्ट टीचर्स दे रहे हवाला

गेस्ट टीचर्स का कहना है कि हाईकोर्ट ने लंबे समय तक उनकी सेवाएं लिए जाने के तथ्य को भी ध्यान में रखा था। उनके मुताबिक अदालत ने माना कि सरकार ने स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण उनकी सेवाएं लीं और करीब 20 साल तक काम कराया।

गेस्ट टीचर्स के अनुसार, अदालत ने यह भी कहा कि इतने लंबे समय तक सेवा लेने के बाद उन्हें केवल ‘स्टॉप गैप अरेंजमेंट’ बताना उचित नहीं है। शिक्षकों का कहना है कि अदालत ने शिक्षक की भूमिका को समाज और राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए उन्हें मनमाने तरीके से ‘स्पेयर’ की तरह इस्तेमाल किए जाने पर भी टिप्पणी की थी।

गेस्ट टीचर्स ने हाईकोर्ट के फैसले में सुप्रीम कोर्ट के ‘मदन सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ मामले का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 2014 की नियमितीकरण नीतियों की वैधता को बरकरार रखा था। इसी आधार पर गेस्ट टीचर्स का कहना है कि नियमितीकरण की मांग पर सरकार को अदालत के फैसले के अनुसार आगे बढ़ना चाहिए।

नियमित होने पर किन लाभों की मांग

गेस्ट टीचर्स के मुताबिक वर्ष 2005-06 की भर्ती प्रक्रिया में गेस्ट ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर (TGT), गेस्ट पोस्ट ग्रेजुएट टीचर (PGT), लैंग्वेज टीचर, ड्राइंग टीचर और कंप्यूटर इंस्ट्रक्टर नियुक्त हुए थे, जहां पॉलिसी लागू होगी। इसके अलावा उन शिक्षकों को भी लाभ मिलने की बात कही जा रही है, जिन्होंने 2014 की नियमितीकरण नीति की शर्तें पूरी की हैं।

गेस्ट टीचर्स का कहना है कि यदि उन्हें नियमित किया जाता है तो सरकारी शिक्षकों की तरह पे स्केल, महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), मेडिकल सुविधाएं, अर्न लीव (EL), मातृत्व एवं पितृत्व अवकाश, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन संबंधी लाभ मिल सकते हैं। इसके साथ ही सरकारी नियमों के अनुसार सर्विस रूल के तहत प्रमोशन का लाभ भी मिलने की बात कही गई है।

अब 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बैठक पर नजर

पानीपत में शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर धरना समाप्त होने के बाद अब गेस्ट टीचर्स की नजर वीरवार शाम चंडीगढ़ में होने वाली बैठक पर है। इस बैठक में 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के सामने अपनी मांगें रखेगा।

बैठक में नियमितीकरण, सेवा नियम-2026 और अदालत के फैसलों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके बाद गेस्ट टीचर्स अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे। फिलहाल सरकार के साथ बातचीत के लिए रास्ता खुलने के बाद पानीपत में चल रहा धरना समाप्त हो गया है।