बड़ा सियासी ड्रामा: 4 दिन से लापता कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष अचानक DCP दफ्तर पहुंचे, मौके पर मिली जमानत
गुरुग्राम में CM नायब सैनी को काले झंडे दिखाने के बाद लापता कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष DCP दफ्तर पहुंचे। दोनों को मौके पर जमानत मिल गई।
➤ CM को काले झंडे दिखाने के बाद अंडरग्राउंड थे वर्धन राव और पंकज डावर
➤ कांग्रेस के प्रदर्शन के पांच घंटे बाद दोनों वकीलों संग DCP दफ्तर पहुंचे
➤ FIR में कई धाराएं, SHO समेत 17 पुलिसकर्मी पहले ही सस्पेंड
गुरुग्राम। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी के काफिले को काले झंडे दिखाने के बाद लापता चल रहे कांग्रेस के दोनों जिलाध्यक्ष वर्धन राव और पंकज डावर सोमवार देर रात अचानक गुरुग्राम पहुंच गए। दोनों सीधे DCP वेस्ट करण गोयल के दफ्तर पहुंचे और वहां पेश हुए। दोनों के साथ पांच वकील भी मौजूद थे। पेशी के बाद दोनों को मौके से जमानत दे दी गई।
दोनों जिलाध्यक्षों के अचानक सामने आने से सोमवार को दिनभर चले सियासी और पुलिसिया ड्रामे का पटाक्षेप हो गया। इससे कुछ घंटे पहले ही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उदयभान समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पुलिस कमिश्नर ऑफिस के बाहर पहुंचकर प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस ने दोनों जिलाध्यक्षों के लापता होने को लेकर पुलिस प्रशासन पर सवाल उठाए और दर्ज FIR रद्द करने की मांग की थी।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेताओं ने ऐसा कौन सा अपराध कर दिया था, जिसके लिए उनके साथ इस तरह की कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पकड़े गए युवकों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। उन्होंने मांग की कि जिन पुलिसकर्मियों ने युवकों के साथ मारपीट की, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो कांग्रेस गुरुग्राम समेत पूरे हरियाणा में प्रदर्शन करेगी। इसी चेतावनी के करीब पांच घंटे बाद दोनों जिलाध्यक्ष अपने वकीलों के साथ DCP वेस्ट के कार्यालय पहुंच गए।
हालांकि, दोनों के DCP दफ्तर पहुंचने और जमानत मिलने के संबंध में गुरुग्राम पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
21 अगस्त को CM के काफिले को दिखाए थे काले झंडे
पूरा मामला 21 अगस्त 2026 का है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के गुरुग्राम पहुंचने के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष वर्धन यादव और पंकज डावर के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़क पर पहुंच गए थे। इस दौरान मुख्यमंत्री के काफिले के सामने काले झंडे लहराए गए और विरोध में नारेबाजी की गई।
इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया था। इसी मामले में दोनों जिलाध्यक्षों के खिलाफ भी कार्रवाई की बात सामने आई थी और दोनों इसके बाद से सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आए थे।
पुलिस ने इन धाराओं में दर्ज किया था केस
पुलिस की ओर से दर्ज मामले में BNS की धाराएं 115(2), 121(1), 126(2), 190, 191(2), 221, 132, 285 और 270 लगाई गई हैं। मामला 21 अगस्त 2026 को सिविल लाइन रोड, जॉन हाल के पास, गुरुग्राम में हुई घटना को लेकर दर्ज किया गया।
ASI चांद राम की शिकायत में आरोप लगाया गया कि मुख्यमंत्री के काफिले के निकलते ही कुछ लोग सड़क पर आकर रास्ता रोकने लगे और नारेबाजी करने लगे। पुलिस द्वारा उन्हें हटाने की कोशिश की गई तो आरोपियों ने QRT जवानों के साथ हाथापाई और मारपीट की। शिकायत में वर्दी फाड़ने और पुलिसकर्मियों को शारीरिक चोट पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया।
मामले में मुख्य आरोपी हरकेश को मौके से काबू करने की बात दर्ज है। वहीं वर्धन यादव, अमन प्रजापत, राजीव यादव, नीरज यादव, विकास हुड्डा, मुकेश डागर, पंकज डाबर, शिव, निखिल, अनुज, डॉ. हरेन्द्र सहरावत और 5-6 अन्य के फरार होने का उल्लेख किया गया।
ASI चांद राम और EHC कर्मबीर का सरकारी अस्पताल सेक्टर-10 से मेडिकल कराया गया था। शिकायत और MLC रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज कर जांच PSI शलिंदर को सौंपी गई।
8 कार्यकर्ता गिरफ्तार, अगले दिन बेल बॉन्ड पर रिहा
पुलिस ने 21 अगस्त की रात कांग्रेस के आठ कार्यकर्ताओं नीरज यादव, शिव कुमार, निखिल, अनुज, हरकेश प्रधान, अमन प्रजापति, राजीव यादव और हरेंद्र को गिरफ्तार किया था।
इन सभी को DCP वेस्ट करण गोयल के सामने पेश किया गया था। इसके बाद 22 अगस्त की शाम करीब 7 बजे सभी को बेल बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था।
वहीं, इसी पूरे मामले में पुलिस विभाग पर भी कार्रवाई हुई। सिविल लाइंस थाने के SHO समेत 17 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया। इनमें सिविल लाइंस थाने में तैनात नौ पुलिसकर्मी, QRT टीम के छह पुलिसकर्मी और सिक्योरिटी ब्रांच का एक ASI शामिल है।
अब दोनों जिलाध्यक्षों की पेशी के बाद बदला घटनाक्रम
सोमवार को दिनभर कांग्रेस नेताओं के प्रदर्शन और पुलिस प्रशासन पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच रात में वर्धन राव और पंकज डावर का अचानक DCP दफ्तर पहुंचना इस मामले का नया मोड़ माना जा रहा है। दोनों के साथ पांच वकीलों का पहुंचना और उसके बाद जमानत मिलना पूरे घटनाक्रम में अहम रहा।
अब इस मामले में पुलिस की ओर से आधिकारिक जानकारी और आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
Akhil Mahajan